Chhapra: मानवता के सर्वांगीण विकास, आत्म-जागरण, नैतिक मूल्यों के पुनरुत्थान और आध्यात्मिक चेतना के प्रसार के उद्देश्य से विहंगम योग संत समाज, सारण के तत्वावधान में 15 सितंबर को छपरा में भव्य विहंगम योग सत्संग समारोह एवं स्वर्वेद संदेश यात्रा का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन विवेकानंद इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल परिसर, वीआईपी गोलंबर, मुकरेड़ा, छपरा-सिवान मुख्य मार्ग में होगा।
यह आयोजन ‘कन्याकुमारी से कश्मीर स्वर्वेद संदेश यात्रा’ के क्रम में सारण की धरती पर किया जा रहा है। यात्रा के माध्यम से ‘आत्म-जागरण से राष्ट्र-जागरण’ का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
संत प्रवर विज्ञानदेव जी महाराज की रहेगी उपस्थिति
समारोह में सद्गुरु उत्तराधिकारी पूज्य संत प्रवर श्री विज्ञानदेव जी महाराज की विशेष पावन उपस्थिति रहेगी। वे अपनी आध्यात्मिक एवं प्रेरणादायी वाणी से श्रद्धालुओं को संबोधित करेंगे तथा आशीर्वचन प्रदान करेंगे।
आयोजकों के अनुसार यह कार्यक्रम केवल सत्संग तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्म-जागरण, आंतरिक शांति, नैतिक चेतना और सकारात्मक जीवन-दृष्टि के माध्यम से सामाजिक एवं राष्ट्रीय जागरण का आध्यात्मिक अभियान है।
स्वर्वेद के संदेश से जीवन को सार्थक बनाने का प्रयास
कार्यक्रम में स्वर्वेद के व्यावहारिक आध्यात्मिक संदेशों के माध्यम से मानव जीवन को अधिक शांतिपूर्ण, सार्थक और मंगलमय बनाने की प्रेरणा दी जाएगी। नियमित योग एवं ध्यान साधना से मन की एकाग्रता, मानसिक तनाव और चिंता में कमी, आंतरिक शांति एवं स्थिरता तथा सकारात्मक ऊर्जा के संचार जैसे लाभों की जानकारी भी दी जाएगी।
1924 में हुई थी विहंगम योग की स्थापना
आयोजकों के अनुसार विहंगम योग की स्थापना वर्ष 1924 में अनंत श्री सद्गुरु सदाफलदेव जी महाराज द्वारा की गई थी। विहंगम योग साधना-पद्धति को मानव जीवन के चार पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति का सहज एवं व्यावहारिक मार्ग बताया गया है।
साधना के माध्यम से स्वस्थ तन, निर्मल मन, आत्म-साक्षात्कार और आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया जाता है।
15 सितंबर को होने वाला यह आयोजन सारणवासियों के लिए संत-सान्निध्य, सत्संग, ध्यान-साधना और आध्यात्मिक ज्ञान का विशेष अवसर होगा। विहंगम योग संत समाज, सारण ने धर्मप्रेमी जनता, आध्यात्मिक जिज्ञासुओं और प्रबुद्ध नागरिकों से सपरिवार समारोह में शामिल होकर संत प्रवर श्री विज्ञानदेव जी महाराज की वाणी एवं आशीर्वचन का लाभ लेने की अपील की है।



















