पटना, 20 फ़रवरी (हि.स.)। बिहार विधानमंडल में बजट सत्र के 14 वें दिन शुक्रवार को विधान परिषद में अनुदानित माध्यमिक विद्यालयों, शिक्षकों के मकान किराया भत्ता (एचआरए) और जर्जर स्कूल भवनों का मामला उठा। विधान परिषद सदस्य मदन मोहन झा, प्रोफेसर संजय कुमार और नागेंद्र ने शिक्षकों को मकान किराया भत्ता (एचआरए) देने को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि यदि सरकार एचआरए देने के पक्ष में है, तो इसे कब तक लागू किया जाएगा। इस पर शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि सरकार सभी प्रकार की विसंगतियों को दूर करने के लिए प्रयासरत है और इसमें एचआरए से जुड़ा मामला भी शामिल है। Sri Lanka Test Series | भारतीय टीम घोषित, सारांश जैन को पहली बार मौका, रवींद्र जडेजा की वापसी उन्होंने कहा कि सरकार चरणबद्ध तरीके से इस को दूर करेगी। इस दौरान संजय कुमार ने आरोप लगाया कि एचआरए के नाम पर शिक्षकों का शोषण किया जा रहा है। विधान परिषद में एक अन्य अहम मुद्दा महेश्वर सिंह ने उठाया। उन्होंने बताया कि पूर्वी चंपारण जिले के कल्याणपुर प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय कोनहिया में कक्षा 1 से 8 तक के लिए कुल 9 कमरे हैं, जिनमें से 5 कमरे पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं। शेष चार कमरों में से एक में कार्यालय संचालित हो रहा है, जबकि दो-तीन कमरों में ही पढ़ाई कराई जा रही है। उन्होंने इस संबंध में सदन में फोटो भी प्रस्तुत किए। Commonwealth Games 2026 | अजय बाबू ने भारोत्तोलन में जीता रजत पदक इस पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि उन्होंने स्वयं वहां के जिलाधिकारी से फोटो मंगवाए हैं। सरकार सरकारी स्कूलों को लेकर संवेदनशील है और आवश्यकता के अनुसार नए भवनों का निर्माण कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि राज्य में 76 हजार से अधिक स्कूल हैं, इसलिए सभी की व्यवस्था दुरुस्त करने में कुछ समय लग रहा है, लेकिन सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है। डॉ संजीव कुमार सिंह ने वित्त अनुदानित माध्यमिक विद्यालयों से जुड़ा प्रश्न उठाते हुए कहा कि बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की नियमावली 2011 और संशोधित प्रारूप 2013 के बावजूद अनुदानित माध्यमिक विद्यालयों के पाठ्यक्रम में न तो कंप्यूटर शिक्षा शामिल है और न ही कंप्यूटर शिक्षक का पद सृजित किया गया है। उन्होंने बताया कि इस विषय पर विभागीय स्तर पर त्रि-सदस्यीय समिति का गठन हुआ था, लेकिन अब तक उसका प्रतिवेदन सामने नहीं आया है। इसके कारण इन विद्यालयों के अस्तित्व, कार्यकाल और नियुक्त शिक्षकों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने सरकार से पूछा कि जब तक नियमावली संशोधन की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, क्या विद्यालय कोड के निलंबन से मुक्त अवधि को बढ़ाया जाएगा। Commonwealth Games 2026 | सर्वेश कुशारे ने ऊंची कूद में जीता रजत, एथलेटिक्स में भारत का पहला पदक जवाब में शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि कुछ मामलों में जमीन से जुड़ी समस्याएं हैं, जिन्हें जल्द सुलझाया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि विधान परिषद में उठाए गए सभी सवालों पर सरकार संज्ञान ले रही है और स्कूलों के लिए एक समान स्टैंडर्ड व्यवस्था बनाने की दिशा में काम कर रही है। विद्यालय कोड के निलंबन मुक्ति के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि इस पर सरकार विचार करेगी।
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पटना, 20 फ़रवरी (हि.स.)। बिहार विधानमंडल में बजट सत्र के 14 वें दिन शुक्रवार को विधान परिषद में अनुदानित माध्यमिक विद्यालयों, शिक्षकों के मकान किराया भत्ता (एचआरए) और जर्जर स्कूल भवनों का मामला उठा।
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विधान परिषद सदस्य मदन मोहन झा, प्रोफेसर संजय कुमार और नागेंद्र ने शिक्षकों को मकान किराया भत्ता (एचआरए) देने को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि यदि सरकार एचआरए देने के पक्ष में है, तो इसे कब तक लागू किया जाएगा।
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इस पर शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि सरकार सभी प्रकार की विसंगतियों को दूर करने के लिए प्रयासरत है और इसमें एचआरए से जुड़ा मामला भी शामिल है।
उन्होंने कहा कि सरकार चरणबद्ध तरीके से इस को दूर करेगी। इस दौरान संजय कुमार ने आरोप लगाया कि एचआरए के नाम पर शिक्षकों का शोषण किया जा रहा है।
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विधान परिषद में एक अन्य अहम मुद्दा महेश्वर सिंह ने उठाया। उन्होंने बताया कि पूर्वी चंपारण जिले के कल्याणपुर प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय कोनहिया में कक्षा 1 से 8 तक के लिए कुल 9 कमरे हैं, जिनमें से 5 कमरे पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं। शेष चार कमरों में से एक में कार्यालय संचालित हो रहा है, जबकि दो-तीन कमरों में ही पढ़ाई कराई जा रही है। उन्होंने इस संबंध में सदन में फोटो भी प्रस्तुत किए।
इस पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि उन्होंने स्वयं वहां के जिलाधिकारी से फोटो मंगवाए हैं। सरकार सरकारी स्कूलों को लेकर संवेदनशील है और आवश्यकता के अनुसार नए भवनों का निर्माण कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि राज्य में 76 हजार से अधिक स्कूल हैं, इसलिए सभी की व्यवस्था दुरुस्त करने में कुछ समय लग रहा है, लेकिन सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है।
डॉ संजीव कुमार सिंह ने वित्त अनुदानित माध्यमिक विद्यालयों से जुड़ा प्रश्न उठाते हुए कहा कि बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की नियमावली 2011 और संशोधित प्रारूप 2013 के बावजूद अनुदानित माध्यमिक विद्यालयों के पाठ्यक्रम में न तो कंप्यूटर शिक्षा शामिल है और न ही कंप्यूटर शिक्षक का पद सृजित किया गया है। उन्होंने बताया कि इस विषय पर विभागीय स्तर पर त्रि-सदस्यीय समिति का गठन हुआ था, लेकिन अब तक उसका प्रतिवेदन सामने नहीं आया है। इसके कारण इन विद्यालयों के अस्तित्व, कार्यकाल और नियुक्त शिक्षकों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने सरकार से पूछा कि जब तक नियमावली संशोधन की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, क्या विद्यालय कोड के निलंबन से मुक्त अवधि को बढ़ाया जाएगा।
जवाब में शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि कुछ मामलों में जमीन से जुड़ी समस्याएं हैं, जिन्हें जल्द सुलझाया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि विधान परिषद में उठाए गए सभी सवालों पर सरकार संज्ञान ले रही है और स्कूलों के लिए एक समान स्टैंडर्ड व्यवस्था बनाने की दिशा में काम कर रही है। विद्यालय कोड के निलंबन मुक्ति के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि इस पर सरकार विचार करेगी।
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