काठमांडू: नेपाल में लगातार दो दिन से हो रही बारिश के कारण पर्वत, स्याङ्जा और गुल्मी जिलों के संगम स्थल पर स्थित दुनिया की सबसे बड़ी शालिग्राम शिला बाढ़ के पानी में डूब गई है। काली गण्डकी नदी और सेती नदी का जलस्तर बढ़ने से शिला तक जाने वाला मार्ग, निकट स्थित सत्तल और परिक्रमा स्थल भी पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। शालिग्राम विद्याश्रम के संरक्षक कुलराज तिवारी ने बताया कि काली गण्डकी नदी के बढ़ते जलप्रवाह के कारण शालिग्राम शिला डूब गई है। लगातार बारिश से कालीगण्डकी और सेती नदी दोनों में पानी का स्तर तेजी से बढ़ा है। सेवा में लगे पुजारी और पंडितों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है। वहीं, प्रतिदिन पूजा-अर्चना और दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु भी शालिग्राम शिला के दर्शन से वंचित हो गए हैं। स्थानीय निवासी तिलक पराजुली के अनुसार, सेतीबेनी में मिलने वाली सेती नदी और काली गण्डकी नदी के तेज बहाव से शिला का परिक्रमा स्थल भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। उन्होंने कहा कि शिला क्षेत्र में बाढ़ आने के बावजूद फिलहाल आसपास की बस्ती को तत्काल कोई खतरा नहीं है। आज का पंचांग | आषाढ़ शुक्लपक्ष प्रतिपदा पवित्र शालिग्राम शिला के साथ-साथ शालिग्राम क्षेत्र में बने सत्तल सहित सभी संरचनाएं पानी में डूब गई हैं। शिला की सुरक्षा के लिए बनाए गए तटबंध और गेबियन जाल भी जलमग्न हो गए। प्रशासन ने श्रद्धालुओं के दर्शन पर रोक लगा दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि काली गण्डकी ‘ए’ जलविद्युत परियोजना के बांध के कारण बाढ़ की स्थिति बनने पर पर्वत, स्याङ्जा और गुल्मी की सीमा पर स्थित सेतीबेनी बाजार हर बार डूबने के खतरे में आ जाता है। काली गण्डकी और सेती नदी के बढ़ते जलस्तर से सेतीबेनी बाजार में बाढ़ की आशंका बढ़ गई है, जिससे पर्वत और स्याङ्जा की ओर स्थित बाजार क्षेत्रों के करीब 200 व्यापारी और स्थानीय निवासी चिंतित हैं। दोहरीकरण कार्य के चलते 16 से 21 जुलाई तक कई ट्रेनों का मार्ग परिवर्तन, शॉर्ट टर्मिनेशन एवं पुनर्निर्धारण दो वर्ष पहले सावन महीने में आई बाढ़ का पानी बाजार तक पहुंच गया थी, जिसमें एक मकान ढह गया था और आधा दर्जन घरों के लोग विस्थापित हो गए थे। गल्याङ नगरपालिका-5 के वडाध्यक्ष घनश्याम भट्टराई ने कहा कि जब तक काली गण्डकी नदी के प्रवाह की दिशा नहीं बदली जाती, तब तक यह खतरा बना रहेगा। उन्होंने शालिग्राम शिला की सुरक्षा के लिए नदी का बहाव गुल्मी की ओर मोड़ने की मांग भी दोहराई। विहादी गांवपालिका के अध्यक्ष परबीन गुरुङ ने कहा कि शालिग्राम शिला के निकट स्थित स्याङ्जा की गल्याङ नगरपालिका, पर्वत की विहादी गांवपालिका और गुल्मी की कालीगण्डकी गांवपालिका को आपसी समन्वय के साथ सेतीबेनी क्षेत्र के संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा छपरा मंडल कारा में नेत्र जांच शिविर का किया गया आयोजन उधर, पर्वत जिला पुलिस कार्यालय ने लगातार बारिश के बीच सेतीबेनी क्षेत्र सहित विभिन्न नदियों और नालों में बाढ़ एवं भूस्खलन का खतरा बने रहने की चेतावनी देते हुए लोगों से सतर्क रहने और आवश्यक सुरक्षा उपाय अपनाने की अपील की है। पुलिस निरीक्षक राजन पटेल ने कहा कि जोखिम कभी भी बढ़ सकता है, इसलिए लापरवाही न बरतने की सलाह दी गई है।
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काठमांडू: नेपाल में लगातार दो दिन से हो रही बारिश के कारण पर्वत, स्याङ्जा और गुल्मी जिलों के संगम स्थल पर स्थित दुनिया की सबसे बड़ी शालिग्राम शिला बाढ़ के पानी में डूब गई है। काली गण्डकी नदी और सेती नदी का जलस्तर बढ़ने से शिला तक जाने वाला मार्ग, निकट स्थित सत्तल और परिक्रमा स्थल भी पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं।
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शालिग्राम विद्याश्रम के संरक्षक कुलराज तिवारी ने बताया कि काली गण्डकी नदी के बढ़ते जलप्रवाह के कारण शालिग्राम शिला डूब गई है। लगातार बारिश से कालीगण्डकी और सेती नदी दोनों में पानी का स्तर तेजी से बढ़ा है। सेवा में लगे पुजारी और पंडितों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है। वहीं, प्रतिदिन पूजा-अर्चना और दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु भी शालिग्राम शिला के दर्शन से वंचित हो गए हैं।
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स्थानीय निवासी तिलक पराजुली के अनुसार, सेतीबेनी में मिलने वाली सेती नदी और काली गण्डकी नदी के तेज बहाव से शिला का परिक्रमा स्थल भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। उन्होंने कहा कि शिला क्षेत्र में बाढ़ आने के बावजूद फिलहाल आसपास की बस्ती को तत्काल कोई खतरा नहीं है।
पवित्र शालिग्राम शिला के साथ-साथ शालिग्राम क्षेत्र में बने सत्तल सहित सभी संरचनाएं पानी में डूब गई हैं। शिला की सुरक्षा के लिए बनाए गए तटबंध और गेबियन जाल भी जलमग्न हो गए। प्रशासन ने श्रद्धालुओं के दर्शन पर रोक लगा दी है।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि काली गण्डकी ‘ए’ जलविद्युत परियोजना के बांध के कारण बाढ़ की स्थिति बनने पर पर्वत, स्याङ्जा और गुल्मी की सीमा पर स्थित सेतीबेनी बाजार हर बार डूबने के खतरे में आ जाता है। काली गण्डकी और सेती नदी के बढ़ते जलस्तर से सेतीबेनी बाजार में बाढ़ की आशंका बढ़ गई है, जिससे पर्वत और स्याङ्जा की ओर स्थित बाजार क्षेत्रों के करीब 200 व्यापारी और स्थानीय निवासी चिंतित हैं।
दो वर्ष पहले सावन महीने में आई बाढ़ का पानी बाजार तक पहुंच गया थी, जिसमें एक मकान ढह गया था और आधा दर्जन घरों के लोग विस्थापित हो गए थे। गल्याङ नगरपालिका-5 के वडाध्यक्ष घनश्याम भट्टराई ने कहा कि जब तक काली गण्डकी नदी के प्रवाह की दिशा नहीं बदली जाती, तब तक यह खतरा बना रहेगा। उन्होंने शालिग्राम शिला की सुरक्षा के लिए नदी का बहाव गुल्मी की ओर मोड़ने की मांग भी दोहराई।
विहादी गांवपालिका के अध्यक्ष परबीन गुरुङ ने कहा कि शालिग्राम शिला के निकट स्थित स्याङ्जा की गल्याङ नगरपालिका, पर्वत की विहादी गांवपालिका और गुल्मी की कालीगण्डकी गांवपालिका को आपसी समन्वय के साथ सेतीबेनी क्षेत्र के संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
उधर, पर्वत जिला पुलिस कार्यालय ने लगातार बारिश के बीच सेतीबेनी क्षेत्र सहित विभिन्न नदियों और नालों में बाढ़ एवं भूस्खलन का खतरा बने रहने की चेतावनी देते हुए लोगों से सतर्क रहने और आवश्यक सुरक्षा उपाय अपनाने की अपील की है। पुलिस निरीक्षक राजन पटेल ने कहा कि जोखिम कभी भी बढ़ सकता है, इसलिए लापरवाही न बरतने की सलाह दी गई है।
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