पटना, 10 जून (हि.स.)। बिहार के चर्चित रिशु रंजन सिन्हा उर्फ रिशु श्री टेंडर घोटाला मामले में विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) ने बुधवार को तीन अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों से हिरासत में लेकर लंबी पूछताछ की गई और फिर उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार अधिकारियों में वित्त विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत मुमुक्षु चौधरी, बर्खास्तगी के बाद संविदा पर बहाल किए गए मुख्य अभियंता तारिणी दास तथा नगर विकास एवं आवास विभाग में कार्यपालक अभियंता के पद पर तैनात उमेश कुमार सिंह शामिल हैं। तीनों अधिकारियों को पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया गया है। हालांकि एसवीयू की ओर से अभी तक गिरफ्तारी के विस्तृत आधार और आगे की कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इस मामले में एक अन्य प्रमुख आरोपित आईएएस अधिकारी संजीव हंस का फिलहाल पता नहीं चल सका है। जांच एजेंसियां उनकी भूमिका और वर्तमान स्थिति को लेकर सार्वजनिक रूप से कुछ भी कहने से बच रही हैं। हालांकि जांच की दिशा को देखते हुए माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। रिविलगंज: चोरी की बाइक, अवैध हथियार व कारतूस बरामद, दो गिरफ्तार आधिारिक सूत्रों के अनुसार, रिशु श्री से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं, टेंडर प्रक्रियाओं और प्रभावशाली अधिकारियों के साथ संबंधों की जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। विशेष रूप से तारिणी दास की गिरफ्तारी ने राज्य के विभिन्न विभागों से जुड़ी कई पुरानी फाइलों, परियोजनाओं और प्रशासनिक निर्णयों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। गौरतलब है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पिछले वर्ष इन तीनों अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। उस दौरान जांच एजेंसी ने विभिन्न स्थानों से 11.50 करोड़ रुपये से अधिक की राशि बरामद करने का दावा किया था। ईडी की कार्रवाई के बाद ही इस मामले ने व्यापक राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा का रूप ले लिया था। राजेन्द्र कॉलेज एलुमनाई एसोसिएशन की पहल: 1976 बैच के पूर्व छात्रों ने ताज़ा कीं सुनहरी यादें इससे पहले एसवीयू इस मामले में टेंडर घोटाले के मुख्य आरोपित रिशु श्री और उसके करीबी सहयोगी संतोष कुमार को पटना से गिरफ्तार कर चुकी है। जांच के दौरान कई अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के दायरे में आई थी। रिशु श्री से कथित संबंधों और मामले में नाम सामने आने के बाद राज्य सरकार पहले ही दो आईएएस अधिकारियों को निलंबित कर चुकी है। इसके अलावा कई अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है। कुछ अधिकारियों पर निलंबन की कार्रवाई हो चुकी है, जबकि कई मामलों की जांच अभी जारी है। लोक गायिका मनीषा श्रीवास्तव को उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला केवल वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें प्रशासनिक स्तर पर प्रभाव, टेंडर प्रक्रियाओं में कथित हेरफेर और अधिकारियों-ठेकेदारों के नेटवर्क की भी जांच की जा रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां या नई कार्रवाई होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है। फिलहाल एसवीयू गिरफ्तार अधिकारियों से पूछताछ कर रही है और मामले से जुड़े दस्तावेजों तथा वित्तीय लेन-देन की जांच जारी है। इस कार्रवाई के बाद बिहार के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है तथा सभी की निगाहें जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
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पटना, 10 जून (हि.स.)। बिहार के चर्चित रिशु रंजन सिन्हा उर्फ रिशु श्री टेंडर घोटाला मामले में विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) ने बुधवार को तीन अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों से हिरासत में लेकर लंबी पूछताछ की गई और फिर उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया।
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गिरफ्तार अधिकारियों में वित्त विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत मुमुक्षु चौधरी, बर्खास्तगी के बाद संविदा पर बहाल किए गए मुख्य अभियंता तारिणी दास तथा नगर विकास एवं आवास विभाग में कार्यपालक अभियंता के पद पर तैनात उमेश कुमार सिंह शामिल हैं। तीनों अधिकारियों को पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया गया है। हालांकि एसवीयू की ओर से अभी तक गिरफ्तारी के विस्तृत आधार और आगे की कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
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इस मामले में एक अन्य प्रमुख आरोपित आईएएस अधिकारी संजीव हंस का फिलहाल पता नहीं चल सका है। जांच एजेंसियां उनकी भूमिका और वर्तमान स्थिति को लेकर सार्वजनिक रूप से कुछ भी कहने से बच रही हैं। हालांकि जांच की दिशा को देखते हुए माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
आधिारिक सूत्रों के अनुसार, रिशु श्री से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं, टेंडर प्रक्रियाओं और प्रभावशाली अधिकारियों के साथ संबंधों की जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। विशेष रूप से तारिणी दास की गिरफ्तारी ने राज्य के विभिन्न विभागों से जुड़ी कई पुरानी फाइलों, परियोजनाओं और प्रशासनिक निर्णयों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
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गौरतलब है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पिछले वर्ष इन तीनों अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। उस दौरान जांच एजेंसी ने विभिन्न स्थानों से 11.50 करोड़ रुपये से अधिक की राशि बरामद करने का दावा किया था। ईडी की कार्रवाई के बाद ही इस मामले ने व्यापक राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा का रूप ले लिया था।
इससे पहले एसवीयू इस मामले में टेंडर घोटाले के मुख्य आरोपित रिशु श्री और उसके करीबी सहयोगी संतोष कुमार को पटना से गिरफ्तार कर चुकी है। जांच के दौरान कई अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के दायरे में आई थी।
रिशु श्री से कथित संबंधों और मामले में नाम सामने आने के बाद राज्य सरकार पहले ही दो आईएएस अधिकारियों को निलंबित कर चुकी है। इसके अलावा कई अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है। कुछ अधिकारियों पर निलंबन की कार्रवाई हो चुकी है, जबकि कई मामलों की जांच अभी जारी है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला केवल वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें प्रशासनिक स्तर पर प्रभाव, टेंडर प्रक्रियाओं में कथित हेरफेर और अधिकारियों-ठेकेदारों के नेटवर्क की भी जांच की जा रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां या नई कार्रवाई होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।
फिलहाल एसवीयू गिरफ्तार अधिकारियों से पूछताछ कर रही है और मामले से जुड़े दस्तावेजों तथा वित्तीय लेन-देन की जांच जारी है। इस कार्रवाई के बाद बिहार के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है तथा सभी की निगाहें जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
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