प्रयागराज, 07 मार्च (हि.स.)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने थाना मुसाफिर खाना, सुल्तानपुर में 48 साल पहले पूर्व सैनिक के हत्या आरोपित गुरू प्रसाद की उम्रकैद की सजा रद्द कर दी है। सत्र अदालत ने हत्या में शामिल होने का दोषी मान सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने कहा अभियोजन अपीलार्थी के विरुद्ध आरोप साबित करने में नाकाम रहा। उसके हाथ में लाठी थी, हत्या सह अभियुक्त की बंदूक की गोली से हुई थी। जिसमें इसकी भूमिका नहीं थी। कोर्ट ने 18 मार्च 81 को सत्र अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा रद्द कर दी और जमानत बंधपत्र निरस्त कर दिया। वैभव सूर्यवंशी बने भारतीय टीम के लिए चुने जाने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी यह फैसला न्यायमूर्ति सी डी सिंह तथा न्यायमूर्ति देवेन्द्र सिंह की खंडपीठ ने राम हृदय, शिवराम व गुरू प्रसाद की अपीलों की सुनवाई करते हुए दिया। दो आरोपितों की मौत होने से अपील अवेट हो चुकी थी। मुख्य न्यायाधीश के आदेश पर लखनऊ खंडपीठ से अपील इलाहाबाद हाईकोर्ट प्रधान पीठ निस्तारण के लिए नामित की गई थी। आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 शृंखला के लिए भारतीय टीम घोषित, श्रेयस अय्यर बने कप्तान मालूम हो कि भगवती सेवक पांच भाई हैं। उन्होंने अपने भाई पर जानलेवा हमला करने की एफआईआर दर्ज कराई। आरोप लगाया कि वह भाइयों के साथ बैठा था, पट्टीदार आरोपित व अन्य ने असलहे व लाठी लेकर घेर लिया। मुख्य आरोपित ने फायर कर दिया। जिसमें त्रिभुवन दत्त को गोली लगी। यह दुश्मनी के कारण हुआ। घटना 1978 की है। अंडर-18 एशिया कप : जापान को 4-1 से हराकर भारतीय पुरुष हॉकी टीम बनी चैंपियन घायल को अस्पताल ले जाया गया। बाद में लखनऊ मिलिट्री अस्पताल भेजा गया। इलाज के दौरान मौत हो गई। डाक्टरी रिपोर्ट में मौत का कारण सेप्टीसीमिया बताया गया। मृतक की आयु 35 साल की थी। पुलिस ने चार्जशीट दी। सत्र अदालत ने सजा सुनाई थी। जिसे अपील में चुनौती दी गई थी।
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प्रयागराज, 07 मार्च (हि.स.)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने थाना मुसाफिर खाना, सुल्तानपुर में 48 साल पहले पूर्व सैनिक के हत्या आरोपित गुरू प्रसाद की उम्रकैद की सजा रद्द कर दी है। सत्र अदालत ने हत्या में शामिल होने का दोषी मान सजा सुनाई थी।
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हाईकोर्ट ने कहा अभियोजन अपीलार्थी के विरुद्ध आरोप साबित करने में नाकाम रहा। उसके हाथ में लाठी थी, हत्या सह अभियुक्त की बंदूक की गोली से हुई थी। जिसमें इसकी भूमिका नहीं थी। कोर्ट ने 18 मार्च 81 को सत्र अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा रद्द कर दी और जमानत बंधपत्र निरस्त कर दिया।
यह फैसला न्यायमूर्ति सी डी सिंह तथा न्यायमूर्ति देवेन्द्र सिंह की खंडपीठ ने राम हृदय, शिवराम व गुरू प्रसाद की अपीलों की सुनवाई करते हुए दिया। दो आरोपितों की मौत होने से अपील अवेट हो चुकी थी। मुख्य न्यायाधीश के आदेश पर लखनऊ खंडपीठ से अपील इलाहाबाद हाईकोर्ट प्रधान पीठ निस्तारण के लिए नामित की गई थी।
मालूम हो कि भगवती सेवक पांच भाई हैं। उन्होंने अपने भाई पर जानलेवा हमला करने की एफआईआर दर्ज कराई। आरोप लगाया कि वह भाइयों के साथ बैठा था, पट्टीदार आरोपित व अन्य ने असलहे व लाठी लेकर घेर लिया। मुख्य आरोपित ने फायर कर दिया। जिसमें त्रिभुवन दत्त को गोली लगी। यह दुश्मनी के कारण हुआ। घटना 1978 की है।
घायल को अस्पताल ले जाया गया। बाद में लखनऊ मिलिट्री अस्पताल भेजा गया। इलाज के दौरान मौत हो गई। डाक्टरी रिपोर्ट में मौत का कारण सेप्टीसीमिया बताया गया। मृतक की आयु 35 साल की थी। पुलिस ने चार्जशीट दी। सत्र अदालत ने सजा सुनाई थी। जिसे अपील में चुनौती दी गई थी।
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