सारण, 20 मई (हि.स.)। अखिल भारतीय औषधि विक्रेता संघ के आह्वान पर आयोजित एक दिवसीय बंदी का असर पूरे जिले में देखा गया। जिला औषधि विक्रेता संघ और बिहार केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के नेतृत्व में जिले भर की लगभग 2,500 दवा दुकानें पूरी तरह बंद रहीं, जिससे करोड़ों रुपये का दवा कारोबार प्रभावित हुआ। संघ के जिला अध्यक्ष अभिषेक कुमार और सचिव ज्ञानेश्वर प्रसाद जायसवाल ने संयुक्त रूप से बताया कि यह आंदोलन केवल व्यावसायिक हितों की रक्षा के लिए नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए है। उन्होंने सरकार के सामने अपनी प्रमुख मांगें रखते हुए दवाओं की अनियंत्रित और अनियमित ऑनलाइन बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की मांग की। रिविलगंज: चोरी की बाइक, अवैध हथियार व कारतूस बरामद, दो गिरफ्तार दवा विक्रेताओं का कहना है कि बिना किसी स्पष्ट कानूनी प्रावधान और सख्त रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के इंटरनेट पर दवाओं की बिक्री की अनुमति देना मरीजों की जान को जोखिम में डालना है। ई-फार्मेसी द्वारा दी जा रही अत्यधिक छूट के कारण पारंपरिक लाइसेंसधारी केमिस्टों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। राजेन्द्र कॉलेज एलुमनाई एसोसिएशन की पहल: 1976 बैच के पूर्व छात्रों ने ताज़ा कीं सुनहरी यादें ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट का हवाला देते हुए पदाधिकारियों ने कहा कि नियमानुसार दवा का लाइसेंस एक विशिष्ट परिसर के लिए होता है, ऐसे में इंटरनेट पर इसका प्रदर्शन और बिक्री कानून की मूल भावना के सर्वथा विपरीत है। संघ ने चिंता जताई कि ऑनलाइन माध्यमों में मूल प्रिस्क्रिप्शन का भौतिक सत्यापन, रिकॉर्ड संधारण और स्टैंपिंग जैसी अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन नहीं हो रहा है। इससे नशीली और प्रतिबंधित दवाओं के दुरुपयोग तथा नकली दवाओं के प्रसार का खतरा अत्यधिक बढ़ गया है। केमिस्टों ने याद दिलाया कि कोविड-19 महामारी के दौर में उन्होंने 24 घंटे फ्रंटलाइन वॉरियर्स के रूप में जनता की सेवा की थी लेकिन आज वे असमान प्रतिस्पर्धा के कारण संकट में हैं। लोक गायिका मनीषा श्रीवास्तव को उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार उन्होंने स्पष्ट किया कि वे आधुनिक तकनीक के विरोधी नहीं हैं, लेकिन संवेदनशील दवाओं की बिक्री पूर्णतः विधिसम्मत होनी चाहिए। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इन मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो भविष्य में और भी व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
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सारण, 20 मई (हि.स.)। अखिल भारतीय औषधि विक्रेता संघ के आह्वान पर आयोजित एक दिवसीय बंदी का असर पूरे जिले में देखा गया। जिला औषधि विक्रेता संघ और बिहार केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के नेतृत्व में जिले भर की लगभग 2,500 दवा दुकानें पूरी तरह बंद रहीं, जिससे करोड़ों रुपये का दवा कारोबार प्रभावित हुआ।
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संघ के जिला अध्यक्ष अभिषेक कुमार और सचिव ज्ञानेश्वर प्रसाद जायसवाल ने संयुक्त रूप से बताया कि यह आंदोलन केवल व्यावसायिक हितों की रक्षा के लिए नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए है। उन्होंने सरकार के सामने अपनी प्रमुख मांगें रखते हुए दवाओं की अनियंत्रित और अनियमित ऑनलाइन बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की मांग की।
दवा विक्रेताओं का कहना है कि बिना किसी स्पष्ट कानूनी प्रावधान और सख्त रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के इंटरनेट पर दवाओं की बिक्री की अनुमति देना मरीजों की जान को जोखिम में डालना है। ई-फार्मेसी द्वारा दी जा रही अत्यधिक छूट के कारण पारंपरिक लाइसेंसधारी केमिस्टों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट का हवाला देते हुए पदाधिकारियों ने कहा कि नियमानुसार दवा का लाइसेंस एक विशिष्ट परिसर के लिए होता है, ऐसे में इंटरनेट पर इसका प्रदर्शन और बिक्री कानून की मूल भावना के सर्वथा विपरीत है। संघ ने चिंता जताई कि ऑनलाइन माध्यमों में मूल प्रिस्क्रिप्शन का भौतिक सत्यापन, रिकॉर्ड संधारण और स्टैंपिंग जैसी अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन नहीं हो रहा है। इससे नशीली और प्रतिबंधित दवाओं के दुरुपयोग तथा नकली दवाओं के प्रसार का खतरा अत्यधिक बढ़ गया है। केमिस्टों ने याद दिलाया कि कोविड-19 महामारी के दौर में उन्होंने 24 घंटे फ्रंटलाइन वॉरियर्स के रूप में जनता की सेवा की थी लेकिन आज वे असमान प्रतिस्पर्धा के कारण संकट में हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वे आधुनिक तकनीक के विरोधी नहीं हैं, लेकिन संवेदनशील दवाओं की बिक्री पूर्णतः विधिसम्मत होनी चाहिए। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इन मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो भविष्य में और भी व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
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