Breaking News

खुदीराम बोस के शहादत दिवस पर मुजफ्फरपुर में श्रद्धांजलि सभा, शहीद स्थल पर उमड़ा जनसैलाब

4 Min Read
खबर सुनें
▶ Press play to listen

KHUDIRAM-BOSE-SHAHADAT-DIWAS-MUZAFFARPUR

SHAILFORD
विज्ञापन

खुदीराम बोस के शहादत दिवस पर मुजफ्फरपुर में श्रद्धांजलि सभा, शहीद स्थल पर उमड़ा जनसैलाब

VIPS
विज्ञापन

मुजफ्फरपुर, 11 अगस्त (हि.स.)। महान स्वतंत्रता सेनानी और अमर शहीद खुदीराम बोस के शहादत दिवस पर मंगलवार को मुजफ्फरपुर में भावपूर्ण श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। हर वर्ष की परंपरा के अनुसार सुबह करीब 4:30 बजे प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों के साथ देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे लोगों ने शहीद खुदीराम बोस को नम आंखों से श्रद्धांजलि अर्पित की।

DOON
विज्ञापन

इस अवसर पर तिरहुत प्रमंडल के आयुक्त, तिरहुत क्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक, मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी, वरीय पुलिस अधीक्षक, अपर समाहर्ता (राजस्व), पूर्वी मुजफ्फरपुर के अनुमंडल पदाधिकारी, काराधीक्षक, उपाधीक्षक सहित जेल के अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

Tanishq Chhapra
विज्ञापन

कार्यक्रम में जिले के कई अन्य वरीय अधिकारियों के अलावा पश्चिम बंगाल से पहुंचे शहीद खुदीराम बोस के परिजनों ने भी हिस्सा लिया। सभी ने केंद्रीय कारा परिसर स्थित उन स्थानों पर जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की, जो शहीद के जीवन और बलिदान से जुड़े हैं। इस दौरान उस सेल प्रकोष्ठ, जहां खुदीराम बोस को कैद रखा गया था, फांसी स्थल, उनकी आखिरी रात वाले सेल तथा कारा परिसर में स्थापित उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया गया।

SOLANKI SCHOOL
विज्ञापन

किंग्सफोर्ड कांड ने दिलाई क्रांतिकारी पहचान

खुदीराम बोस का जन्म बंगाल के मिदनापुर जिले में हुआ था। वर्ष 1905 में बंगाल विभाजन के बाद देशभर में राष्ट्रवादी आंदोलन तेज हुआ। इसी दौर में खुदीराम बोस भी क्रांतिकारी गतिविधियों से जुड़ गए। कम उम्र में ही उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष का रास्ता अपना लिया। इसी दौरान ब्रिटिश न्यायाधीश डगलस किंग्सफोर्ड, जो बंगाल में भारतीयों के खिलाफ कठोर फैसलों के लिए चर्चित थे, का स्थानांतरण मुजफ्फरपुर के जिला जज के रूप में किया गया। क्रांतिकारियों ने किंग्सफोर्ड को निशाना बनाने की योजना बनाई।

इसी क्रम में 30 अप्रैल 1908 की रात खुदीराम बोस और उनके साथी प्रफुल्ल चाकी ने किंग्सफोर्ड की बग्गी समझकर एक बग्गी पर बम फेंका। हालांकि, किंग्सफोर्ड उस बग्गी में सवार नहीं थे। इस हमले में बग्गी में सवार दो यूरोपीय महिलाओं की मौत हो गई। घटना के बाद ब्रिटिश पुलिस ने खुदीराम बोस की तलाश तेज कर दी। उन्हें 1 मई 1908 को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि उनके साथी प्रफुल्ल चाकी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए आत्महत्या कर ली।

18 वर्ष की उम्र में दी सर्वोच्च शहादत

गिरफ्तारी के बाद खुदीराम बोस को मुजफ्फरपुर केंद्रीय कारा में रखा गया। उनके खिलाफ मुकदमा चलाया गया और ब्रिटिश शासन ने उन्हें फांसी की सजा सुनाई। करीब तीन महीने तक जेल में रहने के बाद 11 अगस्त 1908 को उन्हें फांसी दे दी गई। कहा जाता है कि महज 18 वर्ष की उम्र में खुदीराम बोस पूरे आत्मविश्वास और निर्भीकता के साथ फांसी के फंदे तक पहुंचे। उनकी शहादत ने देश के स्वतंत्रता आंदोलन में नई ऊर्जा पैदा की और वे युवाओं के लिए साहस, त्याग और देशभक्ति के प्रतीक बन गए।

मुजफ्फरपुर में आयोजित आज की श्रद्धांजलि सभा में उनकी प्रतिमा और शहादत से जुड़े स्थलों पर पुष्प अर्पित कर लोगों ने उनके बलिदान को याद किया। कार्यक्रम के दौरान शहीद खुदीराम बोस के देश के लिए दिए गए योगदान और उनके अदम्य साहस को नमन किया गया। शहीद खुदीराम बोस की शहादत आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

हमारे सोशल मीडिया अकाउंट को फॉलो करें -

bhawani tiles
विज्ञापन
Share This Article
Follow:
chhapratoday.com सारण जिले से संचालित सबसे पहली और लोकप्रिय न्यूज़ वेबसाइट है। वर्ष 2012 से यह अपने पाठकों/दर्शकों तक हर दिन सबसे पहले छपरा, सारण से लेकर देश, विदेश के ब्रेकिंग न्यूज़, लोकल घटनाएं, रेलवे टाइमिंग अपडेट, सरकारी योजनाएं, स्कूल-कॉलेज जानकारी, ट्रेंडिंग वीडियो, संस्कृति, त्यौहार और शहर के विकास से जुड़े हर अपडेट करती आ रही है। हर खबर, सबसे पहले, सबसे सटीक और विश्वसनीयता के साथ केवल chhapratoday.com पर पढ़ें।भौगोलिक संदर्भ
ब्रेकिंग न्यूज़ अलर्ट छपरा की हर बड़ी खबर सबसे पहले पाएं
WhatsApp जॉइन करें जॉइन करें