Chhapra: लोक महाविद्यालय हाफिजपुर, सारण के शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों ने शुक्रवार को अपनी लंबित वेतन समस्या को लेकर जय प्रकाश विश्वविद्यालय मुख्यालय में रोषपूर्ण धरना दिया। प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कथित अदूरदर्शी नीति और मनमानी को वेतन भुगतान बाधित होने का मुख्य कारण बताया। धरना दे रहे शिक्षकों और कर्मचारियों का कहना था कि विगत तीन वर्षों से उन्हें वेतन नहीं मिला है, जिससे उनके समक्ष गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार महाविद्यालय के बैंक खाते में लगभग तीन करोड़ रुपये आंतरिक स्रोत से तथा करीब तीन करोड़ रुपये इंटर अनुदान मद में जमा हैं, जबकि डेढ़ करोड़ रुपये डिग्री अनुदान के रूप में विश्वविद्यालय में लंबित हैं। इसके बावजूद कार्यरत कर्मियों को भुगतान नहीं किया जा रहा है। वैभव सूर्यवंशी बने भारतीय टीम के लिए चुने जाने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी शिक्षकों ने बताया कि जून 2023 में विश्वविद्यालय ने एक पत्र जारी कर महाविद्यालय के खाते से किसी भी प्रकार के व्यय पर रोक लगाते हुए विश्वविद्यालय की अनुमति आवश्यक कर दी थी। आरोप लगाया गया कि कॉलेज प्रबंधन ने बिना अनुमति अन्य व्यय तो किए, लेकिन कर्मियों के वेतन भुगतान के लिए कोई पहल नहीं की। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन भी पूरे मामले में मूकदर्शक बना रहा। आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 शृंखला के लिए भारतीय टीम घोषित, श्रेयस अय्यर बने कप्तान धरनार्थियों ने कहा कि वे लगातार आवेदन और अनुरोध करते रहे, लेकिन उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अगस्त 2024 में विश्वविद्यालय द्वारा प्रो. कृष्ण कुमार को विश्वविद्यालय प्रतिनिधि एवं तदर्थ समिति का सचिव बनाया गया था, लेकिन उनके स्तर पर भी कोई समाधान नहीं निकला। बाद में फरवरी 2026 में उन्हें शासी निकाय का सचिव बनाया गया, किंतु उन्होंने त्यागपत्र दे दिया। इसके बाद मार्च 2026 में प्रो. अजय कुमार आचार्य को शासी निकाय सचिव नियुक्त किया गया, लेकिन उन्होंने भी असमर्थता जताते हुए दायित्व स्वीकार करने से इनकार कर दिया। अंडर-18 एशिया कप : जापान को 4-1 से हराकर भारतीय पुरुष हॉकी टीम बनी चैंपियन प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जिस महाविद्यालय के पास करोड़ों रुपये जमा हों और सरकार के पास वर्षों से अनुदान लंबित हो, वहां के शिक्षक एवं कर्मचारी भूखमरी की स्थिति में पहुंच जाएं, यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से अविलंब वेतन भुगतान सुनिश्चित करने तथा लंबित अनुदान जारी कराने की मांग की। धरना में प्रो. तारकेश्वर सिंह, प्रो. उपेंद्र पांडेय, प्रो. कवींद्र ओझा, प्रो. अरविंद पांडेय, प्रो. अखिलेश कुमार, प्रो. मनोज कुमार, प्रो. महेंद्र मिश्रा, प्रो. सुभाष सिंह, प्रो. दशरथ प्रसाद, प्रो. के.के. राय, प्रो. रामबाबू प्रसाद, प्रो. उदय कुमार सिंह, प्रो. सुरेंद्र तिवारी, प्रो. दिनेश सिंह, प्रो. नवीन कुमार, प्रो. देवेश चंद्र राय, प्रो. काशी नाथ राय, प्रो. जयवीर ओझा, प्रो. खुर्शीद आलम, दिलीप कुमार ओझा, जगदीश राय, मिथलेश सिंह सहित 50 से अधिक शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
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Chhapra: लोक महाविद्यालय हाफिजपुर, सारण के शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों ने शुक्रवार को अपनी लंबित वेतन समस्या को लेकर जय प्रकाश विश्वविद्यालय मुख्यालय में रोषपूर्ण धरना दिया। प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कथित अदूरदर्शी नीति और मनमानी को वेतन भुगतान बाधित होने का मुख्य कारण बताया।
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धरना दे रहे शिक्षकों और कर्मचारियों का कहना था कि विगत तीन वर्षों से उन्हें वेतन नहीं मिला है, जिससे उनके समक्ष गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार महाविद्यालय के बैंक खाते में लगभग तीन करोड़ रुपये आंतरिक स्रोत से तथा करीब तीन करोड़ रुपये इंटर अनुदान मद में जमा हैं, जबकि डेढ़ करोड़ रुपये डिग्री अनुदान के रूप में विश्वविद्यालय में लंबित हैं। इसके बावजूद कार्यरत कर्मियों को भुगतान नहीं किया जा रहा है।
शिक्षकों ने बताया कि जून 2023 में विश्वविद्यालय ने एक पत्र जारी कर महाविद्यालय के खाते से किसी भी प्रकार के व्यय पर रोक लगाते हुए विश्वविद्यालय की अनुमति आवश्यक कर दी थी। आरोप लगाया गया कि कॉलेज प्रबंधन ने बिना अनुमति अन्य व्यय तो किए, लेकिन कर्मियों के वेतन भुगतान के लिए कोई पहल नहीं की। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन भी पूरे मामले में मूकदर्शक बना रहा।
धरनार्थियों ने कहा कि वे लगातार आवेदन और अनुरोध करते रहे, लेकिन उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अगस्त 2024 में विश्वविद्यालय द्वारा प्रो. कृष्ण कुमार को विश्वविद्यालय प्रतिनिधि एवं तदर्थ समिति का सचिव बनाया गया था, लेकिन उनके स्तर पर भी कोई समाधान नहीं निकला। बाद में फरवरी 2026 में उन्हें शासी निकाय का सचिव बनाया गया, किंतु उन्होंने त्यागपत्र दे दिया। इसके बाद मार्च 2026 में प्रो. अजय कुमार आचार्य को शासी निकाय सचिव नियुक्त किया गया, लेकिन उन्होंने भी असमर्थता जताते हुए दायित्व स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जिस महाविद्यालय के पास करोड़ों रुपये जमा हों और सरकार के पास वर्षों से अनुदान लंबित हो, वहां के शिक्षक एवं कर्मचारी भूखमरी की स्थिति में पहुंच जाएं, यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से अविलंब वेतन भुगतान सुनिश्चित करने तथा लंबित अनुदान जारी कराने की मांग की।
धरना में प्रो. तारकेश्वर सिंह, प्रो. उपेंद्र पांडेय, प्रो. कवींद्र ओझा, प्रो. अरविंद पांडेय, प्रो. अखिलेश कुमार, प्रो. मनोज कुमार, प्रो. महेंद्र मिश्रा, प्रो. सुभाष सिंह, प्रो. दशरथ प्रसाद, प्रो. के.के. राय, प्रो. रामबाबू प्रसाद, प्रो. उदय कुमार सिंह, प्रो. सुरेंद्र तिवारी, प्रो. दिनेश सिंह, प्रो. नवीन कुमार, प्रो. देवेश चंद्र राय, प्रो. काशी नाथ राय, प्रो. जयवीर ओझा, प्रो. खुर्शीद आलम, दिलीप कुमार ओझा, जगदीश राय, मिथलेश सिंह सहित 50 से अधिक शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
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