पटना, 18 फरवरी (हि.स.)। रामचंद्र प्रधान द्वारा सम्पादित स्व रामानंदन मिश्र ग्रंथावली” (पांच खंड) का लोकार्पण बुधवार देर शाम पटना के राजभवन में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद ख़ान ने किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि जो कौम अपनी तारीख भुला देती है, उसे इतिहास कभी याद नहीं रखता। राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने अपने सम्बोधन में कहा कि स्व रामानंदन मिश्र असाधारण प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने कहा कि पांच खंडों में सम्पादित यह पुस्तक हमारे लिए प्रेरणा स्रोत होगी। हमें इस पढ़कर अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए। उन्होंने बागवान कृष्ण का उल्लेख करते हुए कहा कि हर युग में असाधारण प्रतिभा के लोग पैदा होंगे जो मेरे ही अंश होंगे। मैं रामानंदन मिश्र जी को उन्हीं में से एक मानता हूं। आज का पंचांग | राशिफल | अधिक ज्येष्ठ कृष्णपक्ष दशमी इस मौके पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष राम बहादुर राय ने कहा कि साल 1952 के चुनाव में नेहरू जी ने पांच हजार रुपये पार्टी को खर्च करने के लिए दिया था। आज करोड़ों अरबों रुपये चुनाव में खर्च हो रहे हैं। स्व रामानंदन मिश्र ने यह चेतावनी दी थी कि चुनाव प्रक्रिया महंगी होगी लोकतंत्र खतरें में आयेगा। इस ग्रंथावली में इस बात का उल्लेख है। Chhapra: जयप्रकाश विश्वविद्यालय के कुलपति परमेंद्र कुमार बाजपेई पर अज्ञात असामाजिक तत्वों ने फेंका मोबिल, पुलिस जांच में जुटी राम बहादुर राय ने अपने सम्बोधन में कहा कि रामनंदन मिश्र पर लिखी गई यह पांचों ग्रंथावली पढ़ने योग्य है। इसमें से जो सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथावली है वह संस्मरण है। उन्होंने कहा कि क्रांति कैसे हो, किसान आंदोलन के दस्तावेज 1930-40 तक इस ग्रंथावली में उल्लेखनीय हैं। जो उस समय के खुफिया पुलिस के अधिकारी द्वारा लिखित है। बिहार में उद्योग लगाना हुआ आसान, 30 दिनों में उद्योग लगाने को मिलेगी स्वीकृतिः मुख्यमंत्री राम बहादुर राय ने कहा कि इस किताब में इस बात का उल्लेख है कि आध्यात्मिक बुनियाद पर कोई भी समाज परिवर्तन ला सकता है। उन्होंने कहा कि गाधी जी से जब जब स्व रामानंदन मिश्र मिले उनके बारे में उनकी श्रद्धा बढ़ती चली गई। उन्होंने कहा कि 1947 में जब एक बार जब रामानंदन मिश्र गांधी जी से मिलने गए तो उन्हें बताया गया कि सोशलिस्ट पार्टी के प्रमुख आपसे मिलना चाहते हैं। तब गांधी जी ने उनके लिए कहा कि यह तो मेरा रामानंदन है। स्व रामानंदन मिश्र की पांच खंडों में लिखी पुस्तक को रामचंद्र प्रधान द्वारा सम्पादित किया गया। जिसमें पहला खंड संस्मरण दूसरा नई दिशा की खोज, भक्ति और साधना, गांधीवादी परंपरा: कुछ विचार और श्री कालीपद गुहाराय का लोकार्पण राज्यपाल द्वारा किया गया।
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पटना, 18 फरवरी (हि.स.)। रामचंद्र प्रधान द्वारा सम्पादित स्व रामानंदन मिश्र ग्रंथावली” (पांच खंड) का लोकार्पण बुधवार देर शाम पटना के राजभवन में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद ख़ान ने किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि जो कौम अपनी तारीख भुला देती है, उसे इतिहास कभी याद नहीं रखता।
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राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने अपने सम्बोधन में कहा कि स्व रामानंदन मिश्र असाधारण प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने कहा कि पांच खंडों में सम्पादित यह पुस्तक हमारे लिए प्रेरणा स्रोत होगी। हमें इस पढ़कर अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए। उन्होंने बागवान कृष्ण का उल्लेख करते हुए कहा कि हर युग में असाधारण प्रतिभा के लोग पैदा होंगे जो मेरे ही अंश होंगे। मैं रामानंदन मिश्र जी को उन्हीं में से एक मानता हूं।
इस मौके पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष राम बहादुर राय ने कहा कि साल 1952 के चुनाव में नेहरू जी ने पांच हजार रुपये पार्टी को खर्च करने के लिए दिया था। आज करोड़ों अरबों रुपये चुनाव में खर्च हो रहे हैं। स्व रामानंदन मिश्र ने यह चेतावनी दी थी कि चुनाव प्रक्रिया महंगी होगी लोकतंत्र खतरें में आयेगा। इस ग्रंथावली में इस बात का उल्लेख है।
राम बहादुर राय ने अपने सम्बोधन में कहा कि रामनंदन मिश्र पर लिखी गई यह पांचों ग्रंथावली पढ़ने योग्य है। इसमें से जो सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथावली है वह संस्मरण है। उन्होंने कहा कि क्रांति कैसे हो, किसान आंदोलन के दस्तावेज 1930-40 तक इस ग्रंथावली में उल्लेखनीय हैं। जो उस समय के खुफिया पुलिस के अधिकारी द्वारा लिखित है।
राम बहादुर राय ने कहा कि इस किताब में इस बात का उल्लेख है कि आध्यात्मिक बुनियाद पर कोई भी समाज परिवर्तन ला सकता है। उन्होंने कहा कि गाधी जी से जब जब स्व रामानंदन मिश्र मिले उनके बारे में उनकी श्रद्धा बढ़ती चली गई। उन्होंने कहा कि 1947 में जब एक बार जब रामानंदन मिश्र गांधी जी से मिलने गए तो उन्हें बताया गया कि सोशलिस्ट पार्टी के प्रमुख आपसे मिलना चाहते हैं। तब गांधी जी ने उनके लिए कहा कि यह तो मेरा रामानंदन है।
स्व रामानंदन मिश्र की पांच खंडों में लिखी पुस्तक को रामचंद्र प्रधान द्वारा सम्पादित किया गया। जिसमें पहला खंड संस्मरण दूसरा नई दिशा की खोज, भक्ति और साधना, गांधीवादी परंपरा: कुछ विचार और श्री कालीपद गुहाराय का लोकार्पण राज्यपाल द्वारा किया गया।
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