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21 Oct 2017      

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Chhapra/Patna: बापू के विचारों को आगे बढाते हुए बिहार में पूर्ण शराब बंदी लागू की गई है. जिससे महिलाओं पर घरेलू हिंसा कम हुई है. आज शराबबंदी के बाद समाज मे बदलाव आया है. उक्त बातें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना के बापू भवन में आयोजित बाल विवाह और दहेज प्रथा मुक्त राज्य बनाने के लिए राज्य व्यापी अभियान का शुभारम्भ करते हुए कही.

उन्होंने कहा कि महिलाओं के उत्थान के लिए उन्हें 50 प्रतिशत का आरक्षण राज्य में दिया गया. आज विद्यालयों में पढ़ने वाली लड़कियों की संख्या में इजाफा हुआ है. इन सभी के बावजूद बिहार कुछ सामाजिक कुरीतियों का आज भी शिकार है.

जागरूकता अभियान के बावजूद बाल विवाह और दहेज के मामले सामने आ रहे है. गरीबी, अशिक्षा और सामाजिक परंपरा की आड़ में बेटियों के साथ अन्याय हो रहा है. दहेज उत्पीड़न के मामले में बिहार का स्थान दूसरा है. अगर इस कुरीति को बंद किया जाए तो यह उत्पीड़न खत्म हो जाएगा. हम ने संकल्प लिया है कि बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ संकल्प लिया है बिहार को इस कुरीति से मुक्त कराएंगे.

बिहार का इतिहास वैभवशाली रहा है. चंद्रगुप्त, अशोक, गुरुगोविंद सिंह, बुद्ध, चाणक्य, आर्यभट की भूमि है. 1917 में बापू के नेतृत्व में पहला सत्याग्रह इसी भूमि पर हुई. बिहार में सामाजिक कुरीति को खत्म करने की जरूरत है. इस लिए आज से इस अभियान की शुरुआत की जा रही है.

उन्होंने कहा कि 21 जनवरी 2018 को पूरे बिहार में मानव श्रृंखला बनायी जायेगी. वैसे ही मानव श्रंृखला बनेगी जैसे 21 जनवरी 2017 को शराबबंदी के पक्ष में मानव श्रृंखला बनी थी.

सामाजिक कुरीति से स्वच्छता का सभी ले संकल्प: सुशील मोदी

उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि जहां आज एक ओर प्रधानमंत्री की पहल स्वच्छ भारत अभियान की तीसरी वर्षगांठ मना रहे है. वही बिहार में सामाजिक कुरीति को स्वच्छ करने की दिशा में कार्य शुरू किया गया है. समाज में यह कुरीति कहा से आई पहले लड़कियां स्वयंवर करती थी अपने वर चुनती थी आज लड़के चुन रहे है. इस सामाजिक कुरीति से निपटने के लिए समाज के सभी वर्ग के लोगों को सामने आना होगा संकल्प लेना होगा कि जिस इलाके में रहते है वहां बाल विवाह नही होने देंगे. अगले दो वर्ष के भीतर इस प्रथा को समाप्त करने का प्रयास करेंगे. समाज मे जो लड़कियां प्रताड़ित होती है दहेज प्रथा से बाद में वह ही अपने बेटे की शादी में दहेज की जिद करती है. इस मानसिकता को बदलने की जरूरत है. बिहार का नौजवान यह तय कर ले कि वह बाजार में नही बिकेगा दहेज नही लगा. तभी दहेज की कुरीति से मुक्ति मिलेगी.

मुख्य सचिव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि दहेज के बल पर हुई शादियां अक्सर टूट गयी है. इस कुप्रथा से बाहर निकलने से महिलाएं पर से एक मानसिक दबाब खत्म होगा.

सारण समाहरणालय सभागार में आयुक्त नर्मदेश्वर लाल, जिलाधिकारी हरिहर प्रसाद, डीआईजी अजित कुमार राय, पुलिस अधीक्षक हरकिशोर राय, एडीएम अरुण कुमार, एसडीओ चेतनारायण राय सूचना जनसंपर्क अधिकारी अनिल कुमार चौधरी समेत महिला एवं बाल कल्याण, शिक्षा विभाग के कर्मचारी उपस्थित थे.

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