Chhapra: यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर शुक्रवार को देशभर के बैंक कर्मी पांच सूत्री मांगों को लेकर हड़ताल पर रहे। हड़ताल के कारण बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहीं और ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
बैंक कर्मियों ने हड़ताल कर सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध जताया। इस दौरान बैंक कर्मियों ने सांकेतिक प्रदर्शन और आंदोलन के माध्यम से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आवाज बुलंद की।
सीवान के डीजीएस एवं बैंक ऑफ इंडिया के अमित ओझा तथा कुमार आशीष के नेतृत्व में आयोजित विरोध प्रदर्शन में सरकारी और निजी क्षेत्र के बैंकों के कर्मचारियों ने भाग लिया। बैंक कर्मियों ने प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) के मुद्दे पर सरकार की कथित विभाजनकारी नीति का विरोध किया।
पांच दिवसीय बैंकिंग की मांग
बैंक कर्मियों ने पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने, सभी बैंक कर्मियों के लिए समान प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन व्यवस्था लागू करने, पर्याप्त संख्या में नई नियुक्तियां करने तथा बैंकों में आवश्यकता के अनुरूप मानव संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की।
आंदोलनकारियों का कहना है कि बैंकिंग क्षेत्र में कर्मचारियों पर बढ़ते कार्यभार को देखते हुए पर्याप्त मानव संसाधन की व्यवस्था आवश्यक है। इसके साथ ही कर्मचारियों के बीच समान प्रोत्साहन व्यवस्था लागू करने की भी मांग की जा रही है।
मांगें नहीं मानी गईं तो तीन दिवसीय हड़ताल
बैंक कर्मियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार उनकी मांगों की अनदेखी जारी रखती है तो आगामी 28 से 30 सितंबर तक तीन दिवसीय हड़ताल की जाएगी। इसके बाद भी सरकार की ओर से मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं किए जाने पर 26 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दी गई है।
बैंक कर्मचारी संगठनों ने सरकार से समय रहते उनकी मांगों पर विचार कर समाधान की दिशा में पहल करने की मांग की है।


















