Chhapra: घर के बाहर बाढ़ का पानी धीरे-धीरे उतर रहा है, लेकिन रायपुर विंदगावां के एक बाढ़ पीड़ित परिवार के सामने सबसे बड़ा सवाल पानी का नहीं, आज चूल्हा कैसे जलेगा, यह है। घर में रखा जलावन खत्म हो चुका है। मोबाइल की बैटरी जवाब दे चुकी है और बिजली का कनेक्शन करीब एक सप्ताह से कटा है। सड़क संपर्क भंग होने के कारण कहीं जाकर मोबाइल चार्ज कराने की भी गुंजाइश नहीं। गैस खत्म होने को है, लेकिन उसकी बुकिंग भी नहीं हो पा रही। सूखा राशन मौजूद है, मगर उसे पकाने का साधन नहीं।
यह अकेले एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि सदर प्रखंड के रायपुर विंदगावां, कोटवापट्टीरामपुर और बड़हरा महाजी पंचायत के बाढ़ पीड़ितों की साझा पीड़ा है। गंगा के जलस्तर में धीरे-धीरे कमी जरूर आ रही है, लेकिन करीब एक सप्ताह से पानी से घिरे लोगों की मुश्किलें कम होने के बजाय बढ़ती जा रही हैं।
बिजली आपूर्ति बंद होने से अंधेरे में रात गुजारना पड़ रहा है। सड़क संपर्क टूटे रहने के कारण आवागमन के साथ जरूरी सामान की आपूर्ति भी प्रभावित है। मोबाइल चार्ज नहीं होने से लोगों का बाहरी दुनिया से संपर्क तक सीमित हो गया है। गैस बुकिंग नहीं होने और जलावन खत्म होने के बाद सूखा राशन भी अब बेबस नजर आ रहा है।
दियारा में एक भी कम्युनिटी किचेन नहीं
विडंबना यह है कि बाढ़ के बीच दियारा क्षेत्र में एक भी कम्युनिटी किचेन संचालित नहीं हो रहा है। जिन परिवारों के घरों में चूल्हा जलाने का इंतजाम नहीं बचा, उनके लिए सामुदायिक रसोई बड़ी राहत बन सकती थी।
बाढ़ पीड़ितों की मांग है कि प्रशासन तत्काल कम्युनिटी किचेन शुरू कराए, बिजली बहाल करे तथा नाव के जरिए खाद्य सामग्री, गैस और जरूरी सामान उपलब्ध कराए।
जलस्तर भले घट रहा है, मगर दियारा के घरों में चिंता का पानी अभी भी चढ़ा हुआ है।



















