अभिभावक अपनी अपेक्षाएं बच्चों पर न थोपे : पीएम मोदी

अभिभावक अपनी अपेक्षाएं बच्चों पर न थोपे : पीएम मोदी

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को रेडियो पर ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 20वां प्रसारण के ज़रिए अलग अलग मुद्दों पर अपने विचार प्रस्तुत किए. मोदी ने गर्मी और सूखे पर बात की. उन्होंने उत्तराखंड के जंगलों में लगी भीषण आग और कई राज्य में सूखे की स्थिति पर चर्चा की.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि पिछले दिनों परीक्षाओं के परिणाम आए हैं. जो सफल हुए हैं, उनको मेरी शुभकामना, बधाई! जो सफल नहीं हो पाए, उनको मैं कहना चाहूंगा कि ज़िंदगी में करने के लिए बहुत-कुछ होता है. अगर हमारी इच्छा के मुताबिक परिणाम नहीं आया है, तो कोई ज़िंदगी अटक नहीं जाती है. विश्वास से जीना चाहिए, विश्वास से आगे बढ़ना चाहिए.
 
मैं आकाशवाणी का आभारी हूं कि उन्होंने इस ‘मन की बात’ को शाम को 8.00 बजे प्रादेशिक भाषाओं में प्रस्तुत करने का सफल प्रयास किया है. खुशी है, जो लोग मुझे सुनते हैं, बाद में पत्र, टेलीफोन,  MyGov website, Narendra Modi App के द्वारा अपनी भावनाओं को मेरे तक पहुंचाते हैं. बहुत सी आपकी बातें मुझे सरकार के काम में मदद करती हैं.

प्रधानमंत्री ने कहा कि 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस है, इस बार संयुक्त राष्ट्र ने जीरो टॉलरेंस फॉर इलीगल वाइल्डलाइफ ट्रेड विषय रखा है. पिछले दिनों उत्तराखण्ड, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, हिमालय की गोद में, जंगलों में आग लगी. आग का मूल कारण ये ही था कि सूखे पत्ते और कहीं थोड़ी सी भी लापरवाही बरती जाए, तो बहुत बड़ी आग में फैल जाती है. इसलिए जंगलों को बचाना, पानी को बचाना ये हम सबका दायित्व बन जाता है.

11 राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ सूखे की स्थिति पर विस्तार से बातचीत करने का अवसर मिला, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा. मैंने हर राज्य के साथ अलग मीटिंग की. सूखे की स्थिति से निपटने के लिए कई राज्यों ने बहुत ही उत्तम प्रयास किए हैं. इस समस्या की, लम्बी अवधि की परिस्थिति से, निपटने के लिए परमानेंट सल्यूशन क्या हों.

उन्होंने कहा कि पानी परमात्मा का प्रसाद है. एक बूंद भी बर्बाद हो, तो हमें पीड़ा होनी चाहिए. खुशी की बात कई राज्यों में हमारे गन्ने के किसान भी माइक्रो इर्रिगेशन, ड्रिप इर्रिगेशन, स्प्रिंकलर का उपयोग कर रहे हैं. इलेक्ट्रानिक टेक्नोलॉजी की शुरुआत थोड़ी कठिन लगेगी, लेकिन एक बार आदत लगेगी, तो ये व्यवस्था सरल हो जाएगी. जेब से रुपये निकालने और गिनने की जरूरत नहीं साथ ले करके घूमने की जरुरत ही नहीं है.

आपके मोबाइल फोन के द्वारा money transaction करना बहुत ही आसान हो जाएगा। इन व्यवस्थाओं का अगर हम उपयोग करना सीख लेंगे और आदत डालेंगे, तो फिर हमें ये करेंसी की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। पोस्ट ऑफिस को भी बैंकिंग सेवाओं के लिए सजग कर दिया गया है। देश में क़रीब-क़रीब सवा-लाख बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट के रूप में नौजवानों को भर्ती किया गया है। काले धन का तो प्रभाव ही कम होता जाएगा, तो मैं देशवासियों से आग्रह करता हूं कि हम शुरू तो करें।

ओलंपिक के खेल आते हैं, हम सर पटक के बैठते हैं. हम मेडल टैली में कितना पीछे रह गए. ये बात सही है कि खेल-कूद में हमारे सामने चुनौतियां बहुत हैं, लेकिन देश में एक माहौल बनना चाहिए. मैं खेल मंत्री सर्बनंद सोनेवाल जी की जरूर तारीफ करूंगा. उनका एक काम मन को छू गया, असम में चुनावी व्यस्तता के बावजूत भी वो NIS, पटियाला पहुंच गए. सभी को आश्चर्यचकित कर दिया, खिलाड़ियों के कैम्प अचानक पहुंच गए. खिलाड़ियों से विस्तार से बातचीत की, मैनेजमेंट से बात की, ट्रेनर से बात की, सब खिलाड़ियों के साथ खाना भी खाया. हमें चाहिए कि हम खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करें. जब खिलाड़ी को लगता है कि सवा-सौ करोड़ देशवासी साथ खड़े हैं, तो उनका हौसला बुलंद हो जाता है. रियो ओलंपिक के लिए सभी खिलाड़ियों के प्रति हम लोग उमंग और उत्साह का माहौल बनाएं. कोई गीत लिखे, कोई कार्टून बनाए, कोई शुभकामना संदेश दे, कोई किसी गेम को प्रोत्साहित करे. क्रिकेट और भारत का लगाव तो हम जानते हैं, लेकिन मैंने देखा फुटबॉल में भी इतना लगा. ये बड़ा ही सुखद भविष्य का संकेत है.

स्पोर्ट्समैन स्पिरिट के साथ भारत दुनिया में अपनी पहचान बनाए. खेल है, जीत भी होती है, हार भी होती है, मेडल आते भी हैं, नहीं भी आते हैं, लेकिन हौसला बुलंद होना चाहिए.

बता दें कि पीएम मोदी ने ट्वीट करते हुए हमेशा की तरह इस बार भी अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के लिए सुझाव मांगे थे.  बता दें कि पिछले ‘मन की बात’ में मोदी ने गंगा की सफाई के विषय में बात की थी.

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