Chhapra/Patna: सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के शिक्षाविद्, भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य एवं शिक्षक हितों के मुखर प्रवक्ता डॉ. राहुल राज ने शुक्रवार को बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी से शिष्टाचार मुलाकात कर बिहार स्थानांतरण नियमावली-2026 के तहत जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) में व्याप्त व्यावहारिक विसंगतियों के संशोधन तथा शिक्षकों की लंबित समस्याओं के स्थायी समाधान की मांग की। डॉ. राहुल राज ने बताया कि मुलाकात के दौरान उन्होंने मंत्री से कहा कि बिहार सरकार द्वारा लागू की गई स्थानांतरण नीति शिक्षकों की वर्षों पुरानी मांग को पूरा करने की दिशा में एक ऐतिहासिक और स्वागतयोग्य पहल है। हालांकि, वर्तमान एसओपी के कुछ प्रावधान व्यवहारिक कठिनाइयाँ उत्पन्न कर रहे हैं, जिससे शिक्षकों के बीच असंतोष और भ्रम की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि वर्षों से रिक्त पदों पर नियमित रूप से कार्यरत शिक्षकों को केवल सेवा अवधि के आधार पर अधिशेष शिक्षक घोषित करना प्राकृतिक न्याय, सेवा नियमों तथा प्रशासनिक निष्पक्षता की भावना के अनुरूप नहीं है। उन्होंने इस व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता जताई। मरीजों की सुविधा के लिए विशेष फाइल ब्रोशर का लोकार्पण डॉ. राहुल राज ने शिक्षा मंत्री का ध्यान इस ओर भी आकर्षित कराया कि कई विद्यालयों में पोर्टल पर प्रदर्शित जानकारी वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खा रही है। उन्होंने बताया कि कहीं एक ही विषय के सभी शिक्षकों को अधिशेष घोषित कर दिया गया है, जबकि कुछ विद्यालयों में निर्धारित मानक से अधिक शिक्षक होने के बावजूद किसी को अधिशेष नहीं माना गया है। उनके अनुसार, ऐसी विसंगतियाँ स्थानांतरण प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करती हैं। उन्होंने विषयवार शिक्षक मानकों की पुनर्समीक्षा, भाषा, विज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान विषयों में शिक्षकों की संख्या का युक्तिसंगत निर्धारण तथा पुस्तकालयाध्यक्षों को भी स्थानांतरण का समान अवसर उपलब्ध कराने की मांग रखी। राज्यपाल सचिवालय में सलाहकार नियुक्त हुए प्रो. बिनोद कुमार त्रिपाठी डॉ. राहुल राज ने कहा कि शिक्षक केवल कर्मचारी नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के आधार स्तंभ हैं। उनके सम्मान, सेवा सुरक्षा और न्यायपूर्ण स्थानांतरण की व्यवस्था सुनिश्चित करना सरकार और समाज दोनों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यदि एसओपी की व्यावहारिक विसंगतियों का समय रहते समाधान कर दिया जाता है तो स्थानांतरण नीति अपने मूल उद्देश्य को सफलतापूर्वक प्राप्त करेगी और शिक्षकों का विश्वास तथा मनोबल दोनों मजबूत होंगे। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने डॉ. राहुल राज द्वारा उठाए गए सभी बिंदुओं पर गंभीरतापूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के हितों से जुड़े इन महत्वपूर्ण विषयों पर विभाग संवेदनशीलता के साथ विचार करेगा तथा आवश्यक कार्रवाई कर न्यायसंगत समाधान सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। रिलीज से पहले दर्शकों तक पहुंच रही ‘ओह माय डॉग’, देशभर में स्पेशल स्क्रीनिंग शुरू मुलाकात के बाद डॉ. राहुल राज ने कहा कि शिक्षकों के सम्मान, अधिकार और स्वाभिमान की रक्षा के लिए उनका संघर्ष निरंतर जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की प्रत्येक न्यायोचित मांग को सरकार के समक्ष पूरी मजबूती से उठाया जाएगा और स्थायी समाधान होने तक वे उनकी आवाज़ बनकर संघर्ष करते रहेंगे।
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Chhapra/Patna: सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के शिक्षाविद्, भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य एवं शिक्षक हितों के मुखर प्रवक्ता डॉ. राहुल राज ने शुक्रवार को बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी से शिष्टाचार मुलाकात कर बिहार स्थानांतरण नियमावली-2026 के तहत जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) में व्याप्त व्यावहारिक विसंगतियों के संशोधन तथा शिक्षकों की लंबित समस्याओं के स्थायी समाधान की मांग की।
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डॉ. राहुल राज ने बताया कि मुलाकात के दौरान उन्होंने मंत्री से कहा कि बिहार सरकार द्वारा लागू की गई स्थानांतरण नीति शिक्षकों की वर्षों पुरानी मांग को पूरा करने की दिशा में एक ऐतिहासिक और स्वागतयोग्य पहल है। हालांकि, वर्तमान एसओपी के कुछ प्रावधान व्यवहारिक कठिनाइयाँ उत्पन्न कर रहे हैं, जिससे शिक्षकों के बीच असंतोष और भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
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उन्होंने कहा कि वर्षों से रिक्त पदों पर नियमित रूप से कार्यरत शिक्षकों को केवल सेवा अवधि के आधार पर अधिशेष शिक्षक घोषित करना प्राकृतिक न्याय, सेवा नियमों तथा प्रशासनिक निष्पक्षता की भावना के अनुरूप नहीं है। उन्होंने इस व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता जताई।
डॉ. राहुल राज ने शिक्षा मंत्री का ध्यान इस ओर भी आकर्षित कराया कि कई विद्यालयों में पोर्टल पर प्रदर्शित जानकारी वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खा रही है। उन्होंने बताया कि कहीं एक ही विषय के सभी शिक्षकों को अधिशेष घोषित कर दिया गया है, जबकि कुछ विद्यालयों में निर्धारित मानक से अधिक शिक्षक होने के बावजूद किसी को अधिशेष नहीं माना गया है। उनके अनुसार, ऐसी विसंगतियाँ स्थानांतरण प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करती हैं।
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उन्होंने विषयवार शिक्षक मानकों की पुनर्समीक्षा, भाषा, विज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान विषयों में शिक्षकों की संख्या का युक्तिसंगत निर्धारण तथा पुस्तकालयाध्यक्षों को भी स्थानांतरण का समान अवसर उपलब्ध कराने की मांग रखी।
डॉ. राहुल राज ने कहा कि शिक्षक केवल कर्मचारी नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के आधार स्तंभ हैं। उनके सम्मान, सेवा सुरक्षा और न्यायपूर्ण स्थानांतरण की व्यवस्था सुनिश्चित करना सरकार और समाज दोनों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यदि एसओपी की व्यावहारिक विसंगतियों का समय रहते समाधान कर दिया जाता है तो स्थानांतरण नीति अपने मूल उद्देश्य को सफलतापूर्वक प्राप्त करेगी और शिक्षकों का विश्वास तथा मनोबल दोनों मजबूत होंगे।
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने डॉ. राहुल राज द्वारा उठाए गए सभी बिंदुओं पर गंभीरतापूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के हितों से जुड़े इन महत्वपूर्ण विषयों पर विभाग संवेदनशीलता के साथ विचार करेगा तथा आवश्यक कार्रवाई कर न्यायसंगत समाधान सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।
मुलाकात के बाद डॉ. राहुल राज ने कहा कि शिक्षकों के सम्मान, अधिकार और स्वाभिमान की रक्षा के लिए उनका संघर्ष निरंतर जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की प्रत्येक न्यायोचित मांग को सरकार के समक्ष पूरी मजबूती से उठाया जाएगा और स्थायी समाधान होने तक वे उनकी आवाज़ बनकर संघर्ष करते रहेंगे।
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