नई दिल्ली, 25 जनवरी (हि.स.)। गणतंत्र दिवस पर इस वर्ष के पद्म पुरस्कार भी साधारण भारतीयों द्वारा किए गए असाधारण योगदानों को सम्मानित करने की परंपरा को आगे बढ़ाते हैं। देश के कोने-कोने से चुने गए ये गुमनाम नायक विभिन्न सामाजिक, भौगोलिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमियों से आते हैं। इनमें पिछड़े और दलित समुदायों, आदिम जनजातियों तथा दुर्गम और सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले ऐसे लोग शामिल हैं, जिन्होंने व्यक्तिगत कठिनाइयों और जीवन की त्रासदियों के बावजूद समाज के लिए समर्पित जीवन जिया। वैभव सूर्यवंशी बने भारतीय टीम के लिए चुने जाने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी इन व्यक्तियों ने दिव्यांगजन, महिलाओं, बच्चों, दलितों और जनजातीय समुदायों के कल्याण के लिए आजीवन कार्य किया है। स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका, स्वच्छता और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में उनके योगदान ने समाज की नींव को मजबूत किया है। स्थानीय स्वास्थ्य चुनौतियों से जूझते चिकित्सकों से लेकर देश का पहला मानव दुग्ध बैंक स्थापित करने वाले नवजात शिशु विशेषज्ञ तक, स्वदेशी विरासत के संरक्षण से लेकर जनजातीय भाषाओं और पारंपरिक युद्ध कलाओं के संवर्धन तक ये सभी पुरस्कार विजेता उन साधारण भारतीयों का प्रतीक हैं, जो निःस्वार्थ भाव से भारत माता की सेवा में लगे हैं। आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 शृंखला के लिए भारतीय टीम घोषित, श्रेयस अय्यर बने कप्तान गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक इस बार 45 लोगों को पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा। इनमें अंके गौड़ा, आर्मिडा फर्नांडिस, भगवानदास रायकर, भिकल्या लाडक्या धिंडा, बृज लाल भट्ट, बुधरी ताती, चरण हेम्ब्रम, चिरंजी लाल यादव, धार्मिकलाल चुनिलाल पंड्या, गफरुद्दीन मेवाती जोगी, हैली वार, इंदरजीत सिंह सिद्धू, के. पजनीवेल, कैलाश चंद्र पंत, खेम राज सुंद्रियाल, कोल्लक्कायिल देवकी अम्मा जी, कुमारासामी थंगराज, महेंद्र कुमार मिश्रा, मीर हाजीभाई कासमभाई, मोहन नागर, नरेश चंद्र देव वर्मा, निलेश विनोदचंद्र मंडलेवाला, नुरुद्दीन अहमद, ओथुवार तिरुत्तानी स्वामिनाथन, पद्मा गुरमेट, पोखिला लेकथेपी, पुन्नियामूर्ति नटेशन, आर. कृष्णन, रघुपत सिंह, रघुवीर तुकाराम खेडकर, राजस्थापति कालियप्पा गौंडर, रामा रेड्डी ममिडी, रामचंद्र गोडबोले और सुनीता गोडबोले, एस. जी. सुशीलम्मा, सांगयुसांग एस. पोंगेनर, शफी शौक, श्रीरंग देवबा लाड, श्याम सुंदर, सिमांचल पात्रो, सुरेश हनगवाड़ी, तागा राम भील, तेची गुबिन, तिरुवारूर भक्तवत्सलम, विश्वा बंधु और युमनाम जात्रा सिंह हैं। अंडर-18 एशिया कप : जापान को 4-1 से हराकर भारतीय पुरुष हॉकी टीम बनी चैंपियन
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नई दिल्ली, 25 जनवरी (हि.स.)। गणतंत्र दिवस पर इस वर्ष के पद्म पुरस्कार भी साधारण भारतीयों द्वारा किए गए असाधारण योगदानों को सम्मानित करने की परंपरा को आगे बढ़ाते हैं। देश के कोने-कोने से चुने गए ये गुमनाम नायक विभिन्न सामाजिक, भौगोलिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमियों से आते हैं। इनमें पिछड़े और दलित समुदायों, आदिम जनजातियों तथा दुर्गम और सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले ऐसे लोग शामिल हैं, जिन्होंने व्यक्तिगत कठिनाइयों और जीवन की त्रासदियों के बावजूद समाज के लिए समर्पित जीवन जिया।
इन व्यक्तियों ने दिव्यांगजन, महिलाओं, बच्चों, दलितों और जनजातीय समुदायों के कल्याण के लिए आजीवन कार्य किया है। स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका, स्वच्छता और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में उनके योगदान ने समाज की नींव को मजबूत किया है। स्थानीय स्वास्थ्य चुनौतियों से जूझते चिकित्सकों से लेकर देश का पहला मानव दुग्ध बैंक स्थापित करने वाले नवजात शिशु विशेषज्ञ तक, स्वदेशी विरासत के संरक्षण से लेकर जनजातीय भाषाओं और पारंपरिक युद्ध कलाओं के संवर्धन तक ये सभी पुरस्कार विजेता उन साधारण भारतीयों का प्रतीक हैं, जो निःस्वार्थ भाव से भारत माता की सेवा में लगे हैं।
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