रक्षाबंधन का त्योहार बहुत ही पावन और पवित्र माना जाता है। इस त्योहार का भाई-बहन पूरे वर्ष इंतजार करते हैं। रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, स्नेह और अटूट रिश्ते का प्रतीक है।यह एक ऐसा पवित्र त्योहार है, जिसमें बहन अपने भाई की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करती है।
बहन भाई के ललाट पर चंदन या रोली का तिलक लगाती है, उनकी आरती उतारती है और उनके दाहिने हाथ की कलाई पर रक्षासूत्र बांधती है। वह भगवान से प्रार्थना करती है कि उसका भाई स्वस्थ रहे, दीर्घायु हो और अपने करियर तथा जीवन में निरंतर उन्नति करे।
वहीं, भाई भी अपनी बहन को प्रेम और स्नेह के प्रतीक के रूप में उपहार, वस्त्र, मिठाई तथा धन आदि भेंट करता है। भाई अपनी बहन की खुशियों और सुख-समृद्धि की कामना करता है। भाई-बहन का प्रेम स्वच्छ, निःस्वार्थ और पवित्र माना जाता है। यह ऐसा रिश्ता है, जिसमें उम्र की कोई सीमा नहीं होती और समय के साथ प्रेम तथा स्नेह और भी गहरा होता जाता है।
रक्षाबंधन कब मनाया जाता है?
रक्षाबंधन का त्योहार सावन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस पूर्णिमा को कई स्थानों पर नारियल पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।
कब है रक्षाबंधन जाने शुभ मुहूर्त
साल 2026 में रक्षाबंधन का त्योहार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा।
पूर्णिमा तिथि
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 27 अगस्त 2026, दिन गुरुवार, सुबह 08:31 बजे।
पूर्णिमा तिथि समाप्त:
28 अगस्त 2026, दिन शुक्रवार, सुबह 09:17 बजे तक
राहुकाल का ध्यान रखें
रक्षाबंधन के दिन राखी बांधते समय राहुकाल का विशेष ध्यान रखना चाहिए। दिए गए समय के अनुसार सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक राहुकाल रहेगा। इस अवधि में राखी बांधने से बचना चाहिए।
राखी बांधते समय दिशा का रखें ध्यान।
सनातन धर्म में शुभ कार्यों के लिए दिशाओं का विशेष महत्व माना गया है। रक्षाबंधन भी इससे अलग नहीं है।
भाई को राखी बांधते समय उसे पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठाना शुभ माना जाता है। पूर्व दिशा को ऊर्जा, उत्साह, प्रकाश और नई शुरुआत की दिशा माना जाता है। मान्यता है कि पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठने से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है और शुभ कार्य के प्रभाव में वृद्धि होती है।बहन को भाई के ललाट पर तिलक लगाकर उसकी आरती उतारनी चाहिए और इसके बाद दाहिने हाथ की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर उसके सुख, स्वास्थ्य, दीर्घायु और उज्ज्वल भविष्य की कामना करनी चाहिए।
रक्षाबंधन केवल राखी बांधने का त्योहार नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास, स्नेह और जीवनभर एक-दूसरे का साथ निभाने के संकल्प का पावन पर्व है।
ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा
ज्योतिष वास्तु एवं रत्न विशेषज्ञ
8080426594/9545290847



















