पटना, 03 फरवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव की पुत्री रोहिणी आचार्य ने बिहार सरकार द्वारा पेश किए गए बजट पर कसा है। उन्होंने कहा कि बिहार में तथाकथित डबल-इंजन सरकार के नीति-निर्धारकों को शायद यह भान नहीं है कि विकास का पीटा जाने वाला झूठा ढिंढोरा भी अधिक समय तक नहीं बज सकता, यदि आम लोगों को उनके हक के रूप में बुनियादी सेवाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं, गैर-बराबरी की खाई कम नहीं हुई और श्रम-शक्ति का पलायन इसी तरह जारी रहा। आज का पंचांग | राशिफल | अधिक ज्येष्ठ कृष्णपक्ष दशमी रोहिणी आचार्य ने कहा कि आंकड़ों की बाजीगरी से भरा बजट पेश कर अपनी पीठ थपथपाने से पहले नीतीश सरकार को यह स्वीकार करना चाहिए कि केवल आर्थिक वृद्धि ही विकास का पैमाना नहीं हो सकती। Chhapra: जयप्रकाश विश्वविद्यालय के कुलपति परमेंद्र कुमार बाजपेई पर अज्ञात असामाजिक तत्वों ने फेंका मोबिल, पुलिस जांच में जुटी उन्होंने कहा कि बिहार की सबसे बड़ी जरूरत ऐसी आर्थिक नीति और अर्थव्यवस्था है, जिसमें आर्थिक विकास के साथ-साथ मानव विकास और मानव खुशहाली के सूचकों का भी सतत और गंभीर मूल्यांकन किया जाए। बिहार में उद्योग लगाना हुआ आसान, 30 दिनों में उद्योग लगाने को मिलेगी स्वीकृतिः मुख्यमंत्री उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि मंगलवार को प्रस्तुत किया गया बजट शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक समानता जैसे बुनियादी मुद्दों पर पूरी तरह मौन है। रोहिणी आचार्य के अनुसार, जब तक इन क्षेत्रों में ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाए जाते, तब तक सरकार के विकास के दावे जमीनी हकीकत में टिक नहीं पाएंगे।
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पटना, 03 फरवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव की पुत्री रोहिणी आचार्य ने बिहार सरकार द्वारा पेश किए गए बजट पर कसा है।
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उन्होंने कहा कि बिहार में तथाकथित डबल-इंजन सरकार के नीति-निर्धारकों को शायद यह भान नहीं है कि विकास का पीटा जाने वाला झूठा ढिंढोरा भी अधिक समय तक नहीं बज सकता, यदि आम लोगों को उनके हक के रूप में बुनियादी सेवाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं, गैर-बराबरी की खाई कम नहीं हुई और श्रम-शक्ति का पलायन इसी तरह जारी रहा।
रोहिणी आचार्य ने कहा कि आंकड़ों की बाजीगरी से भरा बजट पेश कर अपनी पीठ थपथपाने से पहले नीतीश सरकार को यह स्वीकार करना चाहिए कि केवल आर्थिक वृद्धि ही विकास का पैमाना नहीं हो सकती।
उन्होंने कहा कि बिहार की सबसे बड़ी जरूरत ऐसी आर्थिक नीति और अर्थव्यवस्था है, जिसमें आर्थिक विकास के साथ-साथ मानव विकास और मानव खुशहाली के सूचकों का भी सतत और गंभीर मूल्यांकन किया जाए।
उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि मंगलवार को प्रस्तुत किया गया बजट शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक समानता जैसे बुनियादी मुद्दों पर पूरी तरह मौन है। रोहिणी आचार्य के अनुसार, जब तक इन क्षेत्रों में ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाए जाते, तब तक सरकार के विकास के दावे जमीनी हकीकत में टिक नहीं पाएंगे।
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