नई दिल्ली, 13 अप्रैल (हि.स.)। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि देश में मौजूदा राजनीतिक बहस का केंद्र महिला आरक्षण नहीं, बल्कि परिसीमन होना चाहिए। बिना पारदर्शी प्रक्रिया, स्पष्ट मानकों और व्यापक सहमति के किया गया परिसीमन न केवल राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व के संतुलन को बिगाड़ सकता है, बल्कि यह संघीय ढांचे और संवैधानिक व्यवस्था पर भी असर डाल सकता है। उन्होंने इसे एक गंभीर और दूरगामी प्रभाव वाला मुद्दा बताया। सोनिया ने एक अंग्रेजी अखबार में लिखे अपने लेख में कहा कि सरकार महिला आरक्षण के मुद्दे को प्रमुखता देकर असली चिंता से ध्यान हटा रही है। महिला आरक्षण का प्रावधान पहले ही पारित किया जा चुका है, लेकिन इसके क्रियान्वयन को जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ दिया गया है, जिससे इसमें अनावश्यक देरी हो रही है। उन्होंने लिखा कि साल 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने का प्रावधान है, लेकिन इसे लागू करने के लिए अगली जनगणना और उसके बाद परिसीमन अनिवार्य कर दिया गया है। जब राजनीतिक इच्छाशक्ति हो तो इसे पहले भी लागू किया जा सकता था। आज का पंचांग | शुद्ध ज्येष्ठ शुक्लपक्ष दशमी सोनिया गांधी ने कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर अब तक कोई आधिकारिक खाका सामने नहीं आया है। यह केवल जनसंख्या के आधार पर सीटों का बंटवारा करने का मामला नहीं है, बल्कि इसमें राजनीतिक और क्षेत्रीय संतुलन का भी ध्यान रखना जरूरी है, ताकि जनसंख्या नियंत्रण में सफल राज्यों के साथ अन्याय न हो। उन्होंने कहा कि जनगणना में लगातार हो रही देरी का असर कई सरकारी योजनाओं और अधिकारों पर पड़ रहा है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून जैसे प्रावधानों का लाभ भी पूरी तरह लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है। लखनऊ कोचिंग आग हादसे में पुलिस ने चार को किया गिरफ्तार, चार अफसर सस्पेंड सोनिया गांधी ने कहा कि सरकार विशेष सत्र बुलाने में जल्दबाजी कर रही है, जबकि इतने महत्वपूर्ण विषय पर पहले सभी दलों के साथ चर्चा होनी चाहिए। लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सहमति और संवाद अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि सरकार को सभी राजनीतिक दलों के साथ बैठक कर इस मुद्दे पर स्पष्टता लानी चाहिए और फिर किसी भी संवैधानिक संशोधन की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। कतर फैक्टरी दुर्घटना में 12 भारतीय नागरिकों की जान गई, दूतावास ने जताया शोक File Photo
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नई दिल्ली, 13 अप्रैल (हि.स.)। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि देश में मौजूदा राजनीतिक बहस का केंद्र महिला आरक्षण नहीं, बल्कि परिसीमन होना चाहिए। बिना पारदर्शी प्रक्रिया, स्पष्ट मानकों और व्यापक सहमति के किया गया परिसीमन न केवल राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व के संतुलन को बिगाड़ सकता है, बल्कि यह संघीय ढांचे और संवैधानिक व्यवस्था पर भी असर डाल सकता है। उन्होंने इसे एक गंभीर और दूरगामी प्रभाव वाला मुद्दा बताया।
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सोनिया ने एक अंग्रेजी अखबार में लिखे अपने लेख में कहा कि सरकार महिला आरक्षण के मुद्दे को प्रमुखता देकर असली चिंता से ध्यान हटा रही है। महिला आरक्षण का प्रावधान पहले ही पारित किया जा चुका है, लेकिन इसके क्रियान्वयन को जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ दिया गया है, जिससे इसमें अनावश्यक देरी हो रही है।
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उन्होंने लिखा कि साल 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने का प्रावधान है, लेकिन इसे लागू करने के लिए अगली जनगणना और उसके बाद परिसीमन अनिवार्य कर दिया गया है। जब राजनीतिक इच्छाशक्ति हो तो इसे पहले भी लागू किया जा सकता था।
सोनिया गांधी ने कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर अब तक कोई आधिकारिक खाका सामने नहीं आया है। यह केवल जनसंख्या के आधार पर सीटों का बंटवारा करने का मामला नहीं है, बल्कि इसमें राजनीतिक और क्षेत्रीय संतुलन का भी ध्यान रखना जरूरी है, ताकि जनसंख्या नियंत्रण में सफल राज्यों के साथ अन्याय न हो।
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उन्होंने कहा कि जनगणना में लगातार हो रही देरी का असर कई सरकारी योजनाओं और अधिकारों पर पड़ रहा है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून जैसे प्रावधानों का लाभ भी पूरी तरह लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
सोनिया गांधी ने कहा कि सरकार विशेष सत्र बुलाने में जल्दबाजी कर रही है, जबकि इतने महत्वपूर्ण विषय पर पहले सभी दलों के साथ चर्चा होनी चाहिए। लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सहमति और संवाद अनिवार्य है।
उन्होंने कहा कि सरकार को सभी राजनीतिक दलों के साथ बैठक कर इस मुद्दे पर स्पष्टता लानी चाहिए और फिर किसी भी संवैधानिक संशोधन की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
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