नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बुधवार को संविधान दिवस समारोह में कहा कि तीन तलाक की कुप्रथा पर लगाम लगाने, जीएसटी लागू करने, अनुच्छेद 370 हटाने और नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसे कदमों ने देश में सामाजिक न्याय, आर्थिक एकीकरण और महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास को नई दिशा दी है। संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में आज आयोजित संविधान दिवस कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने संविधान का डिजिटल संस्करण नौ भाषाओं में जारी किया। इस दौरान उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, राज्यसभा उपसभापति हरिवंश, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, राज्यसभा में सदन के नेता जे.पी. नड्डा, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य सांसद उपस्थित थे। सभी ने मिलकर संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पाठ किया। मोदी सरकार के 12 वर्ष : योजनाओं का लाभ सीधे जनता तक पहुंचा : राम कृपाल यादव इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि संविधान उपनिवेशवादी मानसिकता छोड़कर राष्ट्रीय सोच अपनाने का मार्गदर्शक दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने नागरिकों के व्यक्तिगत और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा को सर्वोपरि माना। इसी के चलते आज महिलाएं, युवा, एससी, एसटी, किसान, मध्य वर्ग और नव-मध्य वर्ग लोकतंत्र को मजबूत बना रहे हैं। उन्होंने 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर लाने को देश की बड़ी उपलब्धि बताया। संकल्प मजबूत हो तो बंद आँखें भी दिखा सकती हैं विकास का मार्ग: राष्ट्रीय दृष्टिहीन संघ उल्लेखनीय है कि संविधान दिवस हर वर्ष 26 नवंबर को मनाया जाता है। इसी दिन 1949 में संविधान सभा ने इसी केंद्रीय कक्ष में भारत के संविधान को अंगीकृत किया था। तनिष्क छपरा में मैथली कलेक्शन का नया शुभारंभ, आकर्षक बैंगल और चैन की शानदार रेंज उपलब्ध
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नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बुधवार को संविधान दिवस समारोह में कहा कि तीन तलाक की कुप्रथा पर लगाम लगाने, जीएसटी लागू करने, अनुच्छेद 370 हटाने और नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसे कदमों ने देश में सामाजिक न्याय, आर्थिक एकीकरण और महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास को नई दिशा दी है।
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संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में आज आयोजित संविधान दिवस कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने संविधान का डिजिटल संस्करण नौ भाषाओं में जारी किया। इस दौरान उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, राज्यसभा उपसभापति हरिवंश, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, राज्यसभा में सदन के नेता जे.पी. नड्डा, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य सांसद उपस्थित थे। सभी ने मिलकर संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पाठ किया।
इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि संविधान उपनिवेशवादी मानसिकता छोड़कर राष्ट्रीय सोच अपनाने का मार्गदर्शक दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने नागरिकों के व्यक्तिगत और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा को सर्वोपरि माना। इसी के चलते आज महिलाएं, युवा, एससी, एसटी, किसान, मध्य वर्ग और नव-मध्य वर्ग लोकतंत्र को मजबूत बना रहे हैं। उन्होंने 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर लाने को देश की बड़ी उपलब्धि बताया।
उल्लेखनीय है कि संविधान दिवस हर वर्ष 26 नवंबर को मनाया जाता है। इसी दिन 1949 में संविधान सभा ने इसी केंद्रीय कक्ष में भारत के संविधान को अंगीकृत किया था।
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