इतिहास के पन्नों मेंः 07 मई, गुरुदेव रविन्द्र नाथ टैगोर की जयंती

इतिहास के पन्नों मेंः 07 मई, गुरुदेव रविन्द्र नाथ टैगोर की जयंती

धरती पर गुरुदेवः विश्वविख्यात कवि, साहित्यकार, दार्शनिक और नोबल पुरस्कार विजेता रविन्द्रनाथ ठाकुर का 07 मई 1861 को जन्म हुआ। लोगों के दिलों में वे गुरुदेव के नाम से प्रतिष्ठित हैं। बांग्ला साहित्य के जरिये भारतीय सांस्कृतिक चेतना में नयी जान फूंकने वाले रविंद्रनाथ ठाकुर एशिया में नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले व्यक्ति हैं। साथ ही वे पहले गैर यूरोपीय थे, जिन्हें साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला। उनकी काव्य रचना ‘गीतांजलि’ के लिए उन्हें 1913 में यह सम्मान मिला। हालांकि गुरुदेव ने इसे सीधे स्वीकार नहीं किया। उनकी ओर से ब्रिटेन के एक राजदूत ने पुरस्कार लेकर उन्हें दिया। ब्रिटिश हुकूमत ने उन्हें ‘सर’ की उपाधि से भी नवाजा, जिसे उन्होंने 1919 के जलियांवाला बाग के बर्बर कांड से आहत होकर वापस कर दिया। उन्हें यह उपाधि लेने के लिए ब्रिटिश सरकार की तरफ से मान-मनौव्वल की कोशिश भी की गयी लेकिन वे राजी नहीं हुए। स्वामी विवेकानंद के बाद वह दूसरे व्यक्ति थे, जिन्होंने विश्व धर्म संसद को दो बार संबोधित किया। गुरुदेव ने 1901 में पश्चिम बंगाल के ग्रामीण क्षेत्र में शांति निकेतन के नाम से एक प्रायोगिक विद्यालय की स्थापना की। इसके साथ ही उनकी दो रचनाएं आगे चलकर दो देशों का राष्ट्रगान बनीं- भारत का राष्ट्रगान- `जन गण मन’ और बांग्लादेश का राष्ट्रगान- `आमार सोनार बांग्ला।’
अन्य अहम घटनाएंः
1663ः लंदन में प्रसिद्ध नाटककार थॉमस किलिग्रू द्वारा निर्मित रॉयल थियेटर की शुरुआत।
1912ः कोलंबिया विश्वविद्यालय ने विभिन्न श्रेणियों ने पुलित्जर पुरस्कार की योजना को मंजूरी दी। इसकी स्थापना जोसेफ पुलित्जर ने की थी।
1928ः ब्रिटेन ने महिलाओं की वोट देने की आयु 30 वर्ष से घटनाकर 21 वर्ष कर दी।
1973ः ईटानगर को अरुणाचल प्रदेश की नयी राजधानी बनाने का काम शुरू किया गया।
1976ः एलेक्जेंडर ग्राहम बेल को अपने आविष्कार का पेटेंट मिला जिसे उन्होंने ‘टेलीफोन’ नाम दिया।

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