नई दिल्ली, 22 जनवरी (हि.स.)। इस बार 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर देश की विविधता, संस्कृति और आत्मनिर्भरता की झलक दिखाने वाली कुल 30 झांकियां प्रस्तुत की जाएंगी। इनमें 17 झांकियां राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की तथा 13 झांकियां विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और सेवाओं की होंगी। झांकियों की व्यापक थीम स्वतंत्रता का मंत्र वंदे मातरम् और समृद्धि का मंत्र आत्मनिर्भर भारत रखी गई है।
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि झांकियों के माध्यम से राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने, आजादी के मूल विचारों और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में देश की तेज प्रगति को दर्शाया जाएगा। झांकियों में भारत की सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ आधुनिक विकास, तकनीकी नवाचार और सामाजिक बदलाव की तस्वीर भी दिखाई देगी।
रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शिव कुमार ने कहा कि गणतंत्र दिवस परेड की झांकियां केवल सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं हैं, बल्कि यह देश की सामूहिक सोच, आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ते कदम और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर झांकियों के माध्यम से आजादी के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।
मंत्रालय के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि झांकियों की विषयवस्तु इस तरह तैयार की गई है, जिससे भारत की समृद्ध विरासत के साथ-साथ आधुनिक विकास, तकनीकी नवाचार और सामाजिक परिवर्तन की झलक साफ दिखाई दे। आत्मनिर्भर भारत की सोच को हर झांकी में किसी न किसी रूप में दर्शाया गया है।
राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की झांकियों में असम की अशारिकांडी टेराकोटा शिल्प कला, छत्तीसगढ़ की झांकी में वंदे मातरम् के माध्यम से स्वतंत्रता की भावना, गुजरात की झांकी में स्वदेशी और आत्मनिर्भरता का संदेश, हिमाचल प्रदेश की देवभूमि और वीरभूमि की पहचान, तथा जम्मू-कश्मीर की झांकी में वहां के हस्तशिल्प और लोकनृत्य को दिखाया जाएगा। केरल की झांकी में वाटर मेट्रो और शत-प्रतिशत डिजिटल साक्षरता, महाराष्ट्र की झांकी में आत्मनिर्भरता के प्रतीक गणेशोत्सव, मणिपुर की झांकी में कृषि से अंतरराष्ट्रीय बाजार तक की यात्रा, नागालैंड की झांकी में हॉर्नबिल महोत्सव, और ओडिशा की झांकी में मिट्टी से सिलिकॉन तक के विकास को दर्शाया जाएगा।
पुडुचेरी की झांकी में शिल्प, संस्कृति और औरोविल की सोच, राजस्थान की झांकी में बीकानेर की उस्ता कला, तमिलनाडु की झांकी में आत्मनिर्भर भारत के तहत समृद्धि का मंत्र, उत्तर प्रदेश की झांकी में बुंदेलखंड की संस्कृति, पश्चिम बंगाल की झांकी में स्वतंत्रता आंदोलन में बंगाल की भूमिका, मध्य प्रदेश की झांकी में पुण्यश्लोक लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर का योगदान और पंजाब की झांकी में श्री गुरु तेगबहादुर साहिब जी के शहीदी के 350 वर्ष को प्रमुखता से दिखाया जाएगा।
मंत्रालयों और विभागों की झांकियों में वायुसेना की झांकी में युद्ध के माध्यम से राष्ट्र निर्माण, नौसेना की झांकी में समुद्र से समृद्धि का संदेश और रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत त्रि-सेवा झांकी में संयुक्तता के माध्यम से विजय को प्रदर्शित किया जाएगा। संस्कृति मंत्रालय की झांकी में वंदे मातरम् को राष्ट्र की आत्मा की पुकार के रूप में दिखाया जाएगा।
स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग की झांकी में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के जरिए भारतीय स्कूली शिक्षा में आए बदलाव, आयुष मंत्रालय की झांकी में आयुष का तंत्र और स्वास्थ्य का मंत्र, गृह मंत्रालय की झांकियों में भुज भूकंप के 25 वर्ष पूरे होने पर आपदा प्रबंधन की मजबूती और नए आपराधिक कानूनों के तहत जन-केंद्रित न्याय प्रणाली को दर्शाया जाएगा। इसके अलावा आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय की झांकी में वंदे मातरम् के 150 वर्ष, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की झांकी में भारत गाथा, पंचायती राज मंत्रालय की झांकी में स्वामित्व योजना, विद्युत मंत्रालय की झांकी में प्रकाश गंगा और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की झांकी में कौशल आधारित आत्मनिर्भर तथा विकसित भारत की झलक दिखाई जाएगी।








