इतिहास के पन्नों में: 20 जनवरी

इतिहास के पन्नों में: 20 जनवरी

…बस यही गठरी तो बची है, इसे भी दे दूंः देश का विभाजन हुए करीब 22 साल गुजर चुके थे। 1969 में भारत सरकार के आग्रह पर खान अब्दुल गफ्फार खान, इलाज के लिए पाकिस्तान से भारत आए।

भव्य व्यक्तित्व के मालिक रहे खान अब्दुल गफ्फार खान इस बार बिल्कुल टूटे, मायूस और हताश जान पड़ते थे। उनकी आगवानी के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण स्वयं हवाई अड्डे पर मौजूद थे।

हवाई जहाज से बाहर निकले खान अब्दुल गफ्फार खान के हाथों में सामान के नाम पर उनके जरूरत के कपड़ों की एक गठरी भर थी। इंदिरा गांधी ने उनकी गठरी की तरफ हाथ बढ़ाकर कहा कि ‘इसे हमें दे दीजिये, हम लेकर चलते हैं।’ खान साहब ने मायूसी भरे अंदाज में जवाब दिया- ‘यही तो बचा है, इसे भी ले लोगी।’ जेपी और इंदिरा, दोनों ने नजरें झुका लीं। जेपी खुद को संभाल नहीं पाए और उनकी आंखों से बेसाख्ता आंसू निकल पड़े।

सीमांत गांधी/ बाचा खान/ बादशाह खान/ फ्रंटियर गांधी जैसे नामों से लोकप्रिय गांधीवादी नेता खान अब्दुल गफ्फार खान, भारत के बंटवारे के खिलाफ थे। बंटवारे के बाद जब बलूचिस्तान पाकिस्तान का हिस्सा बना तो उन्हें पाकिस्तान में रहना पड़ा। जहां उन्होंने आजीवन अलग पख्तूनिस्तान मूवमेंट चलाया। अंग्रेजी शासनकाल में पश्तून मूवमेंट से चर्चाओं में आए खान अब्दुल गफ्फार खान महात्मा गांधी से प्रभावित होकर आजीवन अहिंसक आंदोलनों के जरिये अपने लक्ष्य की प्राप्ति को रास्ता बनाया।

भारत की आजादी के आंदोलन से लेकर पेशावर में नजरबंदी में 20 जनवरी 1988 को दुनिया को अलविदा कहने तक 98 वर्षीय खान अब्दुल गफ्फार खान ने 35 साल जेल में बिताए थे। पहले वे अंग्रेजी हुकूमत से लोहा लेते रहे और देश के बंटवारे के बाद पाकिस्तानी हुक्मरानों से।

6 फरवरी 1890 को बलूचिस्तान में पैदा होने वाले खान अब्दुल गफ्फार खान एक महान नेता थे। 1987 में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

भारत के बंटवारे से हरगिज सहमत नहीं होने वाले खान अब्दुल गफ्फार खान ने अपने भारत दौरे में शिकायत भरे लहजे में कहा था, ‘भारत ने उन्हें भेड़ियों के सामने डाल दिया है। भारत से जो आकांक्षा थी, वह पूरी नहीं हुई। भारत को इस बात पर बार-बार विचार करना चाहिये।’

अन्य अहम घटनाएंः

1817ः कलकत्ता में हिंदू कॉलेज की स्थापना।
1927ः जानी-मानी लेखिका कुर्रतुल एन हैदर का जन्म।
1945ः भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का जन्म।
1951ः जाने-माने स्वतंत्रता सेनानी और गांधीवादी नेता ठक्कर बापा का निधन।
1993ः परमवीर चक्र से सम्मानित प्रथम जीवित भारतीय सैनिक लांसनायक करम सिंह का निधन।
2005ः भारतीय अभिनेत्री परवीन बॉबी का निधन।

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