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साभ्यत्कि विकास का प्रतिरूप है चिरांद: डा. प्रमोद चंद्रवंशी

CT Bihar Desk
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Chhapra: विश्व का दुर्लभ पुरातात्विक स्थल चिरांद साभ्यत्कि विकास का एक ऐसा प्रतिरूप है जो वर्तमान की समस्याओं के कारण व निवारण पर प्रकाश डालता है। उक्त बातें गंगा, सरयू और सोन नद के संगम पर आयोजित चिरांद चेतना महोत्सव के 19 वे आयोजन का उद्घाटन करते हुए बिहार के कला-संस्कृति मंत्री डा. प्रमोद कुमार चंद्रवंशी ने कहीं।

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उन्होंने कहा कि दस वर्षों के उत्खनन से निकले पुरातात्विक साक्ष्य यह बताते हैं कि भारत का यह प्राचीन स्थल ऋषि व कृषि संस्कृति का समन्वय केंद्र था। भारत की ज्ञान परंपरा यहां के लोक व्यवहार में था। यहां दैहिक, दैविक और भौतिक तापों से मुक्ति देने वाली समाज व अर्थ व्यवस्था थी। वर्तमान में विश्व के समाज विज्ञानी इसे सस्टेनेबल डेवल्पमेंट माडल कहते हैं।

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चिरांद चेतना महोत्सव के तहत मंत्री डा. प्रमोद चंद्रवंशी ने पुरातात्विक स्थल पर चिरांद उत्खनन में प्राप्त अवशेषों एवं इसके इतिहास से संबंधित चित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इसके साथ ही वे अयोध्या के प्रमुख लक्ष्मण किला की गुरु गद्दी चिरांद स्थित अयोध्या मंदिर में लक्ष्मण किलाधीस महंत मैथिली रमण शरण महाराज, प्रसिद्ध संत मौनी बाबा व अन्य धर्माचार्यों के साथ इसके सांस्कृतिक महत्व के पुनर्स्थापना पर चर्चा की। उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अयोध्या मंदिर में दर्शन-पूजन भी किए।


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चिरांद संगम क्षेत्र स्थित बंगाली बाबा घाट पर आयोजित चिरांद चेतना महोत्सव सह गंगा गरिमा रक्षा संकल्प समारोह का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहाकि हजारों की संख्या में एकत्रित लोगों की श्रद्धा सनातन संस्कृति का संबल है। हमारा प्रयास है कि सरकार इस आयोजन को राजकीय समारोह के रूप में मान्यता दे। उन्होंने कहाकि सरकार बहुत जल्द इसका निर्णय लेगी और आपको अवगत करायेगी।

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समारोह मेें साहित्य, कला, पर्यावरण, कृषि, सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले पुरुषार्थियों को चिरांद रत्न सम्मान दिया गया। साहित्य एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रो. अरुण कुमार भगत, पर्यावरण के क्षेत्र में रामबिलास शाण्डिल्य, संगीत के क्षेत्र में पं.रामप्रकाश मिश्र, कृषि के क्षेत्र में साक्षी कुमारी एवं सेवा के क्षेत्र में डा. डीके ओझा को चिरांद रत्न सम्मान दिया गया।

गंगा पूजन एवं गंगा महाआरती के साथ प्रारंभ हुए इस समारोह के सहभागी संगठन गंगा समग्र के राष्ट्रीय मंत्री रामाशीष ने कहा कि सदा नीरा नदियों के सान्निध्य में भारत की संस्कृति व ज्ञान परंपरा का प्रवाह आगे बढ़ा है। भारत की प्रकृति व संस्कृति रंग, नस्ल, राज्य, देश की सीमा के परे सबके कल्याण की कामना करती है। चिरांद उस संस्कृति का प्राचीन केंद्र है।

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राष्ट्रीय सस्वयंसेवाक संघ (आरएसएस) के क्षेत्र कार्यवाह डा. मोहन सिंह ने कहा कि विनाश के मुहाने पर खड़ विश्व को विभारत की संस्कृति व आध्यात्म से बड़ी आशा है।


जेपी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रमेंद्र कुमार वाजपेयी ने कहा कि चिरांद भारत ही नहीं बल्कि विश्व के लिए महत्वपूर्ण है। यहां उत्खनन में मिले प्रमाण ने इतिहास को नयी दृष्टि दी है। इससे भारत के इतिहास की बिखरी कड़ियां एकसूत्र में बद्ध हुई हैं।

गंगा आरती व सम्बोधन के बाद सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का दौर शुरू हुआ। इसमें संपूर्ण भारत की सांस्कृतिक व प्राकृतिक विरासत को भावाभिव्यक्ति देने वाले भोजपुरी के राष्ट्रगीत बटोहिया की प्रस्तुति हुई। चिरांद गाथा से लेकर गंगा के दर्द को अभिव्यक्त करने वाली गंगा व्यथा जैसी नृत्य नाटिका की प्रस्तुति हुई।

लोक व शास्त्रीय प्रस्तुतियों से ऐसी समा बंधी की रातभर श्रोता गंगा जमे रहे। बारिश के कारण गर्मी से राहत थी। पूर्णिमा की चांदनी रात में गंगा की ओर से आने वाली मंद-मंद शीतल समीर के आनंदपूर्ण वातावरण में गायन, वादन, नृत्य और नाट्य की प्रस्तुति होती रही।

इस समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में लक्ष्मण किलाधीस महंत मैथिली रमन शरण, परमपूज्य मौनी बाबा, नागा बाबा, स्वामी दिव्यात्मा नंद महाराज, गंगा समग्र के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमरेंद्र प्रसाद सिंह उपाख्य लल्लू बाबू, गंगा समग्र के राष्ट्रीय मंत्री रमाशंकर सिन्हा, पूर्व सांसद लाल बाबू राय, समाजसेवी राम बाबू राय, उत्तर बिहार के संगठन मंत्री जयकिशोर पाठक आदि उपस्थित थे। मंच का संचालन चिरांद विकास परिषद के सचिव श्रीराम तिवारी ने किया।

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