Chhapra: मनरेगा से राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी का नाम हटाना दुर्भाग्यपूर्ण है उक्त बातें बिहार प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता नदीम अंसारी ने कही lउन्होने कहा की बीजेपी और आरएसएस हमेशा से गाँधी जी के विचार धर्मवाओं के खिलाफ और गाँधी जी के हत्त्यारे नाथूराम के विचारों के समर्थन में रही है l मनरेगा का नाम बदल कर गाँधी जी को अपमानित कर रही है अंसारी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि साल 2020-21 में मनरेगा में 31.97 लाख परिवारों को काम मिला। साल 2025-26 में 12 दिसम्बर तक केवल 6.74 लाख परिवारों को ही काम मिल पाया है। आज का पंचांग | अधिक ज्येष्ठ कृष्णपक्ष त्रयोदशी साल 2020-21 में मनरेगा मजदूरों को औसतन साल में 52 दिन ही काम मिला। साल 2025-26 में यह संख्या घटकर साल में 36 दिन रह गई है। साल 2020-21 में मनरेगा में 11.19 करोड़ मजदूरों को काम मिला। साल 2025-26 में 12 दिसम्बर तक यह संख्या घटकर 6.25 करोड़ रह गई है। यानी अब तक 5 करोड़ मजदूरों को कम काम मिला है। ‘धमाल 4’ का ट्रेलर रिलीज, फिर कॉमेडी का धमाल मचाएगी अजय देवगन की पलटन मनरेगा का केवल नाम नहीं बलके उनसे मुलभुत संग्राचना को ही समाप्त कर ने की कोशिस है l जहाँ एक तरफ राज्य सरकारों पर 40% बोझ डाला गया हैं वहीं मजदूरों के भी हितों की अनदेखी कीजा रही है l Facebook और Instagram हुआ डाउन, परेशान रहे यूजर्स मनरेगा को एक लम्बे विचार विमर्श के बाद ग्रामीण मजदूरों को रोजगार की गारंटी देने लिए बनाया गया था lजब के इस संसोधन के बाद रोजगार के कई अवसर आमाप्त होजायेगा l कांग्रेस पार्टी इस का विरोध हर अस्तर पर करेगी और गरीब मजदूरों के हक़ और अधिकार की आवाज उठाती रहेगी l
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Chhapra: मनरेगा से राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी का नाम हटाना दुर्भाग्यपूर्ण है उक्त बातें बिहार प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता नदीम अंसारी ने कही l उन्होने कहा की बीजेपी और आरएसएस हमेशा से गाँधी जी के विचार धर्मवाओं के खिलाफ और गाँधी जी के हत्त्यारे नाथूराम के विचारों के समर्थन में रही है l मनरेगा का नाम बदल कर गाँधी जी को अपमानित कर रही है
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अंसारी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि साल 2020-21 में मनरेगा में 31.97 लाख परिवारों को काम मिला। साल 2025-26 में 12 दिसम्बर तक केवल 6.74 लाख परिवारों को ही काम मिल पाया है।
साल 2020-21 में मनरेगा मजदूरों को औसतन साल में 52 दिन ही काम मिला। साल 2025-26 में यह संख्या घटकर साल में 36 दिन रह गई है। साल 2020-21 में मनरेगा में 11.19 करोड़ मजदूरों को काम मिला। साल 2025-26 में 12 दिसम्बर तक यह संख्या घटकर 6.25 करोड़ रह गई है। यानी अब तक 5 करोड़ मजदूरों को कम काम मिला है।
मनरेगा का केवल नाम नहीं बलके उनसे मुलभुत संग्राचना को ही समाप्त कर ने की कोशिस है l जहाँ एक तरफ राज्य सरकारों पर 40% बोझ डाला गया हैं वहीं मजदूरों के भी हितों की अनदेखी कीजा रही है l
मनरेगा को एक लम्बे विचार विमर्श के बाद ग्रामीण मजदूरों को रोजगार की गारंटी देने लिए बनाया गया था l जब के इस संसोधन के बाद रोजगार के कई अवसर आमाप्त होजायेगा l
कांग्रेस पार्टी इस का विरोध हर अस्तर पर करेगी और गरीब मजदूरों के हक़ और अधिकार की आवाज उठाती रहेगी l
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