नई दिल्ली, 27 फ़रवरी (हि.स.)। राऊज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली आबकारी घोटाला मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से दर्ज मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को बरी कर दिया है। स्पेशल जज जीतेंद्र सिंह ने दोनों को बरी करने का आदेश दिया।
कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में विफल रहा। कोई आपराधिक साजिश का साक्ष्य नहीं मिला। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कई बार सीबीआई पर नाराजगी जताई और सीबीआई की चार्जशीट पर सवाल उठाया। कोर्ट ने कहा कि सीबीआई ने जो दस्तेवज दिए, वे चार्जशीट से मेल नहीं खाते हैं। कोर्ट ने आरोपितों के खिलाफ आरोप तय करने पर 12 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था।
इस मामले में सीबीआई ने केजरीवाल और सिसोदिया समेत 23 लोगों को आरोपित बनाया था। सुनवाई के दौरान केजरीवाल की ओर से कहा गया था कि उनके खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं है। केजरीवाल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एन हरिहरन ने कहा था कि केजरीवाल सरकारी काम कर रहे थे। इस बात के कोई साक्ष्य नहीं हैं कि केजरीवाल ने किसी से कहा हो कि साउथ लॉबी से पैसे मांगे। हरिहरन ने कहा कि केजरीवाल का नाम पहले तीन चार्जशीट में नहीं था। उनका नाम चौथे पूरक चार्जशीट में आया।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 21 मार्च, 2024 को अरविंद केजरीवाल को पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया था। 10 मई को उच्चतम न्यायालय ने केजरीवाल को एक जून तक की अंतरिम जमानत दी थी जिसके बाद केजरीवाल ने 2 जून, 2024 को सरेंडर किया था। केजरीवाल को 26 जून, 2024 को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। ईडी ने 10 मई, 2024 को छठी पूरक चार्जशीट दाखिल किया था जिसमें भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) नेता के. कविता, चनप्रीत सिंह, दामोदर शर्मा, प्रिंस कुमार, अरविंद सिंह को आरोपित बनाया गया है। कोर्ट ने 29 मई को छठे पूरक चार्जशीट पर संज्ञान लिया था।
उच्चतम न्यायालय ने 27 अगस्त को बीआरएस नेता के. कविता को सीबीआई और ईडी के मामले में जमानत दी थी। उच्चतम न्यायालय ने 13 सितंबर, 2024 को केजरीवाल को सीबीआई के मामले में नियमित जमानत दी थी। उसके पहले उच्चतम न्यायालय ने 12 जुलाई, 2024 को ईडी के मामले में केजरीवाल को अंतरिम जमानत दी थी।









