नई दिल्ली, 22 जनवरी (हि.स.)। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की झांकी “भारत गाथा: श्रुति, कृति, दृष्टि” में देश की कहानी कहने की हजारों साल पुरानी परंपरा से लेकर आज के आधुनिक मीडिया और डिजिटल युग तक की यात्रा की झलक देखी जा सकती है। यह झांकी आत्मनिर्भर भारत की भावना को दिखाती है, जहां सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक तकनीक का सुंदर मेल नजर आता है।
राष्ट्रीय रंगशाला शिविर में रक्षा मंत्रालय की तरफ से गुरुवार को आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान मीडियाकर्मियों के समक्ष विभिन्न मंत्रालयों की झलक प्रस्तुत की गई। राज्यों एवं मंत्रालयों की झांकी कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड के दौरान देखी जा सकती है। इसके साथ संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित भारत पर्व के आयोजन के दौरान 26 से 31 जनवरी तक दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले में भी देखी जा सकती है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की झांकी के तीन मुख्य हिस्से हैं।
पहली
श्रुति है जिसमें भारत की मौखिक परंपरा को दर्शाया गया है। इसमें पीपल के पेड़ के नीचे गुरु-शिष्य परंपरा दिखाई गई है। साथ ही “ॐ” की ध्वनि तरंगों के माध्यम से ज्ञान की शुरुआत और उसकी गूंज को दर्शाया गया है।
दूसरी
कृति है जिसमें लिखित परंपरा के विकास को दिखाया गया है। इसमें भगवान गणेश द्वारा महाभारत लिखते हुए प्राचीन पांडुलिपियां, लोक कला, नृत्य-संगीत और शुरुआती संचार माध्यमों को दिखाया गया है, जिन्होंने भारत की बौद्धिक विरासत को आकार दिया।
तीसरी
दृष्टि है जो देश की मीडिया के विकास को दर्शाता है, जिसमें प्रिंट मीडिया, सिनेमा, टेलीविजन और डिजिटल प्लेटफॉर्म शामिल हैं। कैमरे, फिल्म रील, उपग्रह, अखबार और बॉक्स ऑफिस जैसे प्रतीकों के जरिए भारत के कलाकारों और फिल्मकारों के योगदान को सम्मान दिया गया है। साथ ही एआई, एवीजीसी-एक्सआर और वर्चुअल प्रोडक्शन जैसी नई तकनीकों से भविष्य की कहानी कहने की झलक भी दिखाई गई है।
झांकी में कलाकारों की प्रस्तुति इसे जीवंत बनाती है। इसे वेव्स 2025 से भी जोड़ा गया है, जिसे “ऑरेंज इकोनॉमी की शुरुआत” के रूप में देखा जा रहा है।
यह झांकी भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और डिजिटल भविष्य को एक साथ जोड़ते हुए देश की रचनात्मक ताकत को दर्शाती है।








