सारण, 20 अगस्त (हि.स.)। शहर के मध्य में स्थित बाबा धर्मनाथ धनी मंदिर लाखों श्रद्धालुओं के लिए श्रद्धा और अलौकिक शक्ति का महान प्रतीक है।
देवाधिदेव भगवान शिव को समर्पित यह ऐतिहासिक स्थल केवल एक सामान्य देवालय नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास, लोकस्मृति, संत-साधना और सनातन संस्कृति का एक समृद्ध व जीवंत तीर्थ-परिसर है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी यह स्थल सारण की धार्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना का मुख्य केंद्र बना हुआ है।
लोकमान्यताओं के अनुसार प्राचीन काल में इस स्थान पर एक अत्यंत घना जंगल हुआ करता था। कहा जाता है कि खुदाई के दौरान वहाँ से एक अलौकिक शिवलिंग प्रकट हुआ। यह शिवलिंग मानव-निर्मित न होकर स्वयंभू माना जाता है।
प्राकट्य के उपरांत स्थानीय श्रद्धालुओं ने यहाँ मंदिर का निर्माण कराया, जिसका समय-समय पर जीर्णोद्धार होता रहा है। वर्तमान मंदिर का स्वरूप लगभग दो से तीन शताब्दी पुराना माना जाता है।
जयप्रकाश विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभागाध्यक्ष एवं मठ-मंदिर शोधकर्ता प्रो डॉ अमरनाथ प्रसाद ने हिन्दुस्थान समाचार से बातचीत में बताया कि बाबा धर्मनाथ धनी मंदिर की महत्ता इसलिए भी विशिष्ट है कि यहाँ मंदिर और समाधि, पूजा और साधना, लोकविश्वास और संत-परंपरा एक ही आध्यात्मिक धरातल पर दिखाई देते हैं।
उन्होंने बताया कि शिवलिंग जहाँ सनातन चेतना का प्रतीक है, वहीं संतों की समाधियाँ त्याग, तपस्या और आत्मानुभूति की परंपरा की स्मृति को जीवित रखती हैं। इस दृष्टि से यह स्थान सारण की धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी आस्था का प्रकाश संजोए हुए है।
यहाँ आने वाला श्रद्धालु केवल भगवान शिव के दर्शन करके नहीं लौटता, बल्कि वह उस संत-परंपरा की छाया को भी अनुभव करता है। जिसने इस भूमि को साधना से सींचा है। मंदिर की घंटियों में जहाँ भक्ति का स्वर सुनाई देता है, वहीं समाधियों की निस्तब्धता में तप और त्याग की कथा सुनाई देती है।
सावन के पवित्र महीने में बिहार के कोने-कोने से तथा पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश से लाखों कांवड़िये और श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुँचते हैं। हर-हर महादेव के गगनभेदी जयघोष, घंटियों की गूंज और जलाभिषेक के लिए आतुर भक्तों की विशाल भीड़ से पूरा वातावरण शिवमय हो जाता है। भक्त बाबा धर्मनाथ को जल, पुष्प, बेलपत्र, फल तथा नैवेद्य अर्पित कर अपनी मनोकामनाएँ पूर्ण होने का आशीर्वाद माँगते हैं।
प्रतिदिन संध्या समय होने वाली भव्य आरती यहाँ की आध्यात्मिक अनुभूति को और अधिक गहरा कर देती है। प्रज्वलित दीपों की ज्योति, धूप की सुगंध और भक्तों के सामूहिक मंत्रोच्चार से संपूर्ण परिसर अलौकिक हो उठता है।
बाबा का पुष्प, फल, मेवा और मिष्ठान से किया जाने वाला विशेष भव्य श्रृंगार श्रद्धा और सौंदर्य का अनूठा संगम प्रस्तुत करता है।
अंत में उन्होंने कहा कि बाबा धर्मनाथ धनी मंदिर को केवल एक मंदिर कहना इसके व्यापक आध्यात्मिक स्वरूप को सीमित करना होगा। यह वास्तव में भारतीय आस्था, सनातन संस्कृति और संत-साधना का एक अटूट धरोहर-स्थल है।



















