Chhapra: “मातृदेवो भव, पितृदेवो भव” की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए RDS Public School में मातृ-पितृ पूजन दिवस का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यालय ने पीढ़ियों के बीच स्नेह और सम्मान के रिश्ते को मंच प्रदान किया। नन्हे बच्चों ने पारंपरिक तरीके से अपने दादा-दादी और नाना-नानी का स्वागत किया और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। बच्चों ने अपने दादा-दादी और नाना-नानी के साथ बिताए पलों को साझा किया। सुबह उठकर नमस्कार करना, उनकी सेवा करना और उनका सम्मान करना भारतीय परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बिहार कैबिनेट ने ज़मीन मापी शुल्क में बढ़ोतरी समेत कुल 25 प्रस्तावों को दी मंज़ूरी कार्यक्रम में जहां भावनात्मक क्षण देखने को मिले, वहीं बच्चों और बड़ों के बीच मस्ती और खुशियों के रंग भी बिखरे। यह आयोजन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि संस्कारों का जीवंत पाठ बना। भारतीय परंपरा हमें सिखाती है कि बड़ों का सम्मान ही सच्चा संस्कार है। दादा-दादी और नाना-नानी जीवन के अनुभवों की पाठशाला हैं। उनके सान्निध्य में ही बच्चों के व्यक्तित्व का समग्र विकास संभव है। खान ग्लोबल स्टडीज़ फायरिंग मामले में खान सर ने दायर की अग्रिम ज़मानत याचिका,मंगलवार को सुनवाई RDS Public School का यह प्रयास भारतीय संस्कृति की मूल भावना को सशक्त करने की दिशा में एक सार्थक कदम है। मातृ-पितृ पूजन दिवस ने यह संदेश दिया कि संस्कार और सम्मान ही हमारी सच्ची पहचान हैं। विधायक अनंत सिंह और गायक गुंजन सिंह की गिरफ्तारी पर रोक 15 जून तक बढ़ी
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Chhapra: “मातृदेवो भव, पितृदेवो भव” की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए RDS Public School में मातृ-पितृ पूजन दिवस का भव्य आयोजन किया गया।
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इस अवसर पर विद्यालय ने पीढ़ियों के बीच स्नेह और सम्मान के रिश्ते को मंच प्रदान किया। नन्हे बच्चों ने पारंपरिक तरीके से अपने दादा-दादी और नाना-नानी का स्वागत किया और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। बच्चों ने अपने दादा-दादी और नाना-नानी के साथ बिताए पलों को साझा किया। सुबह उठकर नमस्कार करना, उनकी सेवा करना और उनका सम्मान करना भारतीय परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कार्यक्रम में जहां भावनात्मक क्षण देखने को मिले, वहीं बच्चों और बड़ों के बीच मस्ती और खुशियों के रंग भी बिखरे। यह आयोजन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि संस्कारों का जीवंत पाठ बना। भारतीय परंपरा हमें सिखाती है कि बड़ों का सम्मान ही सच्चा संस्कार है। दादा-दादी और नाना-नानी जीवन के अनुभवों की पाठशाला हैं। उनके सान्निध्य में ही बच्चों के व्यक्तित्व का समग्र विकास संभव है।
RDS Public School का यह प्रयास भारतीय संस्कृति की मूल भावना को सशक्त करने की दिशा में एक सार्थक कदम है। मातृ-पितृ पूजन दिवस ने यह संदेश दिया कि संस्कार और सम्मान ही हमारी सच्ची पहचान हैं।
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