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15 Aug 2018      

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Chhapra (कबीर): विगत सालों में लगातार लापरवाही की वजह से लंबित होती परीक्षाएं और फिर छात्र संघ चुनाव की घोषणा के बाद छात्र और छात्र संघ की नींद टूटी है. देर ही सही छात्र जागे है, कुछ अच्छा होने की उम्मीद भी जगी है. डिजिटल क्रांति के इस दौर में छात्र और छात्र संगठन सोशल साइटों पर आंदोलन छेड़ रखी है. कास ये आंदोलन कुछ सालों पहले हुआ होता तो शायद जिन छात्रों ने आंदोलन छेड़ रखा है उनके स्वर्णिम जीवन काल के वर्ष यूँ ही बर्बाद नही होते.

खैर देर ही सही उम्मीद जगी है. छात्र संघ चुनाव में कई महाविद्यालयों में उपस्थिति के कारण चुनाव रद्द कर दिया गया. तब छात्रों ने कहा- क्लास करने गया था शिक्षक क्लास लेने नही आते, आते भी है तो समय से नही आते.

विगत दिनों हुए छात्र संघ चुनाव में उपस्थिति के कारण नामांकन रद्द होने पर छात्र और छात्र संगठन फेसबुक लाइव का सहारा लिया है और विभिन्न महाविद्यालयों में घूम-घूम कर कार्यालय में लगी घड़ी को दिखाते हुए क्लास नही चलने का सच दिखा रहे है. लाइव को देखने के मुताबिक कई महाविद्यालयों के विभागों में प्रोफेसर समय से पहुंचे दिख भी रहे है तो कई में तो दिन के 12 बजे तक कोई दिख भी रहा.

सोशल साइटों पर छात्रों का उत्साह को लोग सराहनीय बताते हुए ‘देर ही सही जगे तो सही’ जैसे कमेंट कर रहे है. आये दिन छात्र फेसबुक लाइव के जरिए स्थिति को दिखा रहे है.

बताते चले कि ये तत्परता कुछ सालों पहले दिखी होती तो शायद ये नौबत नही आती और सांसद को प्रेस वार्ता करके ये नही कहना पड़ता कि नेशनल मीडिया में खबर चलने के बाद मुझे ये कदम उठाना पड़ा. जब छात्र संघों से छपरा टुडे ने पिछले फेसबुक लाइव में बात की तब सभी अपनी उपलब्धियां बतायीं कि जो कुछ भी सुधरा है वो मेरी आंदोलन की वजह का नतीजा है.

लेकिन बड़ा सवाल ये है सोशल साइट पर शुरू हुआ आंदोलन कब तक चलेगा? क्या सोशल मीडिया पर छात्रों और छात्र संगठन द्वारा छेड़े गए आंदोलन से आएगा बदलाव? विगत दिनों छात्रों द्वारा हो रहे इस प्रयास का फल देखने को भी मिल रहा रहा. प्रोफसर समय से पहुंच रहे है. जरुरत है कि छात्र भी महाविद्यालयों तक क्लास करने पहुंचे. 

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