शारदीय नवरात्रि को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। आश्विन माह के शुक्लपक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवरात्रि की शुरुआत होती है। श्रद्धालु नव दिन तक बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। इन नौ दिन में देवी भगवती के नौ रूप की आराधना होती है। पूजा श्रद्धा तथा भक्ति के साथ किया जाता है।
शारदीय नवरात्रि एक त्योहार ही नहीं बल्कि उर्जा, शक्ति विश्वास, आस्था तथा पवित्रता का प्रतिक है। नवरात्रि में सच्चे भाव से मां भगवती के पूजन करने से व्यक्ति में उर्जा का संचार होता है तथा घर में शुद्धता बढ़ती है तथा नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं।
शारदीय नवरात्रि का आरंभ
शारदीय नवरात्रि का आरम्भ 11 अक्तूबर 2026 दिन रविवार से होगा। नवरात्रि की समाप्ति 19 अक्तूबर 2026 दिन सोमवार को होगी। इस दौरान मां भगवती के नौ रूपों का श्रद्धा तथा भक्ति के साथ पूजन किया जायेगा।
कलश स्थापना का मुहूर्त
शारदीय नवरात्रि में कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त :
- प्रतिपदा तिथि का आरम्भ 10 अक्तूबर 2026 दिन शनिवार समय 08:32 रात्रि
- प्रतिपदा तिथि की समाप्ति 11 अक्तूबर 2026 दिन रविवार समय 08:37 मिनट
- चित्रा नक्षत्र का आरम्भ 10 अक्तूबर 2026 दिन शनिवार समय 10 :32 रात्रि
- चित्रा नक्षत्र का समाप्ति 11 अक्तूबर 2026 दिन रविवार समय 10:49 रात्रि
अभिजित मुहूर्त : सुबह 11:36 से 12:24 दोपहर
नवरात्रि के आरम्भ के दिन कलश स्थापना चित्रा तथा वैधृति योग त्याज्य है, इसलिए कलश स्थापना अभिजित मुहूर्त में करना शुभ होगा।
देवी का आगमन
मां भगवती का आगमन इस बार घोड़ा पर हो रहा है। जब भगवती घोड़ा पर सवार होकर पृथ्वी पर आती है तब संसार में त्राहिमान की स्थिति बन जाती है। अंतर्राष्ट्रीय संपर्क में कमी तथा विवाद में वृद्धि होती है। वर्षा की कमी के कारण फसल में कमी होगा। प्राकृतिक आपदा में वृद्धि होती है।
ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा
ज्योतिष वास्तु एवं रत्न विशेषज्ञ
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