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विधानसभा में पेश कैग रिपोर्ट – बिहार की अर्थव्यवस्था में 13.09 प्रतिशत की बढ़ोतरी, लेकिन बढ़ा राजकोषीय घाटा

CT Bihar Desk
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पटना: बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के चौथे दिन गुरुवार को वित्त मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री विजेंद्र यादव ने नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की वित्त वर्ष 2024-25 की रिपोर्ट सदन में पेश की। रिपोर्ट में राज्य की अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय वृद्धि के साथ-साथ वित्तीय प्रबंधन से जुड़ी कई चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया गया है।

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कैग के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान राज्य के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में विगत वर्ष की तुलना में 13.09 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वर्ष 2020-21 से 2024-25 की अवधि के दौरान, देश के जीडीपी में राज्य के जीएसडीपी का अनुपात 2.86 से सुधरकर 3.0 प्रतिशत हो गया। वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान, राज्य का राजस्व व्यय विगत वर्ष की तुलना में 14.96 प्रतिशत बढ़ गया, जबकि इसी अवधि के दौरान इसकी राजस्व प्राप्तियों में 13.09 प्रतिशत की वृद्धि हुई। सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के संदर्भ में राजस्व व्यय वर्ष 2020-21 के 24.57 प्रतिशत (1,39,493.45 करोड़) से घटकर वर्ष 2024-25 में 22.08 प्रतिशत ( 2,19,015.21 करोड़) हो गया। वर्ष 2024-25 के दौरान, ब्याज भुगतान, वेतन और पेंशन सहित 86,235.64 करोड़ का प्रतिबद्ध व्यय, राज्य के राजस्व व्यय का 39.37 प्रतिशत और राजस्व प्राप्तियों का 39.43 प्रतिशत था। वर्ष 2021-22 से 2024-25 के दौरान, प्रतिबद्ध व्यय एवं सब्सिडी मिलकर राजस्व प्राप्तियों और राजस्व व्यय का 43 से 48 प्रतिशत था।

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वर्ष 2024-25 के दौरान राज्य को 357.38 करोड़ का राजस्व घाटा हुआ, जबकि पिछले वर्ष के दौरान 2,833.06 करोड़ का राजस्व अधिशेष था। राज्य का राजकोषीय घाटा वित्तीय वर्ष 2023-24 के 35,659.88 करोड़ से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2024-25 में 41,222.50 करोड़ हो गया। वर्ष 2024-25 के दौरान, हालांकि राज्य की राजस्व प्राप्तियों में पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 25,310.60 करोड़ की वृद्धि हुई, लेकिन केंद्रीय अंतरणों पर इसकी निर्भरता (कुल राजस्व प्राप्तियों का लगभग 59 प्रतिशत) सीमित राजकोषीय स्वायत्तता को दर्शाती है।

वर्ष 2024-25 में जीएसडीपी में राज्य के गैर-कर राजस्व का हिस्सा केवल 0.58 प्रतिशत था। इसके अलावा, 15वें वित्त आयोग और बिहार राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन के तहत निर्धारित गैर-कर राजस्व के लक्ष्यों को वर्ष 2024-25 के दौरान प्राप्त नहीं किया जा सका। ‘गैर-लौह खनन और धातुकर्म उद्योग’ के तहत प्राप्तियां (61.16 प्रतिशत) गैर-कर राजस्व ( 5,781.36 करोड़) का सबसे बड़ा स्रोत बना रहा। वर्ष 2024-25 के दौरान, राज्य की पूंजीगत प्राप्तियां विगत वर्ष के 60,314 करोड़ से बढ़कर 66,164.50 करोड़ हो गईं। राज्य की पूंजीगत प्राप्तियों में 49,549.32 करोड़ के आंतरिक ऋण का मुख्य योगदान (74.89 प्रतिशत) था।

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वर्ष 2020-21 से 2024-25 की अवधि के दौरान जीएसडीपी के प्रतिशत के रूप में पूंजीगत व्यय 3.21 प्रतिशत से बढ़कर 3.88 प्रतिशत हो गया। विगत वित्तीय वर्ष की तुलना में 2,074 करोड़ (5.68 प्रतिशत) की वृद्धि हुई। राज्य ने अपने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लिए कोई लाभांश नीति निर्धारित नहीं की है। वर्ष 2021-25 के दौरान सरकारी इक्विटी पर प्रतिफल निरंतर न्यून (0.002 प्रतिशत) बना रहा।

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वर्ष 2024-25 के दौरान, राज्य की कुल बकाया देनदारियों में विगत वर्ष की तुलना में 15.15 प्रतिशत की वृद्धि हुई । वर्ष 2024-25 के दौरान, राज्य सरकार ने 31,036.15 करोड़ की प्रत्याभूति दी, जो राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम में निर्धारित सीमाओं ( 25,256.75 करोड़) से अधिक थी।

वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान, राज्य के कुल बजट ( 3,64,518.87 करोड़) में से केवल 2,87,178.49 करोड़ (कुल बजट का 78.78 प्रतिशत) व्यय किया गया, जिससे 77,340.38 करोड़ की बचत हुई। कुल बचत में से 10,388.35 करोड़ (केवल 13.43 प्रतिशत) की राशि अभ्यर्पित की गई। यह अवास्तविक बजट अनुमानों तथा बजट और व्यय के बीच संरेखण की कमी का संकेत देता है। यद्यपि अनुपूरक बजट के माध्यम से बजट अनुमान में 28.81 प्रतिशत की वृद्धि की गई थी, लेकिन वित्त वर्ष 2024-25 में मूल बजट से केवल 1.48 प्रतिशत अधिक का ही व्यय हुआ।

वर्ष 2024-25 में, राज्य ने केंद्र प्रायोजित योजनाओं में आवश्यक केन्द्रांश से 441.29 करोड़ कम अंतरित किए। इसके अलावा, राज्य के राजकोष से संबंधित एसएनए में केन्द्रांश और राज्यांश को अंतरित करने में क्रमशः 167 दिनों और 246 दिनों तक की देरी हुई, जिससे राज्य के राजकोष पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ा।

वर्ष 2024-25 के दौरान, कुल 1,016.94 करोड़ के 2,038 सार आकस्मिक विपत्र आहरित किये गए, जिनमें 679.36 करोड़ (66.80 प्रतिशत) के 1,366 सार आकस्मिक विपत्र मार्च 2025 में आहरित किये गए थे। मार्च 2025 तक, 252 प्रशासकों के व्यक्तिगत जमा (पीडी) खाता में 2,659.57 करोड़ रुपये शेष था । 2024-25 के दौरान, 252 व्यक्तिगत जमा खातों के प्रशासकों में से केवल 16 ने अपने शेष का कोषागार अभिलेखों से समाशोधन एवं सत्यापन किया, जो कमजोर आंतरिक नियंत्रण का संकेत देता है। राज्य सरकार ने वर्ष 2024-25 तक 29,215.17 करोड़ की बजटीय सहायता (अंशपूंजी, ऋण, प्रत्याभूति, पूंजीगत अनुदान और अन्य) 34 कार्यशील/अकार्यशील एसपीएसई को प्रदान किया, जिनके लेखे के बकाया की अवधि एक से लेकर 48 वर्षों के बीच थी ।

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