Chhapra: सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों को बेहतर और सुविधाजनक माहौल उपलब्ध कराने के लिए अब अस्पताल भवनों से लेकर मरीजों के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त करने का अभियान चलाया जाएगा
- पहले तय होगी जरूरत, फिर शुरू होंगे काम
- 31 अक्टूबर तक पूरा करना होगा काम
- पेयजल, पंखे और शौचालय पर विशेष जोर
- नए बने स्वास्थ्य भवनों को जल्द चालू कराने पर जोर
- किराये के भवनों से सरकारी भवनों में होंगे स्थानांतरण
- अस्पताल परिसर से हटेंगे बेकार वाहन और कबाड़
- चहारदीवारी, शौचालय और सौंदर्यीकरण के लिए अलग से योजना
- राज्य स्तर से होगी अभियान की निगरानी
- मरीजों की सुविधा को बनाया गया अभियान का केंद्र
- स्वास्थ्य संस्थानों को बेहतर बनाने की व्यापक पहल
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स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के जिला अस्पतालों से लेकर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर-आयुष्मान आरोग्य मंदिर तक रंग-रोगन, लघु मरम्मत, पेयजल, बैठने, पंखे, शौचालय और अन्य आवश्यक मरीज सुविधाओं को बेहतर करने का निर्णय लिया है।
इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि ने सभी जिलाधिकारी और सिविल सर्जन को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किया है। विभाग का उद्देश्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को केवल उपचार का केंद्र बनाने के बजाय मरीजों के लिए स्वच्छ, व्यवस्थित और सुविधाजनक स्थान के रूप में विकसित करना है। इसके लिए स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध राशि का उपयोग रोगी कल्याण समिति और जन आरोग्य समिति की सहभागिता से किया जाएगा। राज्य सरकार की ओर से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों के घर के नजदीक बेहतर तरीके से उपलब्ध कराने और अनावश्यक रेफरल को नियंत्रित करने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। इसी क्रम में अस्पतालों की आधारभूत व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है।
पहले तय होगी जरूरत, फिर शुरू होंगे काम
स्वास्थ्य सचिव ने निर्देश दिया है कि किसी भी स्वास्थ्य संस्थान में काम शुरू करने से पहले वहां की वास्तविक जरूरतों का आकलन किया जाए। जिला अस्पताल, अनुमंडलीय अस्पताल, रेफरल अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में रोगी कल्याण समिति की कार्यकारी समिति जरूरत और उपलब्ध राशि के अनुसार प्राथमिकता सूची तैयार करेगी। इसके बाद इस सूची को रोगी कल्याण समिति के शासी निकाय से अनुमोदित कराया जाएगा। वहीं अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर-आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के लिए जन आरोग्य समिति से प्राथमिकता सूची का अनुमोदन कराना अनिवार्य किया गया है।
31 अक्टूबर तक पूरा करना होगा काम
स्वीकृत प्राथमिकता सूची के अनुसार चिन्हित सभी कार्यों को 31 अक्टूबर 2026 तक पूरा कराने का निर्देश दिया गया है। संबंधित संस्थान और समितियां कार्यों के क्रियान्वयन के लिए जिम्मेदार होंगी, जबकि रोगी कल्याण समिति का शासी निकाय इनके पर्यवेक्षण और मार्गदर्शन की जिम्मेदारी निभाएगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि काम को केवल रंग-रोगन तक सीमित नहीं रखा जाएगा। मरीजों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए छोटे-छोटे लेकिन महत्वपूर्ण कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।
पेयजल, पंखे और शौचालय पर विशेष जोर
स्वास्थ्य संस्थानों की प्राथमिकता सूची तैयार करते समय शुद्ध पेयजल की व्यवस्था को विशेष महत्व दिया जाएगा। इसके साथ मरीजों और उनके परिजनों के बैठने के लिए पर्याप्त संख्या में कुर्सियां, पंखे तथा महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है। अस्पतालों में मरीजों और उनके परिजनों को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए 32 इंच का टीवी लगाने की भी व्यवस्था की गई है। इन टेलीविजन पर स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न कार्यक्रमों और जागरूकता संबंधी वीडियो दिखाए जाएंगे।
नए बने स्वास्थ्य भवनों को जल्द चालू कराने पर जोर
विभाग ने उन नवनिर्मित सरकारी स्वास्थ्य भवनों को विशेष प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है, जहां भवन तैयार हो चुका है, लेकिन वहां अभी तक स्वास्थ्य सेवाएं शुरू नहीं हो सकी हैं। हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर-आयुष्मान आरोग्य मंदिर, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जैसे भवनों में जहां सेवा शुरू नहीं हुई है, वहां जल्द से जल्द आवश्यक व्यवस्था कर उन्हें क्रियाशील कराने को कहा गया है। इसका उद्देश्य तैयार भवनों का उपयोग शीघ्र शुरू कर ग्रामीण और शहरी आबादी को उनके नजदीक स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना है।
किराये के भवनों से सरकारी भवनों में होंगे स्थानांतरण
ऐसे स्वास्थ्य संस्थान जो अभी निजी भवन या किराये के मकान में संचालित हो रहे हैं, उन्हें जहां संभव हो, सरकारी भवनों में स्थानांतरित किया जाएगा। इससे सरकारी स्वास्थ्य भवनों का बेहतर उपयोग होने के साथ संस्थानों के संचालन में स्थायित्व आने की उम्मीद है।
अस्पताल परिसर से हटेंगे बेकार वाहन और कबाड़
स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल परिसरों में लंबे समय से पड़े अनुपयोगी वाहनों, खराब उपकरणों और अन्य रद्दी सामग्री के निस्तारण का भी निर्देश दिया है। ऐसे सामान का निस्तारण स्वास्थ्य विभाग के पूर्व में जारी निर्देशों के अनुसार एमएसटीसी के माध्यम से कराया जाएगा। इससे अस्पताल परिसरों में अनावश्यक रूप से घिरी जगह खाली होगी और परिसर अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकेगा।
चहारदीवारी, शौचालय और सौंदर्यीकरण के लिए अलग से योजना
जहां स्वास्थ्य संस्थानों में चहारदीवारी, अतिरिक्त शौचालय, परिसर में मिट्टी भराई, सौंदर्यीकरण या वृक्षारोपण की आवश्यकता है, वहां इन कार्यों की अलग सूची तैयार की जाएगी। इन कार्यों को विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी-जी राम जी के माध्यम से कराने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए स्वास्थ्य संस्थानवार और प्रखंडवार सूची तैयार कर संबंधित कार्यक्रम पदाधिकारी और प्रखंड विकास पदाधिकारी को भेजने का निर्देश दिया गया है। सिविल सर्जन को अपने जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक ऐसे कार्यों की समेकित सूची तैयार कर जिला पदाधिकारी-सह-अध्यक्ष, जिला स्वास्थ्य समिति को उपलब्ध कराने को कहा गया है।
राज्य स्तर से होगी अभियान की निगरानी
इस पूरे अभियान की निगरानी के लिए राज्य स्वास्थ्य समिति की ओर से संयुक्त सचिव-सह-निदेशक (वित्त) बृन्दा लाल और अपर निदेशक (वित्त) नंद किशोर राज को राज्य स्तरीय नोडल पदाधिकारी बनाया गया है। नोडल पदाधिकारी स्वास्थ्य संस्थानों के लिए उपलब्ध राशि, किए जा रहे कार्यों और उनके समयबद्ध क्रियान्वयन की निगरानी करेंगे। प्रगति की नियमित जानकारी राज्य स्तर पर उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही अभियान के तहत कराए गए कार्यों पर आधारित लघु फिल्म तैयार करने का निर्देश भी दिया गया है, ताकि किए गए कार्यों का दस्तावेजीकरण किया जा सके।
मरीजों की सुविधा को बनाया गया अभियान का केंद्र
सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग ने इस पूरी पहल में रोगी कल्याण समिति और जन आरोग्य समिति की भागीदारी को महत्वपूर्ण माना है। स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य संस्थानों की वास्तविक जरूरतों की पहचान कर उसी के अनुसार राशि का उपयोग करने से मरीजों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है। अस्पताल में साफ-सफाई, पेयजल, बैठने की व्यवस्था, शौचालय और अन्य छोटी लेकिन आवश्यक सुविधाएं मरीजों के अनुभव को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। विभाग का जोर इन्हीं सुविधाओं को व्यवस्थित करने पर है।
स्वास्थ्य संस्थानों को बेहतर बनाने की व्यापक पहल
डीपीएम अरविन्द कुमार ने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को रंग-रोगन और मरम्मत के साथ मरीज सुविधाओं से लैस करने की यह पहल स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने की व्यापक योजना का हिस्सा है। जिला अस्पताल से लेकर गांव के आयुष्मान आरोग्य मंदिर तक सुविधाओं को बेहतर बनाने से लोगों को नजदीक ही अधिक व्यवस्थित स्वास्थ्य सेवाएं मिलने की उम्मीद है।



















