Chhapra: शहर के अत्यंत व्यस्ततम हथुआ मार्केट में बुधवार को दुकानों में लगी आग की घटना ने फायर सेफ्टी प्रबंधन की पोल खोल दी। संकरी गलियों और अतिक्रमण के कारण अग्निशमन विभाग की गाड़ी बाजार के अंदर प्रवेश नहीं कर सकी। मजबूरन अग्निशमन दल के जवानों को मुख्य मार्ग से ही पाइप बिछाकर आग पर काबू पाने का प्रयास करना पड़ा।
200 से अधिक दुकानों में नहीं समुचित व्यवस्था
करीब 200 से अधिक दुकानों वाले इस बाजार में फायर सेफ्टी के बुनियादी इंतजामों का अभाव बताया जा रहा है। अधिकांश प्रतिष्ठानों में अग्निशामक यंत्र, फायर अलार्म, आपातकालीन निकास मार्ग और हाइड्रेंट जैसी सुविधाएं नहीं हैं। ज्वलनशील सामग्री और सिलेंडर के उपयोग के बावजूद सुरक्षा मानकों की अनदेखी गंभीर चिंता का विषय है।
अतिक्रमण बनी बाधा
बाजार की गलियां अत्यंत संकरी हैं। कई स्थानों पर अस्थायी ढांचे, बढ़े हुए शेड और अवैध अतिक्रमण के कारण रास्ता और भी संकरा हो गया है। बुधवार की घटना के दौरान यही स्थिति अग्निशमन वाहनों के लिए सबसे बड़ी बाधा बनी। स्थानीय लोगों के अनुसार, यदि आग फैलती तो बड़ा हादसा हो सकता था।
विभागीय स्वीकृति पर प्रश्न
स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों का सवाल है कि जब छोटे प्रतिष्ठानों से फायर एनओसी और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाता है, तो इतने बड़े बाजार में बिना पर्याप्त फायर सेफ्टी प्रबंधन के संचालन की अनुमति कैसे दी गई है। क्या नियमित फायर ऑडिट और निरीक्षण किए गए? यदि किए गए, तो कमियों को दूर कराने के लिए क्या कदम उठाए गए?
नगर निगम की जिम्मेदारी
नगर निगम की जिम्मेदारी बाजार क्षेत्रों में अतिक्रमण हटाने, फायर लेन सुनिश्चित करने और सुरक्षा मानकों के पालन की निगरानी करने की है। लोगों का कहना है कि समय-समय पर अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।
बड़ी दुर्घटना की आशंका
बुधवार की घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि वर्तमान व्यवस्था किसी बड़े हादसे को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में गंभीर जान-माल की क्षति से इनकार नहीं किया जा सकता।








