नई दिल्ली, 06 फरवरी (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को एक संस्कृत श्लोक के माध्यम से पृथ्वी, मानव जीवन और सामूहिक कल्याण की भावना पर जोर दिया। उन्होंने प्राचीन वैदिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि मानव का कर्तव्य है कि वह प्रकृति के प्रति कृतज्ञ रहे और समाज के हित में कार्य करे। प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर सुभाषित साझा किया, उपस्थास्ते अनमीवा अयक्ष्मा अस्मभ्यं सन्तु पृथिवि प्रसूताः। दीर्घं न आयुः प्रतिबुध्यमाना वयं तुभ्यं बलिहृतः स्याम॥ इस सुभाषित का अर्थ है कि हे पृथ्वी माता तेरी गोद से उत्पन्न होने वाली वनस्पतियां, अन्न और औषधियां हमें निरोगी बनाएं, ताकि हम शक्तिशाली बनकर जीवन का सही विवेक प्राप्त करें और मातृभूमि के लिए सदा अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले बने। प्रधानमंत्री मोदी ने दी अमरनाथ तीर्थयात्रा शुरू होने पर शुभकामनाएं प्रधानमंत्री ने श्लोक के माध्यम से पृथ्वी से दीर्घायु, शक्ति और चेतना की कामना की तथा यह संदेश दिया कि मानव जीवन केवल व्यक्तिगत उन्नति तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि सामूहिक भलाई और संतुलन की ओर उन्मुख होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत हमें प्रकृति के साथ सहअस्तित्व और जिम्मेदारी का मार्ग दिखाती है। प्रधानमंत्री का यह संदेश पर्यावरण संरक्षण और मानव मूल्यों के प्रति जागरूकता के रूप में देखा जा रहा है। बालटाल और पहलगाम बेस कैंप से पहला जत्था पवित्र गुफा मंदिर के लिए व 3,865 श्रद्धालुओं का दूसरा जत्था जम्मू से रवाना फीफा विश्व कप 2026: पुर्तगाल प्री-क्वार्टर फाइनल में, क्रोएशिया को 2-1 से हराया
खबर सुनें
▶ Press play to listen
⚠️ आपका ब्राउज़र Text-to-Speech को सपोर्ट नहीं करता।
नई दिल्ली, 06 फरवरी (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को एक संस्कृत श्लोक के माध्यम से पृथ्वी, मानव जीवन और सामूहिक कल्याण की भावना पर जोर दिया। उन्होंने प्राचीन वैदिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि मानव का कर्तव्य है कि वह प्रकृति के प्रति कृतज्ञ रहे और समाज के हित में कार्य करे।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर सुभाषित साझा किया, उपस्थास्ते अनमीवा अयक्ष्मा अस्मभ्यं सन्तु पृथिवि प्रसूताः। दीर्घं न आयुः प्रतिबुध्यमाना वयं तुभ्यं बलिहृतः स्याम॥ इस सुभाषित का अर्थ है कि हे पृथ्वी माता तेरी गोद से उत्पन्न होने वाली वनस्पतियां, अन्न और औषधियां हमें निरोगी बनाएं, ताकि हम शक्तिशाली बनकर जीवन का सही विवेक प्राप्त करें और मातृभूमि के लिए सदा अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले बने।
प्रधानमंत्री ने श्लोक के माध्यम से पृथ्वी से दीर्घायु, शक्ति और चेतना की कामना की तथा यह संदेश दिया कि मानव जीवन केवल व्यक्तिगत उन्नति तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि सामूहिक भलाई और संतुलन की ओर उन्मुख होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत हमें प्रकृति के साथ सहअस्तित्व और जिम्मेदारी का मार्ग दिखाती है। प्रधानमंत्री का यह संदेश पर्यावरण संरक्षण और मानव मूल्यों के प्रति जागरूकता के रूप में देखा जा रहा है।
chhapratoday.com सारण जिले से संचालित सबसे पहली और लोकप्रिय न्यूज़ वेबसाइट है। वर्ष 2012 से यह अपने पाठकों/दर्शकों तक हर दिन सबसे पहले छपरा, सारण से लेकर देश, विदेश के ब्रेकिंग न्यूज़, लोकल घटनाएं, रेलवे टाइमिंग अपडेट, सरकारी योजनाएं, स्कूल-कॉलेज जानकारी, ट्रेंडिंग वीडियो, संस्कृति, त्यौहार और शहर के विकास से जुड़े हर अपडेट करती आ रही है। हर खबर, सबसे पहले, सबसे सटीक और विश्वसनीयता के साथ केवल chhapratoday.com पर पढ़ें।