Breaking News

मकर संक्रांति 14 या 15 जनवरी कब है? जानिए तारीख, पुण्यकाल और पूजा विधि

4 Min Read

मकर संक्रांति हिंदू धर्म के सबसे प्रमुख और शुभ पर्वों में से एक है। इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे देवताओं के दिन की शुरुआत भी माना जाता है। हर साल की तरह 2026 में भी लोगों के मन में यह सवाल बना हुआ है कि मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाएगी या 15 जनवरी को। पंचांग और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस बार की स्थिति बिल्कुल साफ है और पूजा-पाठ का सही समय भी तय है।

मकर संक्रांति 2026 की सही तारीख क्या है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जिस क्षण सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं, उसके बाद का समय अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इस दौरान स्नान, दान, पूजा और सूर्य उपासना करने से विशेष फल मिलता है। यही कारण है कि मकर संक्रांति केवल पर्व नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शुद्धि और दान-पुण्य का दिन भी मानी जाती है। पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में मकर संक्रांति बुधवार 15 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी।

सूर्य धनु राशि में मकर राशि में गोचर कब करेगे

पंचांग के अनुसार सूर्य मकर राशि में गोचर 14 जनवरी 2026 दिन बुधवार की रात्रि 09 :11 करेगे

शास्त्रोत नियम

जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में गोचर करते है उसे मकर सक्रांति कहा जाता है इस दिन सूर्य अपना अयन का बदलाव करते है यानि 14 जनवरी 2026 की रात्रि 09:11 मिनट पर सूर्य दक्षिणायन से उतरायण में प्रवेश करेगे मकर संक्रांति का शास्त्रोक्त नियम है प्रदोष के बाद रात्रि में किसी समय संक्रांति लगती है उसका पुण्य काल दुसरे दिन होता है इस प्रकार मकर संक्रांति का त्योहार 15 जनवरी 2026 दिन गुरुवार को मनाया जायेगा. पुण्यकाल: 06:42 सुबह से बजे से संध्या 05:10 बजे तक है।

शास्त्रों के अनुसार संक्रांति के समय से अगले 40 घटी (लगभग 16 घंटे) बेहद शुभ माने जाते हैं। इसी समय के दौरान स्नान, सूर्य को अर्घ्य, दान, श्राद्ध और व्रत का पारण करना उत्तम माना गया है। ध्यान रहे कि सभी धार्मिक कार्य दिन के उजाले में ही करने चाहिए।

मकर संक्रांति पर क्या करें?

मकर संक्रांति के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना सबसे शुभ माना जाता है। यदि गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान संभव न हो, तो नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाया जा सकता है। स्नान के बाद साफ वस्त्र पहनें और रोली व चावल का तिलक लगाएं।

पूजा के लिए तांबे के लोटे में पानी भरें और उसमें रोली, फूल, गुड़ और काले तिल डालें। पूर्व दिशा की ओर मुख करके उगते सूर्य को जल अर्पित करें। इस दौरान “ॐ सूर्याय नमः” या “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करें। पूजा करते समय सिर ढका रखें और दिनभर तामसिक भोजन से बचें।

मकर संक्रांति पर दान और खिचड़ी का महत्व

मकर संक्रांति पर दान का विशेष महत्व होता है। तिल, गुड़, अनाज, कपड़े और खिचड़ी का दान करना बहुत शुभ माना जाता है। इसी कारण कई जगहों पर इस पर्व को खिचड़ी पर्व
भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन दान करने से पुण्य कई गुना बढ़ जाता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा
ज्योतिष , वास्तु एवं रत्न विशेषज्ञ 8080426594/9545290847

हमारे सोशल मीडिया अकाउंट को फॉलो करें -

Share This Article