Chhapra: संस्कार भारती की सारण जिला इकाई के तत्वावधान में भारतीय नववर्ष विक्रम संवत के अभिनंदन हेतु आयोजित नवप्रभात कार्यक्रम पूरे उत्साह और गरिमा के साथ संपन्न हुआ। शहर के शाह बनवारी लाल सरोवर परिसर में न केवल सूर्य की प्रथम किरण का स्वागत किया गया, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने का संदेश भी दिया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ ब्रह्ममुहूर्त में शांत वातावरण में हुआ। जैसे ही भगवान भास्कर की स्वर्णिम किरणें जल को स्पर्श करती दिखीं, पूरा परिसर सामूहिक सूर्य वंदना और मंत्रोच्चार से गुंजायमान हो उठा। स्थानीय कलाकारों की नृत्य प्रस्तुतियों एवं पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।
दीप प्रज्ज्वलन और ध्येय गीत पर कुमारी अनिशा के नृत्य प्रस्तुति से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। साथ ही विश्वनेक समदर्शी द्वारा बाँसुरी की मधुर तान ने कार्यक्रम में ऐसी मिठास घोल दी कि हर श्रोता संगीत में डूब गए। इसके साथ अनिरुद्ध कुमार सिंह ने कथक के माध्यम से सरस्वती वंदना की प्रस्तुति दी, गायक मनोज बिहारी, वैभव देव, उमेश सोनी, राजकिशोर प्रसाद, अशोक पाण्डेय, विवेक समदर्शी, निध्याना श्री, मंजु कुमारी ने गायन की मनमोहक प्रस्तुति दी जिसने पूरे कार्यक्रम को भाव विभोर कर दिया। सुधाकर कश्यप ने तबला की संगत से कार्यक्रम में अद्भुत लय और ऊर्जा भर दी। वहीं कवि फौजी राकेश विद्यार्थी, सुरेश चौबे और मोहित सिंह ने अपनी ओजस्वी कविताओं के माध्यम से नववर्ष के आगमन और सांस्कृतिक विमर्श को सभी के सम्मुख प्रस्तुत किया।
संस्कार भारती के प्रांतीय मंचीय कला टोली सदस्य राजेश चंद्र मिश्र ने आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नवप्रभात का लक्ष्य सांस्कृतिक एकता को नई पहचान देना है। यह आयोजन केवल उत्सव नहीं, बल्कि अपनी परंपराओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पवित्र माध्यम है।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता रामदयाल शर्मा ने नागरिक कर्तव्य विषय पर अपने सम्बोधन में कहा कि आज समाज अपने अधिकारों के प्रति तो सजग है, लेकिन कर्तव्यों को भूलता जा रहा है। उन्होंने जल संरक्षण, सड़क सुरक्षा, स्वच्छता एवं सार्वजनिक अनुशासन को एक सुसंस्कृत नागरिक की पहचान बताते हुए छोटी-छोटी आदतों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण का संदेश दिया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को ईश्वरीय कार्य बताते हुए कहा कि नदियों और वृक्षों का संरक्षण वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। कुटुंब प्रबोधन पर अपने विचार रखते हुए उन्होंने परिवार को समाज सुधार का मूल केंद्र बताया और पारिवारिक संवाद एवं साथ भोजन करने की परंपरा को पुनर्जीवित करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित नागरिकों, बुद्धिजीवियों एवं युवाओं ने प्रकृति और परिवार के बीच संतुलन बनाए रखने तथा समरस समाज के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का सामूहिक संकल्प लिया। इस अवसर पर कलाकारों को सम्मान पत्र एवं अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। संचालन सुरेश चौबे ने किया। धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम संयोजक मोहित कुमार सिंह ने किया।
इस अवसर पर प्रोफेसर सुधा बाला, राजेंद्र कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य संजय कुमार, प्रोफेसर अनुपम कुमार सिंह, ओम प्रकाश गुप्ता, पंडित राम प्रकाश मिश्रा, पुनीतेश्वर पुनीत, धनंजय कुमार गोलू, जितेंद्र तिवारी, संस्कार भारती के प्रांतीय महामंत्री सुरभित दत्त, राहुल मेहता, दीपक गुप्ता, आशुतोष पाण्डेय,सुशील तिवारी, राजनन्दनी, मंजु कुमारी, धर्मनाथ सिंह, मलय सौरव,अभिषेक, अभिनंदन सहित बड़ी संख्या में नागरिक एवं युवा उपस्थित रहे।

















