Chhapra: संठा गांव में महावीरी पूजा पारंपरिक श्रद्धा एवं उल्लास के साथ सम्पन्न हुई। पूजा के अवसर पर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं ने एक हजार से अधिक ध्वज चढ़ाकर अपनी आस्था प्रकट की।
पूजा को लेकर आसपास के क्षेत्रों में भी उत्साह का माहौल रहा। मान्यता है कि मनोकामना पूरी होने के बाद श्रद्धालु महावीर जी के मंदिर में ध्वज चढ़ाते हैं।
ग्रामीण मदन राय, मुन्द्रिका सिंह, बिनोद राय एवं गेना सिंह ने बताया कि इस धार्मिक परंपरा का इतिहास करीब चार सौ वर्षों पुराना है। ग्रामीणों के अनुसार, कई शताब्दी पूर्व बाढ़ के पानी में गांव के एक व्यक्ति को महावीर जी की प्रतिमा मिली थी।
वह प्रतिमा को अपने घर ले आया। उसी रात स्वप्न में महावीर जी ने उसे मंदिर का निर्माण कर प्रतिमा स्थापित करने का निर्देश दिया। इसके बाद ग्रामीणों के सहयोग से मंदिर का निर्माण कराया गया और प्रतिमा स्थापित की गई।
समय के साथ मंदिर के प्रति लोगों की आस्था बढ़ती गई और इसकी ख्याति दूर-दूर तक फैल गई। महावीरी पूजा के अवसर पर आसपास की करीब दस पंचायतों से लोग अपने घर लौटकर पूजा-अर्चना में शामिल होते हैं। श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से पूजा कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
पूजा के दौरान मंदिर परिसर में भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। ध्वजों से सजा मंदिर परिसर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था और सदियों पुरानी परंपरा का जीवंत प्रतीक बना रहा।



















