नई दिल्ली, 02 दिसंबर (हि.स.)। केंद्रीय संचार और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को ‘संचार साथी ऐप’ को लेकर विपक्ष के सवालों पर कहा कि इस मुद्दे पर विपक्ष जनता को भ्रमित कर रहा है। सिंधिया ने संसद भवन परिसर में पत्रकारों को बताया कि उन्होंने सदन में इस ऐप की उपयोगिता और इससे उपभोक्ताओं को मिली सुरक्षा का विस्तृत ब्योरा पेश किया है। संचार साथी ऐप कोई जासूसी या कॉल मॉनिटरिंग टूल नहीं है, बल्कि यह जनभागीदारी के सिद्धांत पर आधारित एक सुरक्षा उपाय है। मंत्री ने कहा, “हमारी ज़िम्मेदारी है उपभोक्ताओं की मदद करने की। उपभोक्ताओं की सुरक्षा देखने की। संचार साथी एक ऐप है और एक पोर्टल है, जिसके आधार पर हर एक उपभोक्ता अपनी सुरक्षा अपने हाथों से कर पाता है। यह जनभागीदारी का एक कदम है।” वैभव सूर्यवंशी बने भारतीय टीम के लिए चुने जाने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी उन्होंने कहा कि इस पहल का लोगों को स्वागत करना चाहिए, न कि विरोध। इस ऐप का इस्तेमाल वैकल्पिक है। अगर आप चाहते हो, तो इसको सक्रिय करो। अगर आप नहीं चाहते, तो इसे सक्रिय न करो। आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 शृंखला के लिए भारतीय टीम घोषित, श्रेयस अय्यर बने कप्तान सिंधिया ने बताया कि इस पोर्टल के माध्यम से नागरिकों को धोखाधड़ी से बचाया गया है। जनभागीदारी के आधार पर अब तक लगभग 1.75 करोड़ फ्रॉड्यूलेन्ट मोबाइल कनेक्शन निष्क्रिय किए गए हैं। करीब 20 लाख चोरी हुए फ़ोन को ट्रेस किया गया है। 7.5 लाख चोरी हुए फ़ोन सफलतापूर्वक उपभोक्ताओं को वापस सौंपे गए हैं। उपभोक्ताओं की रिपोर्टिंग और पहचान के आधार पर 21 लाख फ़ोन निष्क्रिय किए गए हैं। वर्ष 2024 में देश के अंदर 22,800 करोड़ रुपये तक की धोखाधड़ी हुई है। अंडर-18 एशिया कप : जापान को 4-1 से हराकर भारतीय पुरुष हॉकी टीम बनी चैंपियन मंत्री ने आरोप लगाया कि जब विपक्ष के पास कोई वास्तविक मुद्दा नहीं होता तो वे ऐसे भ्रम फैलाते हैं। सरकार की ज़िम्मेदारी इन सभी भ्रमों को दूर करना है। उन्होंने जनता के सामने सारे तथ्य रख दिए हैं। सरकार का मुख्य उद्देश्य दूरसंचार संसाधनों के दुरुपयोग से होने वाले साइबर फ्रॉड, फर्जी कॉल और मोबाइल चोरी को रोकना है। इसके अलावा इस ऐप के माध्यम से उपभोक्ताओं को अपने नाम पर जारी हुए सभी मोबाइल कनेक्शनों की जानकारी देखने, संदिग्ध कनेक्शन बंद करवाने, चोरी हुए फोन को ब्लॉक करने और आईएमईआई नंबर की प्रामाणिकता जांचने की सुविधा है। दूसरी तरफ विपक्षी दलों ने इस ऐप को जासूसी करार देते हुए सरकार पर आरोप लगाया है कि सरकार साइबर सुरक्षा के बहाने नागरिकों के फोन में झाकने की कोशिश कर रही है।
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नई दिल्ली, 02 दिसंबर (हि.स.)। केंद्रीय संचार और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को ‘संचार साथी ऐप’ को लेकर विपक्ष के सवालों पर कहा कि इस मुद्दे पर विपक्ष जनता को भ्रमित कर रहा है।
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सिंधिया ने संसद भवन परिसर में पत्रकारों को बताया कि उन्होंने सदन में इस ऐप की उपयोगिता और इससे उपभोक्ताओं को मिली सुरक्षा का विस्तृत ब्योरा पेश किया है। संचार साथी ऐप कोई जासूसी या कॉल मॉनिटरिंग टूल नहीं है, बल्कि यह जनभागीदारी के सिद्धांत पर आधारित एक सुरक्षा उपाय है। मंत्री ने कहा, “हमारी ज़िम्मेदारी है उपभोक्ताओं की मदद करने की। उपभोक्ताओं की सुरक्षा देखने की। संचार साथी एक ऐप है और एक पोर्टल है, जिसके आधार पर हर एक उपभोक्ता अपनी सुरक्षा अपने हाथों से कर पाता है। यह जनभागीदारी का एक कदम है।”
उन्होंने कहा कि इस पहल का लोगों को स्वागत करना चाहिए, न कि विरोध। इस ऐप का इस्तेमाल वैकल्पिक है। अगर आप चाहते हो, तो इसको सक्रिय करो। अगर आप नहीं चाहते, तो इसे सक्रिय न करो।
सिंधिया ने बताया कि इस पोर्टल के माध्यम से नागरिकों को धोखाधड़ी से बचाया गया है। जनभागीदारी के आधार पर अब तक लगभग 1.75 करोड़ फ्रॉड्यूलेन्ट मोबाइल कनेक्शन निष्क्रिय किए गए हैं। करीब 20 लाख चोरी हुए फ़ोन को ट्रेस किया गया है। 7.5 लाख चोरी हुए फ़ोन सफलतापूर्वक उपभोक्ताओं को वापस सौंपे गए हैं। उपभोक्ताओं की रिपोर्टिंग और पहचान के आधार पर 21 लाख फ़ोन निष्क्रिय किए गए हैं। वर्ष 2024 में देश के अंदर 22,800 करोड़ रुपये तक की धोखाधड़ी हुई है।
मंत्री ने आरोप लगाया कि जब विपक्ष के पास कोई वास्तविक मुद्दा नहीं होता तो वे ऐसे भ्रम फैलाते हैं। सरकार की ज़िम्मेदारी इन सभी भ्रमों को दूर करना है। उन्होंने जनता के सामने सारे तथ्य रख दिए हैं। सरकार का मुख्य उद्देश्य दूरसंचार संसाधनों के दुरुपयोग से होने वाले साइबर फ्रॉड, फर्जी कॉल और मोबाइल चोरी को रोकना है। इसके अलावा इस ऐप के माध्यम से उपभोक्ताओं को अपने नाम पर जारी हुए सभी मोबाइल कनेक्शनों की जानकारी देखने, संदिग्ध कनेक्शन बंद करवाने, चोरी हुए फोन को ब्लॉक करने और आईएमईआई नंबर की प्रामाणिकता जांचने की सुविधा है।
दूसरी तरफ विपक्षी दलों ने इस ऐप को जासूसी करार देते हुए सरकार पर आरोप लगाया है कि सरकार साइबर सुरक्षा के बहाने नागरिकों के फोन में झाकने की कोशिश कर रही है।
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