Chhapra: भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्य, पूर्व राज्यसभा सांसद एवं देश की प्रतिष्ठित सुरक्षा कंपनी सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज (SIS) के संस्थापक रविन्द्र किशोर सिन्हा (आर.के. सिन्हा) के निधन पर छपरा शहर के ब्रजकिशोर किंडरगार्टन में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। सभा की अध्यक्षता ब्रजेन्द्र कुमार सिन्हा ने की।
इस अवसर पर वरिष्ठ समाजसेवी हरेश्वर प्रसाद सहित शहर के अनेक प्रबुद्ध शिक्षाविदों, पत्रकारों, अधिवक्ताओं, व्यवसायियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। उपस्थित लोगों ने उनके तैलचित्र पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व को याद किया।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में बृजेन्द्र कुमार सिन्हा ने कहा कि आर.के. सिन्हा आधुनिक युग के दानवीर थे। शायद ही कोई व्यक्ति उनके दरवाजे से अपनी जरूरत लेकर गया हो और कभी खाली हाथ लौटा हो। दूसरों की जरूरतों को पूरा करने तथा जरूरतमंदों की झोली भरने में उन्हें हमेशा खुशी मिलती थी। उनका जीवन उदारता, परोपकार और मानवीय संवेदनाओं का अनुपम उदाहरण था।
जगदम कॉलेज के प्राचार्य के.पी. श्रीवास्तव ने कहा कि आर.के. सिन्हा जी का जीवन संघर्ष, संकल्प, दूरदर्शिता और समाज के प्रति समर्पण की प्रेरणादायक गाथा है। उन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा के बल पर एक छोटे स्तर से शुरुआत कर सुरक्षा सेवा के क्षेत्र में एक विशाल संस्थान खड़ा किया तथा हजारों लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया।
पत्रकार विद्याभूषण श्रीवास्तव ने उनके राजनीतिक, सामाजिक एवं सार्वजनिक जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आर.के. सिन्हा बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का सदैव निर्वहन किया।
शिक्षाविद् सूर्य प्रकाश ने कहा कि आर.के. सिन्हा के योगदान की चर्चा करना सूर्य को दीपक दिखाने के समान होगा। समाज और देश के लिए उन्होंने जो कार्य किए, उन्हें कुछ शब्दों में समेटना संभव नहीं है।
रविशंकर श्रीवास्तव ने कहा कि आर.के. सिन्हा ने अपनी दूरदर्शिता और परिश्रम से बिहार को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
सौरभ श्रीवास्तव जी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि आर.के. सिन्हा जी के पदचिह्नों पर उनके पुत्र रितुराज सिन्हा भी आगे बढ़ रहे हैं। चित्रांश समाज को उनके परिवार से बिहार ही नहीं, बल्कि देशभर में बहुत अपेक्षाएं हैं। आशा है कि आने वाले समय में यह परिवार समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का इसी प्रकार निर्वहन करता रहेगा।
युवा चित्रांश सागर श्रीवास्तव जी ने भी अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि आर.के. सिन्हा का व्यक्तित्व नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनके आदर्शों और समाज के प्रति समर्पण से युवाओं को सीख लेनी चाहिए।
अभिजीत श्रीवास्तव ने आर.के. सिन्हा जी के साथ अपनी निजी हवाई यात्रा का संस्मरण साझा किया। उन्होंने बताया कि इतने बड़े उद्योगपति और राष्ट्रीय स्तर के व्यक्तित्व होने के बावजूद आर.के. सिन्हा जी कितने सीधे-सादे, सहज और सरल स्वभाव के थे। उनसे बातचीत करते समय कभी यह महसूस नहीं होता था कि सामने इतना बड़ा व्यक्तित्व बैठा है। उनका व्यवहार हमेशा आत्मीयता से भरा रहता था।
पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता राज सिन्हा ने भी अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा कि जब भी उनकी आर.के. सिन्हा से मुलाकात होती थी, वे हमेशा मुस्कुराते हुए मिलते थे। उनके व्यवहार में एक विशेष अपनापन और आत्मीयता झलकती थी, जिसे भुला पाना संभव नहीं है।
भूपेश नंदन एवं श्री सुबोध श्रीवास्तव ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए आर.के. सिन्हा के व्यक्तित्व, उनकी उदारता, सामाजिक सरोकारों एवं चित्रांश समाज के प्रति उनके योगदान को याद किया। दोनों वक्ताओं ने उनके जीवन को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
सभा में अंकुर श्रीवास्तव ने अपना व्यक्तिगत संस्मरण साझा करते हुए बताया कि वर्ष 2024 में जब उन्हें आर.के. सिन्हा से मिलने का अवसर मिला था, तब उन्होंने बड़े ही आत्मीय भाव से भोजपुरी में बातचीत की थी। उस मुलाकात में उन्होंने कहा था, “कभी भी कोई जरूरत हो तो बेझिझक मेरे पास आना, किसी भी वस्तु या काम के लिए चिंता करने की जरूरत नहीं है, मैं हूं ना।” अंकुर श्रीवास्तव ने कहा कि उनके ये आत्मीय शब्द आज भी स्मृतियों में जीवंत हैं। इतने बड़े व्यक्तित्व का आम लोगों के प्रति ऐसा अपनापन ही उन्हें सबसे अलग बनाता था।
वक्ताओं ने उनके बिहार प्रेम का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि आर.के. सिन्हा जी ने अपनी व्यावसायिक गतिविधियों और कॉरपोरेट कार्यालय को पटना से जोड़े रखा। इसके पीछे उनकी भावना थी कि उनके संस्थान की व्यावसायिक गतिविधियों का राजस्व बिहार सरकार को भी प्राप्त हो और बिहार की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिले। यह उनकी अपनी जन्मभूमि और बिहार के प्रति गहरे लगाव को दर्शाता है।
उल्लेखनीय है कि आर.के. सिन्हा ने वर्ष 1974 में सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज (SIS) की स्थापना की थी। उन्होंने अपने उद्यम के माध्यम से देश-विदेश में पहचान बनाने के साथ हजारों लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया। वे जनसंघ के समय से ही संगठन और राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े रहे तथा भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे। उन्होंने वर्ष 2014 से 2020 तक बिहार का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्यसभा सांसद के रूप में भी अपनी भूमिका निभाई।
भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्य, पूर्व राज्यसभा सांसद एवं देश की प्रतिष्ठित सुरक्षा कंपनी सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज (SIS) के संस्थापक रविन्द्र किशोर सिन्हा (आर.के. सिन्हा) के निधन पर छपरा शहर के ब्रजकिशोर किंडरगार्टन में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। सभा की अध्यक्षता ब्रजेन्द्र कुमार सिन्हा ने की।
इस अवसर पर वरिष्ठ समाजसेवी हरेश्वर प्रसाद सहित शहर के अनेक प्रबुद्ध शिक्षाविदों, पत्रकारों, अधिवक्ताओं, व्यवसायियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। उपस्थित लोगों ने उनके तैलचित्र पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व को याद किया।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में बृजेन्द्र कुमार सिन्हा ने कहा कि आर.के. सिन्हा आधुनिक युग के दानवीर थे। शायद ही कोई व्यक्ति उनके दरवाजे से अपनी जरूरत लेकर गया हो और कभी खाली हाथ लौटा हो। दूसरों की जरूरतों को पूरा करने तथा जरूरतमंदों की झोली भरने में उन्हें हमेशा खुशी मिलती थी। उनका जीवन उदारता, परोपकार और मानवीय संवेदनाओं का अनुपम उदाहरण था।
जगदम कॉलेज के प्राचार्य के.पी. श्रीवास्तव ने कहा कि आर.के. सिन्हा जी का जीवन संघर्ष, संकल्प, दूरदर्शिता और समाज के प्रति समर्पण की प्रेरणादायक गाथा है। उन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा के बल पर एक छोटे स्तर से शुरुआत कर सुरक्षा सेवा के क्षेत्र में एक विशाल संस्थान खड़ा किया तथा हजारों लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया।
पत्रकार विद्याभूषण श्रीवास्तव ने उनके राजनीतिक, सामाजिक एवं सार्वजनिक जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आर.के. सिन्हा बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का सदैव निर्वहन किया।
शिक्षाविद् सूर्य प्रकाश ने कहा कि आर.के. सिन्हा के योगदान की चर्चा करना सूर्य को दीपक दिखाने के समान होगा। समाज और देश के लिए उन्होंने जो कार्य किए, उन्हें कुछ शब्दों में समेटना संभव नहीं है।
रविशंकर श्रीवास्तव ने कहा कि आर.के. सिन्हा ने अपनी दूरदर्शिता और परिश्रम से बिहार को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
सौरभ श्रीवास्तव जी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि आर.के. सिन्हा जी के पदचिह्नों पर उनके पुत्र रितुराज सिन्हा भी आगे बढ़ रहे हैं। चित्रांश समाज को उनके परिवार से बिहार ही नहीं, बल्कि देशभर में बहुत अपेक्षाएं हैं। आशा है कि आने वाले समय में यह परिवार समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का इसी प्रकार निर्वहन करता रहेगा।
युवा चित्रांश सागर श्रीवास्तव जी ने भी अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि आर.के. सिन्हा का व्यक्तित्व नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनके आदर्शों और समाज के प्रति समर्पण से युवाओं को सीख लेनी चाहिए।
अभिजीत श्रीवास्तव ने आर.के. सिन्हा जी के साथ अपनी निजी हवाई यात्रा का संस्मरण साझा किया। उन्होंने बताया कि इतने बड़े उद्योगपति और राष्ट्रीय स्तर के व्यक्तित्व होने के बावजूद आर.के. सिन्हा जी कितने सीधे-सादे, सहज और सरल स्वभाव के थे। उनसे बातचीत करते समय कभी यह महसूस नहीं होता था कि सामने इतना बड़ा व्यक्तित्व बैठा है। उनका व्यवहार हमेशा आत्मीयता से भरा रहता था।
पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता राज सिन्हा ने भी अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा कि जब भी उनकी आर.के. सिन्हा से मुलाकात होती थी, वे हमेशा मुस्कुराते हुए मिलते थे। उनके व्यवहार में एक विशेष अपनापन और आत्मीयता झलकती थी, जिसे भुला पाना संभव नहीं है।
भूपेश नंदन एवं श्री सुबोध श्रीवास्तव ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए आर.के. सिन्हा के व्यक्तित्व, उनकी उदारता, सामाजिक सरोकारों एवं चित्रांश समाज के प्रति उनके योगदान को याद किया। दोनों वक्ताओं ने उनके जीवन को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
सभा में अंकुर श्रीवास्तव ने अपना व्यक्तिगत संस्मरण साझा करते हुए बताया कि वर्ष 2024 में जब उन्हें आर.के. सिन्हा से मिलने का अवसर मिला था, तब उन्होंने बड़े ही आत्मीय भाव से भोजपुरी में बातचीत की थी। उस मुलाकात में उन्होंने कहा था, “कभी भी कोई जरूरत हो तो बेझिझक मेरे पास आना, किसी भी वस्तु या काम के लिए चिंता करने की जरूरत नहीं है, मैं हूं ना।” अंकुर श्रीवास्तव ने कहा कि उनके ये आत्मीय शब्द आज भी स्मृतियों में जीवंत हैं। इतने बड़े व्यक्तित्व का आम लोगों के प्रति ऐसा अपनापन ही उन्हें सबसे अलग बनाता था।
वक्ताओं ने उनके बिहार प्रेम का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि आर.के. सिन्हा जी ने अपनी व्यावसायिक गतिविधियों और कॉरपोरेट कार्यालय को पटना से जोड़े रखा। इसके पीछे उनकी भावना थी कि उनके संस्थान की व्यावसायिक गतिविधियों का राजस्व बिहार सरकार को भी प्राप्त हो और बिहार की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिले। यह उनकी अपनी जन्मभूमि और बिहार के प्रति गहरे लगाव को दर्शाता है।
उल्लेखनीय है कि आर.के. सिन्हा ने वर्ष 1974 में सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज (SIS) की स्थापना की थी। उन्होंने अपने उद्यम के माध्यम से देश-विदेश में पहचान बनाने के साथ हजारों लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया। वे जनसंघ के समय से ही संगठन और राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े रहे तथा भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे। उन्होंने वर्ष 2014 से 2020 तक बिहार का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्यसभा सांसद के रूप में भी अपनी भूमिका निभाई।
Chhapra: भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्य, पूर्व राज्यसभा सांसद एवं देश की प्रतिष्ठित सुरक्षा कंपनी सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज (SIS) के संस्थापक रविन्द्र किशोर सिन्हा (आर.के. सिन्हा) के निधन पर छपरा शहर के ब्रजकिशोर किंडरगार्टन में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। सभा की अध्यक्षता ब्रजेन्द्र कुमार सिन्हा ने की।
इस अवसर पर वरिष्ठ समाजसेवी हरेश्वर प्रसाद सहित शहर के अनेक प्रबुद्ध शिक्षाविदों, पत्रकारों, अधिवक्ताओं, व्यवसायियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। उपस्थित लोगों ने उनके तैलचित्र पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व को याद किया।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में बृजेन्द्र कुमार सिन्हा ने कहा कि आर.के. सिन्हा आधुनिक युग के दानवीर थे। शायद ही कोई व्यक्ति उनके दरवाजे से अपनी जरूरत लेकर गया हो और कभी खाली हाथ लौटा हो। दूसरों की जरूरतों को पूरा करने तथा जरूरतमंदों की झोली भरने में उन्हें हमेशा खुशी मिलती थी। उनका जीवन उदारता, परोपकार और मानवीय संवेदनाओं का अनुपम उदाहरण था।
जगदम कॉलेज के प्राचार्य के.पी. श्रीवास्तव ने कहा कि आर.के. सिन्हा जी का जीवन संघर्ष, संकल्प, दूरदर्शिता और समाज के प्रति समर्पण की प्रेरणादायक गाथा है। उन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा के बल पर एक छोटे स्तर से शुरुआत कर सुरक्षा सेवा के क्षेत्र में एक विशाल संस्थान खड़ा किया तथा हजारों लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया।
पत्रकार विद्याभूषण श्रीवास्तव ने उनके राजनीतिक, सामाजिक एवं सार्वजनिक जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आर.के. सिन्हा बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का सदैव निर्वहन किया।
शिक्षाविद् सूर्य प्रकाश ने कहा कि आर.के. सिन्हा के योगदान की चर्चा करना सूर्य को दीपक दिखाने के समान होगा। समाज और देश के लिए उन्होंने जो कार्य किए, उन्हें कुछ शब्दों में समेटना संभव नहीं है।
रविशंकर श्रीवास्तव ने कहा कि आर.के. सिन्हा ने अपनी दूरदर्शिता और परिश्रम से बिहार को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
सौरभ श्रीवास्तव जी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि आर.के. सिन्हा जी के पदचिह्नों पर उनके पुत्र रितुराज सिन्हा भी आगे बढ़ रहे हैं। चित्रांश समाज को उनके परिवार से बिहार ही नहीं, बल्कि देशभर में बहुत अपेक्षाएं हैं। आशा है कि आने वाले समय में यह परिवार समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का इसी प्रकार निर्वहन करता रहेगा।
युवा चित्रांश सागर श्रीवास्तव जी ने भी अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि आर.के. सिन्हा का व्यक्तित्व नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनके आदर्शों और समाज के प्रति समर्पण से युवाओं को सीख लेनी चाहिए।
अभिजीत श्रीवास्तव ने आर.के. सिन्हा जी के साथ अपनी निजी हवाई यात्रा का संस्मरण साझा किया। उन्होंने बताया कि इतने बड़े उद्योगपति और राष्ट्रीय स्तर के व्यक्तित्व होने के बावजूद आर.के. सिन्हा जी कितने सीधे-सादे, सहज और सरल स्वभाव के थे। उनसे बातचीत करते समय कभी यह महसूस नहीं होता था कि सामने इतना बड़ा व्यक्तित्व बैठा है। उनका व्यवहार हमेशा आत्मीयता से भरा रहता था।
पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता राज सिन्हा ने भी अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा कि जब भी उनकी आर.के. सिन्हा से मुलाकात होती थी, वे हमेशा मुस्कुराते हुए मिलते थे। उनके व्यवहार में एक विशेष अपनापन और आत्मीयता झलकती थी, जिसे भुला पाना संभव नहीं है।
भूपेश नंदन एवं श्री सुबोध श्रीवास्तव ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए आर.के. सिन्हा के व्यक्तित्व, उनकी उदारता, सामाजिक सरोकारों एवं चित्रांश समाज के प्रति उनके योगदान को याद किया। दोनों वक्ताओं ने उनके जीवन को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
सभा में अंकुर श्रीवास्तव ने अपना व्यक्तिगत संस्मरण साझा करते हुए बताया कि वर्ष 2024 में जब उन्हें आर.के. सिन्हा से मिलने का अवसर मिला था, तब उन्होंने बड़े ही आत्मीय भाव से भोजपुरी में बातचीत की थी। उस मुलाकात में उन्होंने कहा था, “कभी भी कोई जरूरत हो तो बेझिझक मेरे पास आना, किसी भी वस्तु या काम के लिए चिंता करने की जरूरत नहीं है, मैं हूं ना।” अंकुर श्रीवास्तव ने कहा कि उनके ये आत्मीय शब्द आज भी स्मृतियों में जीवंत हैं। इतने बड़े व्यक्तित्व का आम लोगों के प्रति ऐसा अपनापन ही उन्हें सबसे अलग बनाता था।
वक्ताओं ने उनके बिहार प्रेम का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि आर.के. सिन्हा जी ने अपनी व्यावसायिक गतिविधियों और कॉरपोरेट कार्यालय को पटना से जोड़े रखा। इसके पीछे उनकी भावना थी कि उनके संस्थान की व्यावसायिक गतिविधियों का राजस्व बिहार सरकार को भी प्राप्त हो और बिहार की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिले। यह उनकी अपनी जन्मभूमि और बिहार के प्रति गहरे लगाव को दर्शाता है।
उल्लेखनीय है कि आर.के. सिन्हा ने वर्ष 1974 में सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज (SIS) की स्थापना की थी। उन्होंने अपने उद्यम के माध्यम से देश-विदेश में पहचान बनाने के साथ हजारों लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया। वे जनसंघ के समय से ही संगठन और राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े रहे तथा भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे। उन्होंने वर्ष 2014 से 2020 तक बिहार का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्यसभा सांसद के रूप में भी अपनी भूमिका निभाई।



















