Chhapra: सारण जिले में शिक्षकों के वेतन भुगतान एवं सत्यापन की जांच विभागीय निर्देश में की जा रही है।
जांच के क्रम में नियोजित शिक्षकों के वेतन भुगतान से संबंधित अभिलेखों की जांच के दौरान नगरा प्रखंड अंतर्गत प्रथम दृष्टया फर्जी व्यक्तियों को शिक्षक के रूप में वेतन विपत्र में अंकित कर वेतन भुगतान किए जाने का मामला प्रकाश में आया है।
जिला सूचना जनसम्पर्क कार्यालय से जारी जानकारी के अनुसार उक्त मामले की जांच में लगभग 8 लाख 84 हजार 242 रुपये के अवैध वेतन भुगतान का मामला सामने आया है। इस संबंध में जिला पदाधिकारी, सारण, के निर्देश के आलोक में सात नामजद अभियुक्तों एवं अन्य के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। साथ ही, राजीव कुमार, प्रखंड लेखापाल-सह-डाटा एंट्री ऑपरेटर को हिरासत में लिया गया है।
जिला शिक्षा पदाधिकारी, सारण के स्थापना शाखा से संबंधित शिक्षकों के वेतन भुगतान के सत्यापन के क्रम में सरकारी राशि की अनधिकृत निकासी, धोखाधड़ी तथा आपराधिक साजिश से संबंधित गंभीर अनियमितताएँ सामने आई हैं। इस संबंध में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, स्थापना, सारण द्वारा थानाध्यक्ष, खैरा को पत्र भेजकर सुसंगत धाराओं के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज कर आवश्यक कानूनी एवं दंडात्मक कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है।
प्राप्त पत्र के अनुसार, प्रखंड लेखापाल-सह-डाटा एंट्री ऑपरेटर, नगरा प्रखंड, सारण द्वारा शिक्षकों के वेतन विपत्रों की तैयारी एवं भुगतान की प्रक्रिया में अनियमितता किए जाने का मामला सामने आया है। जांच में पाया गया कि कुछ शिक्षकों के नाम, UAN संख्या एवं बैंक खाता विवरण का कथित रूप से अनुचित उपयोग कर वेतन एवं अन्य मदों में सरकारी राशि का अंतरण कराया गया।
जांच के क्रम में आलोक प्रसाद के बैंक खाते में जनवरी 2025 से अक्टूबर 2026 के बीच कुल 5,77,869.50 रुपये की राशि के अंतरण का विवरण सामने आया। इसी प्रकार सौरभ कुमार के बैंक खाते में कुल 1,04,958 रुपये तथा मनोरमा कुमारी के बैंक खाते में कुल 2,01,415 रुपये की राशि के अंतरण का उल्लेख किया गया है। पत्र में संबंधित शिक्षकों के नाम, UAN एवं बैंक खातों के विवरण में विसंगतियों तथा वेतन विपत्र तैयार करने में अनियमितताओं की ओर भी संकेत किया गया है।
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, स्थापना द्वारा उपलब्ध बैंक स्टेटमेंट, वेतन विपत्र एवं UAN अभिलेखों के आधार पर की गई जांच के आलोक में संबंधित कर्मियों एवं अन्य संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है। पत्र में कुल 8,84,242.50 रुपये की सरकारी राशि के गबन का उल्लेख करते हुए प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई अपेक्षित बताई गई है।



















