रात में स्मार्ट फ़ोन्स ने ली किताबों की जगह

रात में स्मार्ट फ़ोन्स ने ली किताबों की जगह

(कबीर अहमद)

समय के साथ सब कुछ बदलता है, वैसे भी परिवर्तन संसार का नियम है. विगत सालों में जो सबसे तेजी से बदलता दिखा है वो है हाथों में किताबों की जगह स्मार्ट फ़ोन्स. जो आंख कभी किताबों के पन्ने पढ़ने पर नींद की आगोश में खो जाती थी अब वो सोशल साइट्स को देखे बगैर पलक भी नही झपकती. वो भी क्या दिन थे जब युवाओं में किताबों को पढ़ने का शौक था. अब गूगल के सहारे ही ज़िन्दगी को बिताना बेहतर लगने लगा है. सवालों के जवाब के लिए किताबों के पन्ने पलटने के बजाय आसानी से गूगल पर सर्च करना बेहतर लगता है.

किताब पढ़ने का क्रेज खत्म होने लगा है. जिस कारण किताब की दुकानो से ज्यादा मोबाइल की दुकाने दिन प्रतिदिन खुलती जा रही है. जो लग्न पहले युवाओं में किताबों को खोजने, पढ़ने और किताबों को सहेज कर रखने में दिखती थी अब वो नदारत है. ऐसा लगता है किताबें अब अलमीरा की शोभा बढ़ाने मात्र रह गई है. लेकिन ऐसा हर जगह नही है. जिन्हें किताब पढ़कर सोने की आदत है वो अब भी बिना किताबों के पन्ने पलटे नही सोते.

डिजिटल क्रांति के इस दौर में हमे ये जरूर समझना चाहिए कि अगर ज्ञान अर्जित करना है तो किताब को अपना मित्र बनाना होगा. किताब एक ऐसा समुन्दर है इसे जो भी अपनाएगा उसकी ज्ञान रूपी प्यास बुझनी ही है.

छपरा टुडे डॉट कॉम की खबरों को Facebook पर पढ़ने कर लिए @ChhapraToday पर Like करे. हमें ट्विटर पर @ChhapraToday पर Follow करें. Video न्यूज़ के लिए हमारे YouTube चैनल को @ChhapraToday पर Subscribe करें