Chhapra: शिक्षाविद्, भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य एवं सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के उम्मीदवार डॉ. राहुल राज ने बिहार सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा अधिसूचित बिहार राज्य शिक्षण स्थानांतरण नियमावली-2026 के क्रियान्वयन के लिए जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के कई प्रावधानों पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे शिक्षकों के हितों के विरुद्ध और अन्यायपूर्ण बताते हुए आवश्यक संशोधन की मांग की है।
विद्यालयों में शिक्षकों से संवाद के दौरान डॉ. राहुल राज ने कहा कि अधिसूचना के बिंदु 8(i) एवं 8(ii) में अधिशेष शिक्षक की परिभाषा परस्पर विरोधाभासी और भ्रम पैदा करने वाली है। उन्होंने कहा कि एक ओर पाँच वर्ष या उससे अधिक समय से किसी विद्यालय में कार्यरत शिक्षकों को अधिशेष मानने का प्रावधान किया गया है, वहीं दूसरी ओर पाँच वर्ष से कम अवधि वाले शिक्षकों में सबसे कम अवधि से पदस्थापित शिक्षक को अधिशेष घोषित करने की व्यवस्था की गई है। यह न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता के सिद्धांतों के विपरीत है, बल्कि न्यायसंगत भी नहीं है।
उन्होंने कहा कि किसी विद्यालय में वर्षों से कार्यरत शिक्षक स्वीकृत एवं रिक्त पदों पर विधिवत पदस्थापित किए गए हैं। यदि बाद में नई नियुक्तियों या पदस्थापन के कारण अधिशेष की स्थिति उत्पन्न होती है, तो उसका निर्धारण उसी आधार पर होना चाहिए। केवल पदस्थापना की अवधि के आधार पर लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों को अधिशेष घोषित करना उनके साथ अन्याय है।
डॉ. राहुल राज ने मांग की कि मॉडल स्कूलों के शिक्षकों तथा पुस्तकालयाध्यक्षों को भी स्थानांतरण के अधिकार के दायरे में शामिल किया जाए, ताकि सभी शिक्षकों को समान अवसर और न्याय मिल सके।
उन्होंने कहा कि इस गंभीर विषय को लेकर वे शिक्षा मंत्री एवं अपर मुख्य सचिव (एसीएस) से मिलकर नियमावली में आवश्यक संशोधन की मांग करेंगे। यदि सरकार शिक्षकों की न्यायोचित मांगों की अनदेखी करती है, तो शिक्षकों के अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
उन्होंने कहा कि यह केवल स्थानांतरण का मुद्दा नहीं, बल्कि हजारों शिक्षकों के भविष्य, सम्मान और पारिवारिक स्थिरता से जुड़ा विषय है। इसलिए सरकार को नियमावली में मौजूद विसंगतियों को दूर कर शिक्षकों के हित में संशोधन करना चाहिए।
इस मुद्दे पर सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र सहित बिहार के विभिन्न जिलों के शिक्षकों ने डॉ. राहुल राज के रुख का समर्थन किया। शिक्षकों का कहना है कि जब-जब उनके अधिकारों पर संकट आया, तब-तब डॉ. राहुल राज ने उनकी आवाज़ को सरकार तक पहुंचाने का कार्य किया है।
प्रमंडलीय नेता रजनीकांत सिंह सहित अन्य शिक्षक नेताओं ने कहा कि डॉ. राहुल राज लंबे समय से शिक्षक सम्मान, पुरानी पेंशन, सेवा सुरक्षा, वेतनमान, पदोन्नति तथा अन्य शैक्षणिक एवं सेवा संबंधी अधिकारों के लिए निरंतर संघर्ष करते रहे हैं। उनका संघर्ष व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पूरे शिक्षक समाज के अधिकारों और सम्मान की लड़ाई है।
डॉ. राहुल राज ने दोहराया कि स्थानांतरण प्रक्रिया में व्याप्त अन्याय समाप्त होने और शिक्षकों के हित में न्यायपूर्ण निर्णय होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि सत्य, न्याय और शिक्षक एकता की जीत निश्चित होगी।



















