Chhapra: भारतीय जनता पार्टी, बिहारके प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर एनडीए पूरी तरह एकजुट है। उन्होंने कहा कि एनडीए विधानमंडल दल की बैठक समय-समय पर होती रहती है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री आवास पर एनडीए विधानमंडल दल और उपलब्ध सांसदों की बैठक बुलाई गई है। बैठक में विधान परिषद चुनाव समेत विभिन्न राजनीतिक एवं संगठनात्मक विषयों पर चर्चा हुई।
संजय सरावगी ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एनडीए विधानमंडल दल के नेता हैं और उन्हीं की अध्यक्षता में बैठक होती है। चुनाव का समय है, इसलिए स्वाभाविक रूप से विधान परिषद चुनाव को लेकर भी चर्चा हुई। उन्होंने स्पष्ट किया कि एनडीए में किसी तरह का मतभेद नहीं है। पांचों दल मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं और जनता दल यूनाइटेड के चार तथा भाजपा के चार प्रत्याशियों समेत सभी आठ प्रत्याशियों के लिए एनडीए एकजुट होकर मैदान में है।
उन्होंने कहा कि कई लोगों की इच्छा होती है कि उन्हें भी चुनाव लड़ने का अवसर मिले या समर्थन मिले, लेकिन व्यक्तिगत स्तर की आकांक्षाओं को एनडीए का मतभेद नहीं कहा जा सकता। एनडीए पूरी मजबूती और समन्वय के साथ चुनाव लड़ रहा है। इसके विपरीत महागठबंधन में खंड-खंड स्थिति है और वहां अलग-अलग दल अपने-अपने उम्मीदवार और अपनी-अपनी राजनीति कर रहे हैं।
विपक्ष के एसआईआर विरोधी आंदोलन पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने बूथ लूटकर सरकार बनाने की राजनीति की, उन्हें अब फर्जी मतदाताओं के नाम हटने से परेशानी हो रही है। एसआईआर के तहत दो जगह नाम रखने वाले, मृतक, स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके लोगों तथा अवैध घुसपैठियों के नामों की जांच की जा रही है।
उन्होंने कहा कि ड्राफ्ट प्रकाशन के बाद सभी राजनीतिक दलों को मतदाता सूची उपलब्ध कराई जाती है और आपत्ति दर्ज कराने के लिए पर्याप्त समय दिया जाता है। प्रत्येक दल के बूथ स्तर पर बीएलए भी मौजूद हैं।
संजय सरावगी ने कहा कि कांग्रेस और विपक्ष के नेता जब अपने-अपने राज्यों में फर्जी मतदाताओं की संख्या का दावा करते थे, तब उन्हें मतदाता सूची में सुधार की जरूरत दिखाई देती थी। अब जब वास्तविक प्रक्रिया के तहत नामों की जांच और सुधार हो रहा है तो उन्हें परेशानी हो रही है।
उन्होंने कहा कि यह विपक्ष का दोहरा रवैया है, जिसे बिहार और देश की जनता अच्छी तरह समझ रही है। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए के प्रति लगातार जनसमर्थन बढ़ रहा है, इसलिए विपक्ष में हताशा और बेचैनी स्वाभाविक है।


















