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छपरा के कुमार विक्रम ने ‘मर्दानी-3’ में कंपाउंडर की भूमिका से दर्ज कराई सशक्त उपस्थिति

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Chhapra: हाल ही में फिल्म ‘मर्दानी-3’ में “कंपाउंडर” की भूमिका निभाकर छपरा शहर के करीम चौक राहत रोड निवासी अभिनेता कुमार विक्रम ने अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है। उन्होंने अपने सशक्त और संयत अभिनय से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया है। सीमित स्क्रीन-टाइम के बावजूद उनकी उपस्थिति प्रभाव छोड़ने में सफल रही, जिसने उन्हें एक गंभीर और संभावनाशील अभिनेता के रूप में स्थापित किया है।

“कंपाउंडर” की भूमिका में कुमार विक्रम फोटो साभार: कुमार विक्रम

फिल्म में उनका किरदार मुख्य खलनायिका ‘अम्मा’ के अधीन कार्य करने वाले कंपाउंडर का है। भले ही यह भूमिका आकार में छोटी रही हो, लेकिन अपने प्रभाव और अभिव्यक्ति के कारण यह दर्शकों का ध्यान आकर्षित करने में सफल रही। अभिनय जगत की उस स्थापित धारणा को उन्होंने चरितार्थ किया कि पात्र छोटा या बड़ा नहीं होता, उसे निभाने वाला अभिनेता उसे यादगार बनाता है।

“कंपाउंडर” की भूमिका में कुमार विक्रम फोटो साभार: कुमार विक्रम

थिएटर से नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा तक

कुमार विक्रम ने वर्ष 2017 से पटना में थिएटर की दुनिया में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की। रंगमंच के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने उन्हें वर्ष 2018 में पटना में ‘बेस्ट एक्टर’ का सम्मान दिलाया। अभिनय की विधिवत शिक्षा के लिए उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) से प्रशिक्षण प्राप्त किया। इससे पहले वे हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी से अभिनय में स्नातकोत्तर डिप्लोमा भी कर चुके हैं।

अभिनय को वे केवल संवाद अदायगी तक सीमित नहीं मानते, बल्कि उसे देखने, समझने और महसूस करने की प्रक्रिया मानते हैं। यही दृष्टिकोण उनके अभिनय की विशेषता बनकर उभरा है।

अभिनेता कुमार विक्रम

जड़ों से जुड़ाव ही बनी पहचान

मुंबई पहुंचने के बाद जहां कई कलाकार अपनी क्षेत्रीय पहचान को पीछे छोड़ देते हैं, वहीं कुमार विक्रम ने अपनी जड़ों को ही अपनी ताकत बनाया। उन्होंने अपने व्यक्तित्व में किसी कृत्रिमता को स्थान नहीं दिया। ऑडिशन में उनकी सहजता और सच्चाई ने फिल्म निर्माताओं का ध्यान आकर्षित किया। फिल्म की टीम के एक सदस्य के अनुसार, “उनके पास तकनीक बाद में आई, लेकिन सच्चाई पहले से थी। कैमरा सच्चाई को पकड़ लेता है, और उनमें वह स्पष्ट दिखती है।”

परिवार और पृष्ठभूमि

कुमार विक्रम एक साधारण परिवार से आते हैं। उनके पिता चिकित्सक हैं, माता गृहिणी हैं और परिवार में भाई-बहन के साथ वे पले-बढ़े। अभिनय के साथ-साथ वे रेडियो जॉकी के रूप में भी कार्य कर चुके हैं और वर्तमान में मुंबई में अभिनय प्रशिक्षक के रूप में भी सक्रिय हैं।

शहर में खुशी का माहौल

उनकी सफलता की खबर से छपरा में हर्ष का माहौल है। यह उपलब्धि केवल एक कलाकार की नहीं, बल्कि उस विश्वास की भी है कि छोटे शहरों से निकले युवा बड़े मंच पर अपनी पहचान बना सकते हैं।

कुमार विक्रम स्वयं इस उपलब्धि को विनम्रता से स्वीकार करते हैं। उनका कहना है, “मैंने कहीं पहुंचने के लिए खुद को बदला नहीं, बस बेहतर बनने की कोशिश की।”

छपरा से मुंबई तक का यह सफर इस बात का प्रमाण है कि प्रतिभा, प्रशिक्षण और आत्मविश्वास के साथ छोटे शहरों की कहानियां भी बड़े परदे पर अपनी जगह बना सकती हैं।

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