पद्म पुरस्कार विजेताओं के प्रेरक जीवन विस्तार से जानें और साझा करें: प्रधानमंत्री

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में लोगों से अनुरोध किया कि वे इस बार के पद्म पुरस्कार विजेताओं के प्रेरक जीवन के बारे में विस्तार से जानें और इस जानकारी को दूसरों के साथ भी साझा करें।

प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ के 97वें संस्करण में कहा कि जनजातीय समुदायों में काम करने वाले, उनसे जुड़ी चीज़ों के संरक्षण और शोध करने वाले, पारंपरिक वाद्य यंत्र की धुन बिखेरने वाले और नॉर्थ-ईस्ट में अपनी संस्कृति के संरक्षण में लगे लोगों को इस बार प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। हम सबको इस पर गर्व होना चाहिए।

उदाहण देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि संतूर, बम्हुम, द्वितारा जैसे हमारे पारंपरिक वाद्ययंत्र की धुन बिखेरने में महारतगुलाम मोहम्मद ज़ाज़, मोआ सु-पोंग, री-सिंहबोर कुरका-लांग, मुनि-वेंकटप्पा और मंगल कांति राय की चारों तरफ़ चर्चा हो रही है। टोटो, हो, कुइ, कुवी और मांडा जैसी जनजातीय भाषाओं पर काम करने वाले कई महानुभावों को पद्म पुरस्कार मिले हैं। धानीराम टोटो, जानुम सिंह सोय और बी. रामकृष्ण रेड्डी के नाम से अब पूरा देश परिचित हो गया है। सिद्धी, जारवा और ओंगे जैसी आदि-जनजाति के साथ काम करने वाले लोगों को भी इस बार सम्मानित किया गया है। जैसे – हीराबाई लोबी, रतन चंद्र कार और ईश्वर चंद्र वर्मा जी। कांकेर में लकड़ी पर नक्काशी करने वाले अजय कुमार मंडावी और गढ़चिरौली के प्रसिद्ध झाडीपट्टी रंगभूमि से जुड़े परशुराम कोमाजी खुणे को भी ये सम्मान मिला है। इसी प्रकार नॉर्थ-ईस्ट में अपनी संस्कृति के संरक्षण में जुटे रामकुईवांगचे निउमे, बिक्रम बहादुर जमातिया और करमा वांगचु को भी सम्मानित किया गया है।

लोकतंत्र की जननी है भारत-

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को लोकतंत्र की जननी बताया और कहा कि भारतीय समाज स्वभाव से ही एक लोकतांत्रिक समाज है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और हम भारतीयों को इस बात का गर्व भी है कि हमारा देश लोकतंत्र की जननी है। स्वभाव से ही हम एक लोकतांत्रिक समाज है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर ने बौद्ध भिक्षु संघ की तुलना भारतीय संसद से की थी। उन्होंने उसे एक ऐसी संस्था बताया था, जहां के प्रस्ताव, संकल्प, कोरम, मतदान और वोटों की गिनती के लिए कई नियम थे। बाबासाहेब का मानना था कि भगवान बुद्ध को इसकी प्रेरणा उस समय की राजनीतिक व्यवस्थाओं से मिली होगी। तमिलनाडु में एक छोटा, लेकिन चर्चित गांव है उतिरमेसर, यहां ग्यारह-बारह सौ साल पहले का एक शिलालेख दुनियाभर को अचंभित करता है। यह शिलालेख एक छोटा संविधान की तरह है। इसमें विस्तार से बताया गया है कि ग्राम सभा का संचालन कैसे होना चाहिए और उसके सदस्यों के चयन की प्रक्रिया क्या हो। हमारे देश के इतिहास में लोकतांत्रिक मूल्यों का एक और उदाहरण है 12वीं सदी के भगवान बसवेश्वर का अनुभव मंडपम, यहां मुक्त चर्चा और विमर्श को प्रोत्साहन दिया जाता था। आपको यह जानकार हैरानी होगी कि यह राजा जॉन द्वारा दिए गए राजनीतिक अधिकारों के रॉयल चार्टर (माग्ना कार्टा) से भी पहले की बात है।

मोटा आनाज बन रहा लोगों के जीवन का हिस्सा-

प्रधानमंत्री ने कहा कि योग और सेहत के साथ अब ‘मोटा अनाज’ भी लोगों के जीवन का हिस्सा बन रहा है और लोग इसे अपना प्रमुख आहार बना रहे हैं। प्रधानमंत्री ने इस दौरान नौकरी छोड़ मोटा अनाज की प्रसंस्करण इकाई बनाने वाले आंध्र प्रदेश के के.वी. रामा सुब्बा रेड्डी, किसानों को मोटा अनाज से जुड़ी स्मार्ट कृषि की प्रशिक्षण देने वाली महाराष्ट्र में अलीबाग के पास केनाड गांव की रहने वाली शर्मीला ओसवाल का उदाहरण दिया। उन्होंने इनके लिए ‘मिलेटप्रेन्योर’ शब्द का प्रयोग किया और कहा कि आदिवासी जिले सुंदरगढ़ की करीब डेढ़ हजार महिलाएं स्वयं सहायता समूह से रसगुल्ला, गुलाब जामुन और केक तक बना रही हैं। कर्नाटक के कलबुर्गी में अलंद भूताई मिलेट्स फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी मोटा अनाज से खाकरा, बिस्कुट और लड्डू बना रही हैं। यह लोगों को बहुत पसंद आ रहे हैं।

खेलों को लेकर जम्मू-कश्मीर के युवाओं में खासा उत्साह-

हाल ही में आयोजित विंटर गेम्स का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि खेलों को लेकर जम्मू-कश्मीर के युवाओं में खासा उत्साह है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि अगली बार जब आप कश्मीर की यात्रा की योजना बनाएं तो इन तरह के आयोजनों को देखने के लिए भी समय निकालें।उन्होंने बताया कि कश्मीर के सय्यदाबाद में विंटर गेम्स आयोजित किए गए। इन खेलों का स्नो क्रिकेट विशेष आकर्षण रहा। इसके जरिए कश्मीर में ऐसे युवा खिलाड़ियों की तलाश भी होती है, जो आगे चलकर टीम इंडिया के तौर पर खेलेंगे। ये भी एक तरह से खेलो इंडिया मूवमेंट का ही विस्तार है।

गोवा में दिव्यांगजनों के लिए हुए एक अनोखे ‘पर्पल फेस्ट’

प्रधानमंत्री ने दिव्यांगजनों के लिए हाल ही में गोवा में हुए एक अनोखे ‘पर्पल फेस्ट’ का उल्लेख किया। उन्होंने दिव्यांग भाई-बहनों के लिए गोवा के सुलभ समुद्र तटों में एक ‘मीरामार बीच’ के बारे में बात की जहां आयोजित ‘पर्पल फेस्ट’ में हाल ही में 50 हजार से भी ज्यादा हमारे भाई-बहन इसमें शामिल हुए।

जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में ठोस प्रयास

प्रधानमंत्री ने ई-कचरे के उचित प्रबंधन के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ई-कचरे का उचित निपटान एक सर्कुलर अर्थव्यवस्था बनाने के लिए एक बड़ी ताकत बन सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में ठोस प्रयास कर रहा है। इन प्रयासों का ही नतीजा है कि 2014 में जहां रामसर साइट्स (वेटलैंड्स) 26 थीं, अब यह बढ़कर 75 हो गई हैं। इसके लिए स्थानीय समुदाय बधाई के पात्र हैं, जिन्होंने इस जैव विविधता को संजोकर रखा है। यह प्रकृति के साथ सद्भावपूर्वक रहने की सदियों से हमारी पुरानी संस्कृति और परंपरा का भी सम्मान है।

प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम की शुरुआत में कहा कि कर्तव्य पथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह के बारे में देशभर के लोगों ने पीएम के साथ अपने विचार साझा किए हैं। इस परेड में पहली बार हिस्सा लेने वाली महिला ऊंट सवारों और सीआरपीएफ की महिला टुकड़ी की भी सराहना हो रही है। गणतंत्र दिवस समारोह में अनेक पहलुओं की काफी प्रशंसा हो रही है। जैसलमेर से पुल्कित ने उन्हें लिखा है कि 26 जनवरी की परेड के दौरान कर्तव्य पथ का निर्माण करने वाले श्रमिकों को देखकर बहुत अच्छा लगा। कानपुर से जया ने लिखा है कि उन्हें परेड में शामिल झांकियों में भारतीय संस्कृति के विभिन्न पहलुओं को देखकर आनंद आया।

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