धरती बचाओ जीवन बचाओ!!

धरती बचाओ जीवन बचाओ!!

(अभिषेक)

हमारी पृथ्वी हमारे सौरमंडल का एकमात्र सुंदर ग्रह है, जिसमें जीवन है। जिस धरती ने इंसानों को अपनाया, अब इंसान उसी को नस्ट करने पर तुले है। सब कुछ अब बदल गया है इंसान, और दूसरे जानवरों ने अलग तरह से व्यवहार करना शुरू कर दिया है हम ने प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग और अंतिल सीमा तक दुरुपयोग करना शुरू कर दिया है।

आज की पीढ़ी पिछले बिस पच्चीस वर्षों में पृथ्वी के इतिहास में सबसे लापरवाह पीढ़ी है। हम केवल प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग और दुरुपयोग करते हैं और हम पौधों, वन, जल, वायु, आदि की परवाह नहीं कोई परवाह नही हैं। हमे लगता की हम क्या कर सकते और हम ही ये सब क्यों करे? हमे अपने स्वार्थ की चिंता है। अपना काम बनता तो भार मैं जाए दुनिया।

मुझे लगता है कि इन सभी समस्याओं का मुख्य कारण ये है की हम इस सच्चाई को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं कि जिस तरह से हम अपने जीवन को जी रहे हैं ये धरती के अंत का कारण बन गया है।

हमारा पर्यावरण पूरी तरह से प्रदूषित हो गया है, हम प्रदूषित पानी पीने पर मजबूर है धूल भरी हवा मे सास ले रहे है.. इत्यादि , और इसी वजह से हम अनेक बीमारियों से ग्रस्त होते जा रहे है।

हम में से प्रत्येक का विकास, पौधों और जंगल के कारण संभव हुआ है। जंगल हमे ऑक्सीजन, भोजन, आश्रय, चिकित्सा, फर्नीचर इत्यादि देते हैं। जंगल हमें सूरज की गर्मी, ठंडी लहरों और तेज बारिश से बचाते हैं।

वन प्रकृति पर्यावरण के मौसम और वायुमंडल के संतुलन को बनाए रखता है। वास्तव में, जंगल ही हमारा जीवन है, लेकिन हम जंगल को जी नष्ट कर रहे है जिसका मतलब है कि हम अपने जीवन और भविष्य को नष्ट कर रहे हैं।

पिछले कुछ वर्षों मे जो सकारात्मकता आई वो ये है कि दुनिया ने जलवायु परिवर्तन के बारे में बात करना शुरू कर दिया है। अमेरिका ,चाइना, भारत ,रूस और जापान इत्यादि के नेताओं ने इस महत्वपूर्ण विषय पर बोल रहे हैं। दुनिया भर के छात्र अपनी सरकार के खिलाफ दुनिया को बचाने के लिए विरोध कर रहे हैं। दूसरी जो सबसे बड़ी चुनौती इस समय दुनिया मे पहली बार आई है की वो लोग जो दुनिया को चला रहे हैं। जैसे ट्रंप , पुतिन ,मोदी, शी जिनपिंग और शिंजो अबे ये सभी लोग अपने आपको सबसे महान नेता साबित करने में लगे हुए हैं और अपना बहुत बड़ा पैसा इस पर खर्च कर रहे हैं। ये लोग दिखावे के लिए दुनिया को बचाने का नाटक कर रहे हैं। जमीन पर कोई ठोस बदलाव नजर नहीं आ रहे हैं।

सभी मानवीय गतिविधियों के परिणाम स्वरूप ओजोन छिद्र,समुद्र में वृद्धि, अंटार्कटिक आइकैप्स पिघल रहा है। अब ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन से सिर्फ धरती मां खतरे में नहीं है जीवन खतरे में है।

आइए हम अपनी धरती मां को जीवन देकर हमारे जीवन को बचाने के लिए एकजुट हो।

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