कभी पढ़ने के लिए नहीं जुट पाती थी फ़ीस, अब बन गए राजस्व अधिकारी

कभी पढ़ने के लिए नहीं जुट पाती थी फ़ीस, अब बन गए राजस्व अधिकारी

Chhapra: कहते हैं ‘मंजिले उन्ही को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है. पंखों से कुछ नहीं होता क्योंकि हौसलों से उड़ान होती है’. यह पंक्तियां छपरा के कृष्ण कुमार पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं. कभी कृष्ण के पास पढ़ाई की फीस भरने के लिए पैसे नहीं हुआ करते थे. लेकिन आज बीपीएससी की परीक्षा पास कर वह राजस्व अधिकारी बन गए है. कृष्ण के सामान्य परिवार के छात्र से राजस्व अधिकारी बनने की कहानी भी बेहद दिलचस्प है.

शहर के नई बाजार निवासी मदन प्रसाद गुप्ता के द्वितीय सुपुत्र कृष्ण कुमार आज सारण जिले के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं. कृष्ण के पिता का सरकारी बस स्टैंड के फुटपाथ पर एक छोटी सी दूकान चलाया करते थे. ऐसे में बस पेट भर जाए वही काफी था, लेकिन कृष्ण ने कुछ और ही करने की सोची थी. बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई में रूचि रखने वाले कृष्ण के पास ट्यूशन की फ़ीस नहीं हुआ करती थी. इसको जुटाने के लिए वे खुद ट्यूशन पढ़ाते थे.

संघर्ष भरा रहा जीवन 

छपरा टुडे डॉट कॉम से बातचीत में उन्होंने अपने जीवन के संघर्ष को साझा किया. उन्होंने बताया कि उनके पिता सरकारी बस स्टैंड में फुटपाथ पर एक छोटा सा होटल चलाते थे. बचपन से ही पिता के साथ रहे और फुटपाथ पर लगे होटल पर पिता के काम में हाथ भी बटाते थे. इसके साथ ही साथ अपनी पढ़ाई भी करते थे. मैट्रिक,  इंटर पास किया तो लगा कि अब जीवन में कुछ करना चाहिए.  घर में पैसे की कमी थी, परिवार में चार भाई बहन थे. पिता की आय भी उस लायक नहीं थी की कृष्ण आगे की पढ़ाई कर सकें. फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और बच्चों को ट्यूशन पढ़ा कर पढ़ाई के खर्च को निकाला.सीटी. इंटर परीक्षा पास करने के बाद उन्होंने कई सरकारी नौकरी के लिए परीक्षाएं दी, लेकिन किसी ने सफलता नहीं मिली.  कभी कभी तो परीक्षा फॉर्म भरने के लिए पैसे नहीं हुआ करते थे. फिर भी किसी तरह जुगाड़ हो ही जाता था. लाखों परेशानियों के बावजूद उन्होंने मन लगाकर पढ़ाई की.

बिहार पुलिस में मिल रही थी नौकरी, लक्ष्य बड़ा था इसलिए छोड़ दी नौकरी

2010 उनकी मेहनत रंग लायी और बिहार पुलिस की परीक्षा वो सफल भी हो गए. लेकिन कृष्ण की मंजिल बिहार पुलिस नहीं थी. उनके शिक्षक एमके सिंह ने जो शुरू से और उनको पढ़ाई में मदद करते आ रहे हैं ने उन्हें पुलिस में ना जाने और लक्ष्य को बड़ा रखने की सलाह दी. 

फिर क्या था परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के बाद भी कृष्ण बिहार पुलिस की नौकरी नहीं की और अपने लक्ष्य को और बड़ा कर लिया. हालांकि परिवार वाले कृष्ण पर नौकरी करने का दबाव बना रहे थे. किसी तरह उन्होंने अपने पिता को मनाया और फिर आगे की तैयारी में जुट गए.

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पिता के फुटपाथी दुकान और फिर मोबाइल दूकान पर किया काम
धीरे धीरे परिवार में आर्थिक परेशानियां और बढ़ते जा रहे थे. पिता का होटल छोड़ अब भाई के छोटी सी मोबाइल की दुकान पर रहने लगे. इसके साथ ही अपनी तैयारी जारी रखी. 2011 में बीपीएससी 53-55वीं परीक्षा दी. उसमें पास भी हुए इंटरव्यू में सफलता नहीं मिली. साथ ही 2011 में सचिवालय सहायक की परीक्षा भी दी. लेकिन कोई सफलता नहीं मिली. फिर इसके बाद 2012 में टीईटी की परीक्षा दी. जिसके बाद 2014 में एक साल के लिए उत्क्रमित मध्य विद्यालय चकिया में प्रखण्ड शिक्षक रहे. उसमें भी छुट्टी के दिन समय निकाल कर पढ़ाई करते थे. जिसके बाद 2015 में सहायक बीपीएससी की परीक्षा दी. बिहार में 29 सीट के लिए परीक्षा हुई थी. कृष्ण को इस परीक्षा में पूरे बिहार में 17 वां रैंक मिला. सहायक की नौकरी जॉइन करने के बाद भी कृष्ण आगे बढ़ने से नहीं रुके. उन्होंने फिर से तैयारी की, परिवार की आर्थिक हालात थोड़े सुधर गए थे.

इसके बाद 2017 में 60वीं-62वीं बीपीएससी परीक्षा दी. इसके बाद 2019 के फरवरी में फाइनल रिजल्ट आया तो कृष्ण ने 168वां रैंक लाकर राजस्व पदाधिकारी बन गए.

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दोस्तों ने भी की तयारी करने में मदद
अपनी सफलता में वे अपने परिवार और शिक्षक के साथ दोस्तों का रोल अहम मानते है. कृष्ण ने बताया की आर्थिक तंगी के कारण उनके पास इतने पैसे भी नहीं होते थे कि प्रतियोगी परीक्षा की पुस्तक को खरीदें. ऐसे में उनके दोस्तों ने उसका साथ दिया. उन्होंने बताया कि उसके दोस्त अली अहमद अपनी किताबें उन्हें पढने के लिए देते थे. अपनी सफलता के बाद उन्होंने अपने दोस्त को भी धन्यवाद दिया है.

कृष्ण बताते हैं कि समय कितना भी बुरा हो आपको अपने लक्ष्य पर टिके रहना चाहिए. वह अपने पुराने दिनों को याद करते हुए बताते हैं कि उन्होंने अपने समय बहुत ही त्याग किया उनके भी शौक हुआ करते थे लेकिन सारे शौक को त्याग कर उन्होंने किसी तरह अपनी पढ़ाई की कभी लक्ष्य से नहीं भटके.

निःसंदेह  ही कृष्णा उन तमाम छात्रों के लिए प्रेरणास्रोत है, जो आभाव में रहते हुए भी सफलता हासिल करने में जुटे है.  छपरा टुडे डॉट कॉम कृष्ण कुमार को उनके उज्जवल भविष्य की शुभकामनाये देता है.

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