हरतालिका तीज हिंदू धर्म में सबसे पवित्र त्योहारों में से एक माना जाता है। यह त्योहार आस्था, भक्ति, प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है। विशेष रूप से महिलाएं इस त्योहार को बड़े ही उत्साह और उमंग के साथ मनाती हैं। यह व्रत हर वर्ष भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि तथा हस्त नक्षत्र में रखा जाता है।
इस दिन महिलाएं भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा करती हैं। महिलाएं इस व्रत को पूरे नियम, श्रद्धा और विधि-विधान के साथ करती हैं। विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं। मान्यता है कि इस व्रत को करने से परिवार में खुशियों की वृद्धि होती है और मन प्रसन्न रहता है। भगवान भोलेनाथ की पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं। वहीं, अविवाहित लड़कियां मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत करती हैं।
हरतालिका तीज व्रत का नाम
हरतालिका तीज व्रत का नाम दो शब्दों से मिलकर बना है। आम बोलचाल की भाषा में इसे हरतालिका कहा जाता है। हरतालिका शब्द में “हरत” और “आलिका” शब्द शामिल हैं, जिसका अर्थ क्रमशः हरण और सखी होता है।
हरतालिका व्रत कथा के अनुसार, माता पार्वती की सखियां उन्हें उनके पिता के घर से दूर जंगल में ले जाकर छिपा देती हैं। इसका कारण यह था कि माता पार्वती के पिता उनका विवाह भगवान विष्णु के साथ करना चाहते थे, जबकि माता पार्वती भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करना चाहती थीं।
हरतालिका तीज व्रत का निर्णय
वर्ष 2026 में हरतालिका तीज की तिथि को लेकर पंचांगों में कुछ असमंजस की स्थिति बनी हुई है, जिसके कारण लोगों में भ्रम की स्थिति है कि हरतालिका तीज का व्रत आखिर कब रखा जाए।
कुछ पंचांगों में 14 सितंबर 2026 को हरतालिका तीज का व्रत बताया गया है। वहीं, हरतालिका व्रत की परंपरा के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि और हस्त नक्षत्र में पूजा करने का विधान बताया गया है.
कब रखें व्रत? जानें तिथि एवं मुहूर्त
इस वर्ष हरतालिका तीज व्रत 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाया जाएगा.
- तृतीया तिथि का आरंभ: 13 सितंबर 2026, रविवार, सुबह 07:14 बजे से
- तृतीया तिथि की समाप्ति: 14 सितंबर 2026, सोमवार,सुबह 07:14 तक
- हस्त नक्षत्र का आरंभ: 12 सितंबर 2026, शनिवार, दोपहर 02:02 बजे
- हस्त नक्षत्र की समाप्ति: 13 सितंबर 2026, रविवार,दोपहर 02:24 बजे।
कई ज्योतिषियों के मत के अनुसार उदयातिथि को आधार मानते हुए 14 सितंबर 2026 दिन सोमवार को व्रत का निर्णय किया जा सकता है। 14 सितंबर 2026 को सूर्योदय के समय केवल तृतीया तिथि प्राप्त हो रही है, जबकि हस्त नक्षत्र नहीं है।
शास्त्रीय निर्णय
धर्मसिंधु और निर्णयसिंधु जैसे पारंपरिक ग्रंथों के अनुसार, यदि सूर्योदय के समय कोई तिथि विद्यमान रहती है, तो उस दिन उस तिथि का मान किया जाता है। तिथि का आरंभ या समाप्ति दिन में किसी भी समय हो, निर्णय के लिए सूर्योदय के समय विद्यमान तिथि को प्रमुखता दी जाती है।
निर्णयसिंधु के अनुसार
सूर्योदय के समय विद्यमान तिथि को ही उदयातिथि कहा जाता है। अगले दिन की तिथि का निर्णय अगले दिन के सूर्योदय के आधार पर किया जाता है।
14 सितंबर 2026 को सुबह 07:14 बजे तक तृतीया तिथि प्राप्त हो रही है। इसलिए उदयातिथि के आधार पर 14 सितंबर 2026 को भी हरतालिका तीज व्रत रखा जाएगा, मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा और विधि-विधान से करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है तथा मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
हरतालिका तीज का महत्व
हरतालिका तीज व्रत को भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक माना जाता है। महिलाएं इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करती हैं। कई महिलाएं 24 घंटे का निर्जला व्रत रखती हैं।
रात्रि में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना की जाती है तथा हरतालिका तीज की व्रत कथा सुनी जाती है। कई स्थानों पर महिलाएं रात्रि जागरण भी करती हैं। माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित की जाती है। घर में विभिन्न प्रकार के पकवान बनाए जाते हैं और ऋतु फल भगवान को अर्पित किए जाते हैं।
अगले दिन सुबह भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करने के बाद पूजा सामग्री एवं प्रतिमाओं का नदी या जलाशय में विसर्जन किया जाता है।
ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा
ज्योतिष, वास्तु एवं रत्न विशेषज्ञ
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