नई दिल्ली, 18 फरवरी (हि.स.)। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में ‘रोबोटिक डॉग’ विवाद में फंसने के बाद गलगोटिया विश्वविद्यालय ने पूरे मामले से पल्ला झाड़ते हुए अपने प्रतिनिधि पर सारा ठीकरा फोड़ दिया है। विश्वविद्यालय ने पारदर्शिता के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए इस घटना के लिए माफी भी मांगी है। साथ ही कहा कि आयोजकों की भावनाओं का आदर करते हुए हमने भारत मंडपम में मिला स्थान भी खाली कर दिया है। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. एनके गौर ने बुधवार को एक बयान में कहा कि एक संस्थान के तौर पर गलत दावा करना हमारी कोई मंशा नहीं थी। हम पूरी तरह से शैक्षणिक पारदर्शिता और जिम्मेदारी से अपने काम का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की एक प्रतिनिधि ने पवेलियन में गलत जानकारी थी। उसे प्रोडक्ट के तकनीकी उद्भव की जानकारी नहीं थी। अति उत्साह में उसने कैमरे के समक्ष इस तरह के दावे कर दिए जो की तथ्यात्मक रूप से गलत थे। हालांकि वे मीडिया से बातचीत करने के लिए विश्विद्यालय की ओर से अधिकृत नहीं थीं। आज का पंचांग | अधिक ज्येष्ठ कृष्णपक्ष त्रयोदशी दरअसल, एक ‘रोबोटिक डॉग’ को अपना बताकर विश्विद्यालय की प्रतिनिधि ने मीडिया से बातचीत की थी। हालांकि बाद में यह सामने आया था कि वह ‘रोबोटिक डॉग’ असल में चीनी कंपनी का है। इसके बाद विवाद काफी बढ़ गया यहां तक की कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इसको लेकर सरकार पर निशाना साधा। ‘धमाल 4’ का ट्रेलर रिलीज, फिर कॉमेडी का धमाल मचाएगी अजय देवगन की पलटन उल्लेखनीय है कि विवाद तब शुरू हुआ जब विश्वविद्यालय में संचार की एक प्राध्यापक ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत में ओरियन नामक एक ‘रोबोटिक डॉग’ को दिखाते हुए कहा था कि इसे गलगोटिया विश्वविद्यालय के सेंटर ऑफ एक्सिलेंस ने विकसित किया है। Facebook और Instagram हुआ डाउन, परेशान रहे यूजर्स
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नई दिल्ली, 18 फरवरी (हि.स.)। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में ‘रोबोटिक डॉग’ विवाद में फंसने के बाद गलगोटिया विश्वविद्यालय ने पूरे मामले से पल्ला झाड़ते हुए अपने प्रतिनिधि पर सारा ठीकरा फोड़ दिया है। विश्वविद्यालय ने पारदर्शिता के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए इस घटना के लिए माफी भी मांगी है। साथ ही कहा कि आयोजकों की भावनाओं का आदर करते हुए हमने भारत मंडपम में मिला स्थान भी खाली कर दिया है।
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विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. एनके गौर ने बुधवार को एक बयान में कहा कि एक संस्थान के तौर पर गलत दावा करना हमारी कोई मंशा नहीं थी। हम पूरी तरह से शैक्षणिक पारदर्शिता और जिम्मेदारी से अपने काम का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की एक प्रतिनिधि ने पवेलियन में गलत जानकारी थी। उसे प्रोडक्ट के तकनीकी उद्भव की जानकारी नहीं थी। अति उत्साह में उसने कैमरे के समक्ष इस तरह के दावे कर दिए जो की तथ्यात्मक रूप से गलत थे। हालांकि वे मीडिया से बातचीत करने के लिए विश्विद्यालय की ओर से अधिकृत नहीं थीं।
दरअसल, एक ‘रोबोटिक डॉग’ को अपना बताकर विश्विद्यालय की प्रतिनिधि ने मीडिया से बातचीत की थी। हालांकि बाद में यह सामने आया था कि वह ‘रोबोटिक डॉग’ असल में चीनी कंपनी का है। इसके बाद विवाद काफी बढ़ गया यहां तक की कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इसको लेकर सरकार पर निशाना साधा।
उल्लेखनीय है कि विवाद तब शुरू हुआ जब विश्वविद्यालय में संचार की एक प्राध्यापक ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत में ओरियन नामक एक ‘रोबोटिक डॉग’ को दिखाते हुए कहा था कि इसे गलगोटिया विश्वविद्यालय के सेंटर ऑफ एक्सिलेंस ने विकसित किया है।
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