Chhapra: राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण एवं बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार शनिवार को व्यवहार न्यायालय परिसर, छपरा में वर्ष 2026 की तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। लोक अदालत में न्यायालय में लंबित मामलों के साथ-साथ न्यायालय में मुकदमा दायर होने से पूर्व के विवादों का भी आपसी सहमति के आधार पर निपटारा किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन प्रभारी जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार सच्ची मिश्रा, वरीय पुलिस अधीक्षक रौशन कुमार, जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव राजीव कुमार, मुख्य विधिक सहायता अधिवक्ता पूर्णेन्दु रंजन तथा विधि मंडल के सचिव शशि भूषण तिवारी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर न्यायिक पदाधिकारी, अधिवक्ता, बैंक अधिकारी, प्रशासनिक पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में वादकारी उपस्थित रहे।
17 पीठों में हुई मामलों की सुनवाई
लोक अदालत में मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए कुल 17 पीठों का गठन किया गया था। इनमें दो पीठ जिला परिवहन कार्यालय तथा दो पीठ सोनपुर अनुमंडल न्यायालय में गठित की गई थीं। विभिन्न पीठों में सुलहनीय आपराधिक मामले, परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 से संबंधित चेक बाउंस मामले, बैंक ऋण वसूली, मोटर दुर्घटना दावा, वैवाहिक एवं पारिवारिक विवाद, श्रम विवाद, भूमि अधिग्रहण, राजस्व वाद तथा बिजली-पानी बिल और यातायात चालान से जुड़े मामलों की सुनवाई हुई।
बैंक मामलों में 4.40 करोड़ से अधिक का समझौता
लोक अदालत के दौरान बैंकों से संबंधित मामलों में कुल 4,40,91,674 रुपये की समझौता राशि तथा 2,33,50,396 रुपये की वसूली दर्ज की गई। न्यायालय द्वारा समझौते के आधार पर कुल 987 मामलों का निष्पादन किया गया।
वहीं सोनपुर में रेलवे अधिनियम के तहत प्री-लिटिगेशन के 853 मामलों का निष्पादन किया गया। इन मामलों का निपटारा न्यायालय में मुकदमा आने से पूर्व ही समझौते के आधार पर किया गया।
परिवहन एवं यातायात चालान के 666 मामलों का निपटारा
जिला परिवहन कार्यालय एवं यातायात से संबंधित मामलों में कुल 666 चालानों का निष्पादन किया गया। इन मामलों से कुल 21,81,872 रुपये की वसूली हुई। परिवहन कार्यालय से संबंधित अंतिम समेकित रिपोर्ट अलग से प्राप्त की जानी थी।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्रभारी जिला एवं सत्र न्यायाधीश सच्ची मिश्रा ने कहा कि लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक त्वरित, सुलभ और सस्ता न्याय पहुंचाना है। लोक अदालत में किसी पक्ष की हार या जीत नहीं होती, बल्कि दोनों पक्ष आपसी सहमति से विवाद का समाधान करते हैं। इससे समय और धन की बचत होने के साथ-साथ समाज में आपसी भाईचारा एवं सौहार्द भी मजबूत होता है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव राजीव कुमार ने वादकारियों, अधिवक्ताओं, बैंक अधिकारियों एवं प्रेस प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लोक अदालत में समझौते के आधार पर निष्पादित मामलों के विरुद्ध अपील का प्रावधान नहीं होता, जिससे विवाद का अंतिम रूप से निपटारा सुनिश्चित होता है।



















